Chhapra Sadar Hospital: टूटे पैर पर मेडिकल प्लास्टर की जगह लगाया कागज का गत्ता, PMCH रेफर मरीज का वीडियो वायरल

छपरा सदर अस्पताल में सड़क हादसे में घायल युवक के टूटे पैर पर मेडिकल प्लास्टर की जगह कागज का गत्ता लगाए जाने का वीडियो सामने आया है. अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है.

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छपरा सदर अस्पताल में इलाज का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सड़क हादसे में घायल एक युवक के टूटे पैर को प्राथमिक उपचार के दौरान मेडिकल प्लास्टर की जगह कागज के गत्ते से सपोर्ट देकर बांध दिया गया. इसके बाद मरीज को बेहतर इलाज के लिए पटना के PMCH रेफर कर दिया गया. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में है. 

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डिलीवरी ब्वॉयज को अनियंत्रित ट्रक ने मारी थी टक्कर

बताया जा रहा है कि छपरा के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के लाल बाजार में एक ट्रक की टक्कर से ऑनलाइन कंपनियों का सामान डिलीवर करने वाले दो डिलीवरी ब्वॉय घायल हो गए थे. हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने दोनों को इलाज के लिए छपरा सदर अस्पताल पहुंचाया. अस्पताल की इमरजेंसी में ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक सुब्रत कुमार ने दोनों घायलों का प्राथमिक उपचार किया. इसी दौरान एक घायल के पैर में फ्रैक्चर होने पर उसे सपोर्ट देने के लिए कागज के गत्ते का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है. इसके बाद घायल को बेहतर इलाज के लिए पटना PMCH रेफर कर दिया गया.

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

इस घटना का किसी व्यक्ति ने मोबाइल फोन से वीडियो बना लिया. बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया और तेजी से चर्चा में आ गया. वीडियो सामने आने के बाद लोग अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और इलाज के तरीके को लेकर सवाल उठा रहे हैं. हादसे में घायल युवकों की पहचान डोरीगंज थाना क्षेत्र के मोहद्दीपुर गांव निवासी रंजीत चौरसिया के 24 वर्षीय बेटे अविनाश कुमार और बदलपुरा निवासी अमर सिंह के 28 वर्षीय बेटे राहुल कुमार सिंह के तौर पर हुई है.

अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?

मामले की जानकारी सामने आने के बाद छपरा सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. केएम दुबे ने इसे गलत बताया है. उन्होंने कहा कि घायल मरीज की पूरी मेडिकल रिपोर्ट देखी जाएगी. इसके बाद मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी और जो भी व्यक्ति जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. अस्पताल प्रशासन की ओर से जांच की बात ऐसे समय में सामने आई है, जब बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है. स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार भी अलग-अलग अस्पतालों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए नए भवनों और अन्य व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है.

ऐसे में छपरा सदर अस्पताल से सामने आया यह मामला एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली प्राथमिक चिकित्सा और उपलब्ध संसाधनों की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है. अब जांच के बाद ही यह साफ होगा कि घायल के पैर पर गत्ते का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया गया और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है.

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