Jee Main Result: गया के शुभम को जेईई में मिला 100 पर्सेंटाइल, अब बता दिया अपना सक्सेस मंत्रा

JEE Main 2026 result: गया के छात्र शुभम ने JEE Main 2026 सेशन-1 में 100 पर्सेंटाइल हासिल कर बिहार का नाम रोशन किया. National Testing Agency द्वारा जारी रिजल्ट में शुभम ने ऑल इंडिया स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त किया. जानिए कोटा में की गई तैयारी, रोज 10-14 घंटे की पढ़ाई और उनका सक्सेस मंत्र.

Gaya student JEE topper
शुभम को जेईई में मिला 100 पर्सेंटाइल

पंकज कुमार

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बीती रात NTA(National Testing Agency) ने देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग एंट्री एग्जाम Jee Mains 2026 सेशन - 1 का रिजल्ट जारी किया. इस प्रवेश परीक्षा में कुल 13 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने भाग लिया था, जिसमें 12 ऐसे बच्चे है जिन्हें 100 पर्सेंटाइल मार्क्स मिले है. इसमें सबसे ज्यादा बच्चे राजस्थान से है जहां के 3 बच्चों को 100 पर्सेंटाइल मार्क्स मिले. इसी लिस्ट में बिहार के गया के रहने वाले शुभम का भी नाम है. हमारी रिपोर्टर से बातचीत करते हुए शुभम ने अपने सफलता का मंत्र बताया और साथ ही इस मुकाम तक पहुंचने की पूरी कहानी भी बताई. आइए विस्तार से जानते हैं पूरी कहानी.

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गया के साथ-साथ किया बिहार का नाम रौशन

100 पर्सेंटाइल वाले 12 लोगों की लिस्ट में अपना नाम लाकर शुभम ने ना सिर्फ गया बल्कि बिहार का नाम भी रौशन किया है.  राज्य स्तर पर टॉप करने के साथ-साथ शुभम ने ऑल इंडिया रैंकिंग में भी तीसरा स्थान प्राप्त किया है. शुभम गया जिले के ब्राह्मणी घाट का रहने वाला है. शुभम के पिता गया के रमना रोड पर एक हार्डवेयर की दुकान चलाते है और वहीं उनकी मां कंचन देवी घरेलु महिला है.

कोटा में रहकर की पढ़ाई

शुभम ने अपनी दसवीं की पढ़ाई गया के ही एक प्राइवेट स्कूल से की है. इसके बाद वो राजस्थान के कोटा शहर चले गए जहां पिछले 2 साल से वो इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे थे. शुभम ने बताया कि आज वह 100 पर्सेंटाइल लाकर काफी खुश है और इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने 2 साल तक लगातार मेहनत किया. शुभम ने बताया की राजस्थान में रहकर पढाई करते समय मुझे कभी भी यह नहीं लगा की मैं बहुत तकलीफ में हूं. शुभम ने बताया की जब वह अपना शहर छोड़ रहे थे तब परिवार पर थोड़ा आर्थिक संकट आया था लेकिन उसके बाद सब ठीक हो गया.

किसको देंगे अपनी सफलता का श्रेय?

शुभम ने बताया की इस मुकाम का हासिल करने का श्रेय वो अपने माता-पिता को देना चाहेंगे क्योंकि उन्होंने मेरा हमेशा सपोर्ट किया है. इसके अलावा मैं उन सभी टीचर्स को इसका श्रेय दूंगा क्योंकि उन्होंने मेरे सारे डॉब्ट्स क्लियर किया है. शुभम ने यह भी बताया कि यह मुकाम आसान नहीं था क्योंकि इसके लिए उन्हें प्रतिदिन 10 से 12 घंटे पढ़ाई करना पड़ता था और कभी-कभी तो 14 घंटे पढ़ाई करना पड़ता था.

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