पप्पू यादव को 31 साल पुराने मामले में मिली जमानत, लेकिन अभी जेल में ही रहेंगे!

Pappu Yadav Bail News: पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को 31 साल पुराने मामले में एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट से जमानत मिल गई है, लेकिन गिरफ्तारी के दौरान पुलिस से सहयोग नहीं करने के आरोप वाले दूसरे केस के कारण उन्हें अभी जेल में ही रहना होगा. जानिए 1995 के इस केस की पूरी कहानी, गिरफ्तारी से लेकर कोर्ट की सुनवाई तक का पूरा घटनाक्रम.

Pappu Yadav
31 साल पुराने मामले मे पप्पू यादव को मिली जमानत

सुजीत कुमार

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पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. 6 फरवरी को उनकी गिरफ्तारी के बाद अब उन्हें बेल मिल गई है. पप्पू यादव को यह बेल 31 साल पुराने मामले में मिली है, लेकिन उन्हें अभी जेल में ही रहना होगा. दरअसल इस मामले में सुनवाई बीते कल यानी 9 फरवरी को ही होना था लेकिन पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली जिसके बाद यह सुनवाई टल गई थी. आज यानी 10 फरवरी को एमपी-एमएलए की स्पेशल कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है.

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बेल मिली लेकिन अभी जेल में ही रहेंगे

पप्पू यादव को भले ही 31 साल पुराने मामले में बेल मिल गई है लेकिन अभी भी उन्हें जेल में ही रहना होगा. मिली जानकारी के मुताबिक 6 फरवरी को जब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची थी तब वहां पर उन्होंने पुलिस का साथ नहीं दिया था, जिसे लेकर बुद्धा कॉलोनी थाने में केस दर्ज हुआ था. अब इसी मामले में उन्हें जमानत लेनी होगी और फिर वह बाहर निकल पाएंगे. बताया जा रहा कि कल यानी 11 फरवरी को इस मामले में सुनवाई होगी, वहीं आज पप्पू यादव फिर से बेऊर जेल भेज दिए गए है.

यहां देखें वकील का बयान

6 तारीख को हुई थी गिरफ्तारी

आपको बता दें कि 6 फरवरी की देर शाम राजनीतिक गलियारों में हलचल तब तेज हो गई जब पप्पू यादव की गिरफ्तारी के लिए पुलिस पहुंची. रात करीबन 12 बजे पप्पू यादव को गिरफ्तार किया गया. इस दौरान सांसद के आंखों में आंसू देखे गए और साथ ही उनके समर्थकों में खूब नारेबाजी की.

क्या है 31 साल पुराना मामला?

यह कानूनी विवाद साल 1995 का है, जब पटना के गर्दनीबाग थाने में एफआईआर संख्या 552/1995 दर्ज कराई गई थी. शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि उनका मकान धोखे से किराए पर लिया गया था. आरोप के मुताबिक, किराएदार ने अपनी असली पहचान और इरादे छिपाकर उस घर का इस्तेमाल 'सांसद कार्यालय' के रूप में करना शुरू कर दिया.

जब मकान मालिक ने इस पर आपत्ति जताई और घर खाली करने को कहा, तो उन्हें कथित तौर पर जान से मारने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं. यह मामला सालों तक अदालती फाइलों में दबा रहा, लेकिन अब विशेष अदालत ने इसे अंतिम स्तर की सख्त कार्यवाही के लिए चुन लिया था.

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