राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने की मांग को लेकर जारी प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान का बड़ा बयान सामने आया है. दिल्ली रवाना होने से पहले पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए चिराग पासवान ने साफ शब्दों में कहा कि आरक्षण किसी के मांगने या प्रदर्शन करने से समाप्त होने वाली व्यवस्था नहीं है. यह कोई खैरात नहीं, बल्कि देश के संविधान द्वारा दिया गया एक मौलिक अधिकार है.
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'भेदभाव के शिकार वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ना ही मकसद'
केंद्रीय मंत्री ने आरक्षण की नींव और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की सोच का जिक्र करते हुए कहा कि इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य उन वर्गों को समाज की मुख्यधारा में लाना है, जिन्होंने सदियों से सामाजिक और जातिगत भेदभाव झेला है. उन्होंने कहा कि चाहे अनुसूचित जाति (SC) हो या अनुसूचित जनजाति (ST), संविधान में उन्हें विशेष सुरक्षा इसीलिए दी गई ताकि उनके साथ हो रहे अन्याय को समाप्त किया जा सके.
चिराग पासवान ने यह भी रेखांकित किया कि समय के साथ आरक्षण का दायरा और विस्तृत हुआ है और आज सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों (EWS) को भी इसका लाभ मिल रहा है. ऐसे में इतने व्यापक और संवैधानिक ढांचे को रातों-रात खत्म करने की बात करना व्यावहारिक नहीं है.
'संवाद से निकलेगा समाधान'
सामाजिक न्याय की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आज 21वीं सदी में भी देश के अलग-अलग हिस्सों से जातिगत भेदभाव की खबरें सामने आती हैं, जो यह साबित करती हैं कि समाज में अभी भी सुधार की सख्त जरूरत है.
हालांकि, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है. उन्होंने किसी भी विवाद का हल संवाद के जरिए निकालने की वकालत की. चिराग ने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों के साथ बैठकर बातचीत की जाए और उन्हें आरक्षण के पीछे के ऐतिहासिक कारणों व सामाजिक न्याय की आवश्यकता के बारे में समझाया जाए, तो गतिरोध दूर हो सकता है.
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