BJP सांसद शंभू शरण पटेल ने अपनी ही सरकार को घेरा, खोल दी पोल

बिहार में बेटियों के साथ हो रही घटनाओं पर बीजेपी राज्यसभा सांसद शंभू शरण पटेल ने अपनी ही सरकार की पुलिसिंग पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने पटना एसएसपी द्वारा फोन न उठाने का आरोप लगाते हुए बिहार की कानून-व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग की.

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बिहार में महिलाओं और बेटियों के साथ लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं को लेकर अब सत्ता पक्ष के भीतर से ही विरोध के सुर तेज हो गए हैं. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद शंभू शरण पटेल ने राज्य की पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वर्तमान समय में बिहार में पुलिसिंग पूरी तरह चरमरा गई है और अपराधियों के दिल से पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है.

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'16 बार फोन किया, मैसेज और मेल भेजा... फिर भी'

सांसद शंभू शरण पटेल ने पुलिस अधिकारियों की संवेदनहीनता को उजागर करते हुए अपने साथ घटी एक घटना का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि करीब तीन महीने पहले उनकी एक दूर की रिश्तेदार के साथ अनहोनी हुई थी. उन्होंने कहा, 'मैंने इस मामले में कार्रवाई के लिए पटना के एसएसपी को 16 बार फोन किया, टेक्स्ट मैसेज किए और अपने सरकारी ई-मेल से मेल भी भेजा. लेकिन एसएसपी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला. जब मैंने आरोपी को खुद फोन किया तो उसने मुझे ही गाली-गलौज दी और बाद में बेगूसराय व औरंगाबाद से मुझ पर दबाव बनाया जाने लगा.'

सांसद ने बताया कि बाद में जब उन्होंने व्यथित होकर डीजीपी को मैसेज किया, तब डीजीपी विनय कुमार ने रात 12 बजे फोन करके पूरी बात सुनी. लेकिन पटना एसएसपी का कोई रिस्पांस नहीं आया. उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में पुलिस अधिकारियों में जनप्रतिनिधियों के प्रति कोई जवाबदेही नहीं बची है.

'2005 वाला सुशासन का खौफ गायब, केवल मोनोपोली चल रही'

शंभू शरण पटेल ने कहा कि 2005 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सुशील मोदी के नेतृत्व में जिस सुशासन की नींव रखी गई थी, उसी की बदौलत जनता ने 20 साल से एनडीए पर भरोसा जताया है. उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा, '2005 से 2010 के बीच अपराधियों में पुलिस का इतना खौफ था कि वे या तो मारे गए थे या बिहार छोड़ भाग गए थे. लेकिन आज स्थिति अलग है. बिहार में पुलिसिंग की मोनोपोली हो गई है. अफसर सिर्फ उन्हीं का फोन उठाते हैं या डरते हैं, जो उनका ट्रांसफर-पोस्टिंग करा सकते हैं.'

'छिटपुट घटना' बताने वाले मंत्रियों को करारा जवाब

घटनाओं को छिटपुट बताने वाले राज्य सरकार के कुछ मंत्रियों के बयानों पर बिफरते हुए बीजेपी सांसद ने कहा, 'किसी की बहन-बेटी के साथ जब बदसलूकी होती है तो उस परिवार पर क्या बीतती है, यह उनसे जाकर पूछिए. अमेरिका, जापान या कैलिफोर्निया की इकोनॉमी से तुलना करने से पहले अपना काम ठीक कीजिए. किसी की बेटी के साथ हुई घटना को छिटपुट कहना पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना है.'

कड़क और ईमानदार अफसरों को जिम्मेदारी देने की मांग

सांसद ने केंद्र सरकार के प्रशासनिक तंत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में किसी भी केंद्रीय अधिकारी या मंत्री को पत्र या फोन करने पर तुरंत रिस्पांस मिलता है, जबकि बिहार में सांसदों तक की बात को अनसुना कर दिया जाता है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिसिंग में व्यापक फेरबदल नहीं किया गया और ईमानदार अफसरों को कमान नहीं सौंपी गई, तो जनता का विश्वास सरकार से उठ जाएगा.

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