युवाओं के बीच अलग अंदाज में नजर आएं चिराग पासवान, मंच से कही बड़ी बात

पटना में 'Youth BOLE TO' कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने युवाओं से सीधा संवाद किया. उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि दूसरों के दबाव में करियर न चुनें, बल्कि अपने हुनर और पैशन को पहचानकर आगे बढ़ें.

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राजधानी पटना में आयोजित 'Youth BOLE TO' (यूथ बोले तो) कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला. युवाओं के इस मंच से गरजते हुए चिराग ने सीधे छात्रों और युवाओं से संवाद किया. उन्होंने कहा कि आज वे यहां किसी मंत्री की हैसियत से भाषण देने नहीं आए हैं, बल्कि एक बड़ा भाई बनकर उनकी समस्याओं, शिकायतों और सवालों का समाधान ढूंढने आए हैं.

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'दूसरों के सपनों को जीना बंद करें युवा'

मंच से युवाओं को संबोधित करते हुए चिराग पासवान ने करियर और स्किल डेवलपमेंट पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि आज युवा सबसे ज्यादा तनाव में तब आता है, जब वह अपने मन की बात सुनने के बजाय दूसरों के दबाव में फैसले लेता है. चिराग पासवान ने कहा, आपको बताया जाता है कि आपको डॉक्टर बनना है, इंजीनियर बनना है, आईएएस या आईपीएस ही बनना है. कोई आपसे आपकी पसंद नहीं पूछता. अगर आपको आर्टिस्ट, यूट्यूबर या डिजिटल क्रिएटर बनना है, तो खुलकर बोलिए. जिस दिन आप दूसरों के सपनों को जीना बंद कर देंगे, आधी निराशा वहीं खत्म हो जाएगी.

बॉलीवुड की नाकामी का दिया उदाहरण

अपनी निजी जिंदगी का उदाहरण देते हुए चिराग पासवान ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि वे भी एक समय गलत क्षेत्र में चले गए थे. उन्होंने कहा, मैं राजनीति से पहले फिल्मों में गया था, वहां काम करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुआ. क्यों नहीं हो पाया? क्योंकि वो हुनर मुझ में था ही नहीं. आज जब मैं राजनीति में दिन-रात मेहनत करता हूं, तो थकावट नहीं होती, क्योंकि इस काम से मेरा दिल जुड़ा है. उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि यूपीएससी या बीपीएससी में असफल होने पर निराश न हों और न ही कोई गलत कदम उठाएं.  हर व्यक्ति के अंदर कोई न कोई हुनर जरूर होता है, बस उसे पहचानने की जरूरत है. 

निराशा और तनाव से बचने की दी सलाह

छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए चिराग पासवान ने देश के बड़े संस्थानों में छात्रों द्वारा उठाए जाने वाले आत्मघाती कदमों पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि सिस्टम के आगे घुटने टेकने के बजाय युवाओं को संघर्ष का रास्ता चुनना चाहिए.  उन्होंने वादा किया कि 'बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट' की सोच के साथ वे युवाओं की हर बात और सुझाव को उचित मंच तक पहुंचाएंगे.

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