झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य के साथ-साथ पड़ोसी राज्य बिहार की राजनीति में भी एक बड़ा सियासी भूचाल ला दिया है. इस चुनाव में जहां इंडिया गठबंधन की बढ़त मानी जा रही थी और दावा किया जा रहा था कि वह दोनों सीटों पर जीत दर्ज करेगी, वहीं आखिरी नतीजों ने पूरे राजनीतिक समीकरण को ही बदलकर रख दिया. 56 विधायकों के भारी-भरकम संख्या बल के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को करारी हार का सामना करना पड़ा है और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने बाजी मार ली है. इस हार के बाद महागठबंधन के भीतर क्रॉस वोटिंग और धोखेबाजी के आरोपों ने सियासी गलियारे में हलचल तेज कर दी है. साथ ही चर्चाएं तेज है कि क्या तेजस्वी यादव ने बिहार में हुई हार का बदला कांग्रेस से झारखंड में ले लिया है. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.
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क्या था झारखंड विधानसभा का गणित
झारखंड विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं और राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 28 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोट की आवश्यकता थी. आंकड़ों के लिहाज से इंडिया ब्लॉक के पास कुल 56 विधायक थे, जिनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के 4 और भाजपा माले के 2 विधायक शामिल थे.
दूसरी तरफ, एनडीए के पास बीजेपी के 21, आजसू के 1, जेडीयू के 1 और लोजपा (रामविलास) के 1 विधायक को मिलाकर कुल 24 सीटें थीं, यानी उन्हें जीत के लिए 4 अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी. इस पूरे गणित में जेएमएम के उम्मीदवार वैद्यनाथ राम की जीत पहले से तय मानी जा रही थी और उन्हें उम्मीद के मुताबिक 28 वोट मिले भी, लेकिन असली खेल दूसरी सीट पर हुआ जहां कांग्रेस के प्रणव झा का मुकाबला दिग्गज परिमल नाथवानी से था.
मुकाबले में ऐसे पिछड़ गई कांग्रेस
कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को जीत हासिल करने के लिए जेएमएम के बचे हुए 6 वोटों के साथ-साथ कांग्रेस के 16, आरजेडी के 4 और माले के 2 विधायकों के एकजुट समर्थन की जरूरत थी. लेकिन चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया कि महागठबंधन के विधायक एकजुट नहीं रह सके. परिमल नाथवानी ने शानदार तरीके से 28 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस के प्रणव झा महज 20 वोटों पर ही सिमट कर रह गए.
इस करारी हार के बाद कांग्रेस की तरफ से सीधे तौर पर सहयोगी दलों पर धोखा देने के आरोप लगाए जा रहे हैं. कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि उनके पास कुल 26 वोट होने चाहिए थे लेकिन उन्हें सिर्फ 20 या 21 वोट ही मिले, जिसमें से एक वोट अमान्य भी हो गया. शुरुआती आकलन के अनुसार कांग्रेस का मानना है कि आरजेडी और माले के विधायकों ने उन्हें वोट नहीं दिया है.
क्या तेजस्वी ने लिया बिहार का बदला?
झारखंड की इस हार को सीधे तौर पर बिहार में कुछ समय पहले हुए राज्यसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है, जहां मार्च 2026 में हुए चुनाव में महागठबंधन को बड़ा झटका लगा था. बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए चुनाव में विपक्ष एकजुट होकर एक सीट जीत सकता था और आरजेडी के उम्मीदवार एडी सिंह की जीत तय मानी जा रही थी. लेकिन 16 मार्च 2026 को हुए मतदान के दौरान कांग्रेस के तीन विधायक अचानक गायब हो गए और आरजेडी का एक विधायक वोट डालने ही नहीं आया, जिसके चलते एनडीए के पांचवें उम्मीदवार शिवेश राम की जीत हो गई थी. बिहार में कांग्रेस के 6 विधायकों में से 3 ने आरजेडी उम्मीदवार को वोट नहीं दिया था. ऐसे में अब राजनीतिक विश्लेषक यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या तेजस्वी यादव ने बिहार में मिली उस हार का बदला झारखंड में कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को हराकर पूरा कर लिया है.
बीजेपी ने जताई अंतरात्मा की आवाज
कांग्रेस की इस बड़ी हार और परिमल नाथवानी की जीत पर विपक्षी खेमे में भारी उत्साह देखा जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं का कहना है कि महागठबंधन के लोग चुनाव से पहले बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे, लेकिन माननीय विधायक उनके बहकावे में नहीं आए. बीजेपी का दावा है कि राज्य के विधायक भी यह अच्छी तरह जानते हैं कि देश और राज्य का भला केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी ही कर सकती है. उनके विकास कार्यों और विचारों को देखते हुए विधायकों ने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर परिमल नाथवानी को वोट देकर जिताने का काम किया है.
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