भारतीय रेलवे स्टेशनों से पुलिसकर्मियों की तत्परता और जांबाजी के कई मामले अक्सर सामने आते रहते हैं, लेकिन 8 अक्टूबर को कटिहार रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर जो कुछ हुआ, उसने खाकी के प्रति सम्मान और इंसानियत की एक अनोखी मिसाल कायम कर दी है. कोलकाता-जोगबनी एक्सप्रेस ट्रेन के जनरल डिब्बे में सफर कर रहे 50 वर्षीय यात्री तेजस मंडल (निवासी: मालदा, पश्चिम बंगाल) को अचानक दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ गया और उनकी सांसें थमने लगीं. वे इलाज कराने के लिए जोगबनी जा रहे थे. तभी प्लेटफॉर्म पर मुस्तैद आरपीएफ की महिला सब-इंस्पेक्टर (SI) सारिका और उनकी 4 सदस्यीय टीम समय रहते मौके पर पहुंच गई और यात्री की जान बचा ली.
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प्लेटफॉर्म पर तड़प रहे यात्री के लिए 'भगवान' बनकर आईं SI सारिका
ट्रेन में यात्री की तबीयत बिगड़ने और प्लेटफॉर्म पर लोगों की भीड़ जुटते ही रनिंग ड्यूटी पर तैनात RPF की सब-इंस्पेक्टर सारिका अपनी टीम के साथ तुरंत हरकत में आईं.
- तत्काल कदम: टीम ने बिना एक पल गंवाए अचेत पड़े तेजस मंडल को प्लेटफॉर्म पर लगी यात्रियों की बेंच पर लिटाया.
- जीवनरक्षक CPR: SI सारिका ने तुरंत आगे बढ़कर मरीज को लगातार 2 मिनट तक सीपीआर (CPR - कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू किया.
- रक्त प्रवाह सुचारू किया: इस दौरान टीम में मौजूद कांस्टेबल एस. के. यादव और अन्य दो जवानों ने मरीज की हथेलियों, पैरों और शरीर को रगड़ना शुरू किया ताकि ब्लड सर्कुलेशन चालू रह सके.
कड़ी मशक्कत और सही समय पर मिली इस प्राथमिक चिकित्सा के बाद तेजस मंडल की रुकी हुई सांसें वापस लौट आईं.
सदर अस्पताल में भर्ती, स्थिति अब खतरे से बाहर
सांसें वापस आने के बाद रेल प्रशासन और पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मरीज को बेहतर इलाज के लिए कटिहार सदर अस्पताल भिजवाया. अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में इलाज के बाद अब तेजस मंडल की हालत स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं. आरपीएफ टीम ने मालदा स्थित उनके परिजनों को हादसे की सूचना दे दी है, जो कटिहार के लिए रवाना हो चुके हैं.
"ट्रेनिंग में जो सीखा था, वही काम आया"— हीरो बनीं SI सारिका
अपनी इस जांबाजी और सूझबूझ के बाद पूरे कटिहार रेलमंडल में 'हीरो' और 'देवदूत' के रूप में सराही जा रहीं SI सारिका ने पूरी घटना की जानकारी दी.
उन्होंने बताया:
जैसे ही हमें यात्री और रेल कर्मचारियों द्वारा प्लेटफॉर्म पर एक व्यक्ति को हार्ट स्ट्रोक आने की सूचना मिली, हम बिना देरी किए वहां पहुंचे और तुरंत CPR देना शुरू किया. लगभग 2 मिनट तक निरंतर CPR देने के बाद उनकी सांसें वापस आईं. आरपीएफ की शुरुआती ट्रेनिंग में हमें आपात स्थिति में सीपीआर देने का तरीका सिखाया और दिखाया जाता है, जो आज एक जिंदगी बचाने के काम आया.
ड्यूटी पर मौजूद कांस्टेबल एस. के. यादव ने भी बताया कि चार जवानों की उस टीम ने किस तरह एकजुट होकर मरीज के हाथ-पैर रगड़े और सीपीआर में मदद की.
कटिहार रेलमंडल में हो रही आरपीएफ टीम की तारीफ
आरपीएफ जवानों के इस तत्पर और मानवीय कदम ने यह साबित कर दिया कि वर्दी सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ही नहीं, बल्कि जान बचाने के लिए भी हमेशा मुस्तैद रहती है. कटिहार प्लेटफॉर्म पर महिला एसआई सारिका और उनकी टीम द्वारा दिखाई गई इस मिसाल की हर तरफ तारीफ हो रही है.
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