बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) की परीक्षाओं में हो रही देरी को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा अब सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है. पटना के गर्दनीबाग में 15 सूत्री मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन में बड़ी संख्या में BSSC के छात्र-छात्राएं जुटने लगे हैं. छात्रों का आरोप है कि 2023 में नोटिफिकेशन जारी होने के बाद से तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक न तो परीक्षा की तारीख तय हुई है और न ही कोई एग्जाम कैलेंडर जारी किया गया है. आयोग बार-बार केवल पोर्टल खोलने का काम कर रहा है और हर 15 दिन में तारीख देने का झूठा आश्वासन देता है, जिससे लगभग 50 लाख अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है.
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छात्रों की तीन मुख्य मांगें और पारदर्शिता का मुद्दा
प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार और आयोग के सामने अपनी मांगें स्पष्ट रख दी हैं. छात्रों की पहली और प्रमुख मांग है कि आयोग अविलंब परीक्षा की तारीख की घोषणा करें. दूसरी मांग के तहत संविदा वेटेज (Contractual Weightage) को समाप्त करने की बात कही गई है ताकि सभी अभ्यर्थियों को एक समान अवसर मिल सके.
वहीं, तीसरी सबसे बड़ी मांग परीक्षा में पूर्ण पारदर्शिता को लेकर है. छात्रों का कहना है कि परीक्षा के बाद प्रश्न पुस्तिका, उत्तर कुंजी/ओएमआर शीट (OMR Sheet) और कट-ऑफ मार्क्स सार्वजनिक किए जाने चाहिए. परीक्षा ऑनलाइन होगी या ऑफलाइन, इसको लेकर बने असमंजस को भी दूर करने की मांग की गई है.
25 तारीख को पटना जाम और बड़े आंदोलन की तैयारी
अपनी मांगों को लेकर उग्र हुए छात्रों और छात्र नेताओं ने आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया है. आंदोलनकारियों ने बताया कि एक साथी आमरण अनशन पर बैठा हुआ है. इसके साथ ही ऐलान किया गया है कि 25 तारीख को पूरे बिहार से युवा बस, ट्रक और ऑटो के जरिए पटना पहुंचेंगे, जिससे पूरा शहर चक्का जाम नजर आएगा. आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से मुख्यमंत्री आवास या विधानसभा का घेराव करेंगे. छात्रों का साफ कहना है कि यदि आयोग के अधिकारी परीक्षा कराने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें अपनी कुर्सी छोड़ देनी चाहिए.
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