पटना में कोचिंग संचालकों और शिक्षकों से जुड़े हालिया विवाद के बीच कानूनी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. एक तरफ जहां मशहूर शिक्षक खान सर को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ रौशन आनंद को फिलहाल जेल में ही रहना पड़ रहा है. इस स्थिति को लेकर आम जनता और छात्रों के बीच कई तरह के सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक ही मामले या मिलते-जुलते आरोपों में दो अलग-अलग फैसले क्यों देखने को मिल रहे हैं. इस पूरे कानूनी पेच और रौशन आनंद की जेल से बाहर आने की संभावनाओं पर पटना उच्च न्यायालय के जाने-माने वकील शिवनंदन भारती ने विस्तार से कानूनी पक्षों को सामने रखा है.
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निचली अदालत और सेशन कोर्ट के फैसले का अंतर
वकील शिवनंदन भारती ने स्पष्ट किया कि खान सर और रौशन आनंद के मामलों को अलग-अलग न्यायिक स्तरों पर सुना गया है. खान सर को गिरफ्तारी पर रोक (No Coercive Step) का आदेश डिस्ट्रिक्ट जज यानी सेशन न्यायालय की तरफ से मिला है. इसके विपरीत, रौशन आनंद की जमानत याचिका जिस अदालत से खारिज हुई है, वह मजिस्ट्रेट स्तर की निचली अदालत थी. अब चूंकि रौशन आनंद का मामला भी रिजेक्ट होकर सेशन न्यायालय के समानांतर पहुंच चुका है, इसलिए वहां बेहतर तरीके से कानूनी बहस होने के बाद उन्हें भी जल्द ही राहत मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है.
रौशन आनंद की रिहाई के तीन मुख्य कानूनी आधार
वकील शिवनंदन भारती के अनुसार, सेशन कोर्ट में रौशन आनंद की जमानत के लिए मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर बहस की जाएगी. इस पूरे मामले का सबसे बड़ा साक्ष्य घटनास्थल पर लगा सीसीटीवी (CCTV) कैमरा है, जिसकी फुटेज में रौशन आनंद कहीं भी नजर नहीं आ रहे हैं. इसके अलावा, एफआईआर में उनके खिलाफ कोई विशिष्ट आरोप नहीं लगाया गया है कि उन्होंने खुद अपने हाथ में बंदूक ली थी या किसी पर ईंट-पत्थर चलाए थे. उनके ऊपर केवल सामान्य आरोप हैं और चोट की प्रकृति को देखते हुए कोर्ट में केस डायरी मंगवाई जाएगी, जिसके बाद उनकी रिहाई का रास्ता आसान हो जाएगा.
एक को जेल और दूसरे को राहत के पीछे का सच
आम लोगों और छात्रों के बीच यह चर्चा है कि पत्थर चलवाने के आरोपी को जेल भेज दिया गया और गोली चलवाने के आरोपी को गिरफ्तारी से राहत दे दी गई. इस विरोधाभास को दूर करते हुए वकील भारती ने बताया कि कानून में 'इंजरी' की गंभीरता को देखना बेहद जरूरी होता है. खान सर के मामले में किसी को भी गोली लगने की पुष्टि नहीं हुई है, जबकि दूसरी तरफ रौशन आनंद वाले मामले में घायल व्यक्ति का बयान सामने आया है. कोर्ट इन तमाम पहलुओं को गहराई से परखती है और धाराओं के आधार पर ही मजिस्ट्रेट अपना फैसला तय करते हैं.
खान सर के बचाव में 'राइट टू सेल्फ डिफेंस' की दलील
खान सर को मिली राहत के पीछे के तकनीकी कारणों को समझाते हुए वकील ने कहा कि कोर्ट में आत्मरक्षा का नियम बेहद महत्वपूर्ण साबित होता है. खान सर की टीम कोर्ट में यह दलील दे सकती है कि उनके संस्थान पर हमला हुआ था और उनके सुरक्षा गार्डों ने केवल आत्मरक्षा और वहां मौजूद लोगों की जान बचाने के लिए न्यूनतम बल का प्रयोग करते हुए हवा में फायरिंग की थी. चूंकि इस हवाई फायरिंग से किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, इसलिए कानून के तहत अपनी जान और संपत्ति की रक्षा करने के अधिकार को कोर्ट ने स्वीकार किया है.
क्या पूरी तरह खत्म हो गई हैं खान सर की मुश्किलें?
कानूनी विशेषज्ञ शिवनंदन भारती ने साफ किया कि जब किसी आरोपी को अदालत से 'नो कोअर्सिव' का आदेश मिल जाता है, तो उसे जमानत का पहला दरवाजा माना जाता है. इसका सीधा मतलब यह होता है कि अदालत जमानत देने के पक्ष में झुकी हुई है, इसलिए खान सर को इस केस में फिलहाल जेल जाने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर भविष्य में मामले के ट्रायल के दौरान गवाहों ने उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश किए, तभी मुश्किलें बढ़ सकती हैं, अन्यथा एफआईआर की मौजूदा लिखावट के आधार पर खान साहब को इस मामले में कभी जेल नहीं जाना पड़ेगा.
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Khan Sir News: खान सर को अदालत से मिली बड़ी राहत, लेकिन क्या अभी नहीं टला है जेल जाने का खतरा?
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