Bihar: किसानों के लिए एक शानदार उदाहरण पेश किया है बिहार के बेगूसराय जिले के चेरिया बरियारपुर के मेहदा शाहपुर गांव के किसान अखिलेश रंजन ने. उन्होंने खेती में हो रही समस्याओं का देसी जुगाड़ लगाकर ऐसा समाधान ढूंढा, जिसने न सिर्फ उनकी लागत घटाई, बल्कि समय की भी बचत की. उनका यह जुगाड़ अब किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है.
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गूगल और यूट्यूब से मिली प्रेरणा
अखिलेश रंजन एग्रीकल्चर की पढ़ाई के साथ-साथ खेती और एक प्राइवेट कंपनी में कृषि से जुड़े काम करते हैं. उन्होंने किसानों की समस्याओं को करीब से समझा. उन्हें महसूस हुआ कि खेतों में कीटनाशक दवाओं के छिड़काव में काफी परेशानी होती है. इसी समस्या का हल निकालने के लिए उन्होंने गूगल और यूट्यूब का सहारा लिया. जापान की तकनीक को देखकर उन्होंने इसे अपने खेतों के हिसाब से कस्टमाइज़ करने का फैसला किया.
कैसे तैयार हुई अनोखी स्प्रे मशीन?
अखिलेश ने जापान और पंजाब में प्रचलित कृषि तकनीकों का अध्ययन किया और इसके आधार पर एक ऐसी मशीन तैयार की जो ट्रैक्टर में फिट हो सके. उन्होंने करीब 3 लाख रुपये खर्च कर विदेश से पाइप, टंकी और अन्य मशीनरी मंगवाई. लेकिन, समस्या तब आई जब ट्रैक्टर के भारी पहिए फसलों को नुकसान पहुंचाने लगे. इसके समाधान के लिए उन्होंने पुराने तांगे के डिज़ाइन से प्रेरणा ली और लोहे के मजबूत पतले चक्के बनवाए, जिन्हें ट्रैक्टर में फिट कर दिया.
इस पूरी प्रक्रिया में उन्होंने लगभग 4 लाख रुपये खर्च करएक ऐसी स्प्रे मशीन तैयार की, जो 40 फीट चौड़ाई तक केवल 15-20 मिनट में छिड़काव कर सकती है.
किसानों के लिए वरदान बनी मशीन
अखिलेश रंजन की इस मशीन ने मोकामा के टाल क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें काफी हद तक कम कर दी हैं. अब छिड़काव का काम जल्दी और आसानी से हो रहा है. इस जुगाड़ ने किसानों की 70 से 80 प्रतिशत तक लागतऔर समय की बचत कर दी है.
सरकार और समाज का भी मिला समर्थन
इस मशीन के उपयोग से किसानों को जो फायदा हुआ, उसने अखिलेश रंजन को इलाके में हीरो बना दिया है. उनकी तकनीक ने न सिर्फ बिहार बल्कि अन्य राज्यों के किसानों को भी प्रेरित किया है. अखिलेश का यह जुगाड़ साबित करता है कि यदि सही दिशा में मेहनत और दिमाग लगाया जाए, तो बड़े-बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं.
अखिलेश रंजन का यह देसी जुगाड़ भारतीय किसानों की मेहनत और नवाचार का बेहतरीन उदाहरण है. गूगल, यूट्यूब और अपनी सोच से उन्होंने साबित कर दिया कि तकनीक और जुगाड़ के मेल से खेती को न सिर्फ आसान बनाया जा सकता है, बल्कि किसानों की आमदनी भी बढ़ाई जा सकती है.
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