पूरे देश में रक्षाबंधन का त्योहार बड़ी धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. इस खास अवसर पर बिहार की राजधानी पटना में भी एक अनोखा दृश्य देखने को मिला. पटना के मशहूर शिक्षक खान सर ने अपनी छात्राओं और बहनों के साथ रक्षाबंधन का पर्व बेहद ही खास अंदाज में मनाया. पटना के प्रसिद्ध एसके मेमोरियल हॉल में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. इस समारोह में हजारों की संख्या में छात्राएं और बहनें पहुंचीं और खान सर को रक्षासूत्र (राखी) बांधी.
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इसी दौरान खान सर ने मीडिया से बात करते हुए अपने पिछले रक्षाबंधन के वादे का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि पिछले साल उन्होंने कैंसर अस्पताल खोलने का प्रण लिया था और इस रक्षाबंधन तक उसकी चाबी सौंपने की योजना थी. अस्पताल लगभग बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन बीच में दो से तीन महीने का समय कुछ परिस्थितियों के कारण थोड़ा प्रभावित (डिस्टर्ब) हो गया. हालांकि, अदालत और अन्य सभी का सहयोग मिला है, जिसकी वजह से काम आगे बढ़ा है. खान सर ने स्पष्ट किया कि कैंसर अस्पताल का काम बंद नहीं हुआ है, बल्कि केवल दो से ढाई महीने की देरी हुई है. डॉक्टरों से बातचीत पूरी हो चुकी है और जल्द ही एक बेहतरीन कैंसर अस्पताल की शुरुआत की जाएगी.
रक्षाबंधन पर अनाथ आश्रम खोलने की बड़ी घोषणा
इस बार रक्षाबंधन के अवसर पर खान सर ने एक और महत्वपूर्ण और सामाजिक घोषणा की है. उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन की रात 12:01 बजे ही उन्होंने यह संकल्प लिया और अनाथ आश्रम (Orphanage) खोलने का ऐलान किया. खान सर ने कहा कि जिन बच्चों का परिवार में कोई नहीं है और जो अनाथ हैं, उनके दुख को समझते हुए यह कदम उठाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बहुत जल्द अनाथ आश्रम की स्थापना की जाएगी.
अनाथ बच्चों के भविष्य और शिक्षा का पूरा खाका तैयार
खान सर ने अनाथ आश्रम की पूरी योजना समझाते हुए कहा कि उनके पास एक पूरा इकोसिस्टम तैयार है. आश्रम के बच्चों को पढ़ाई-लिखाई से लेकर करियर तक की पूरी सुविधा दी जाएगी. यदि बच्चे डॉक्टर या नर्स बनना चाहेंगे, तो उनके ही अस्पताल में वे पढ़ाई और काम कर सकेंगे. प्रतियोगिता परीक्षाओं (कॉम्पिटिशन) और अधिकारी बनने की तैयारी भी उन्हीं के संस्थानों में करवाई जाएगी. इसके साथ ही, अनाथ आश्रम के बच्चों को अकेलेपन का अहसास नहीं होगा, क्योंकि कोचिंग में पढ़ने वाले अन्य छात्र-छात्राएं भी उनसे बातचीत करेंगे और आपस में घुल-मिलकर रहेंगे.
रक्षाबंधन का मुहूर्त और बहनों के प्रति खान सर का संदेश
रक्षाबंधन के पावन पर्व पर खान सर के पास बड़ी संख्या में बहनें राखी बांधने पहुंचीं. हालांकि, सुबह 10:30 से 12:30 बजे के बीच मुहूर्त न होने के कारण कई बहनें इंतजार कर रही थीं. खान सर ने कहा कि हमें अपने पूर्वजों की बनाई परंपराओं का पालन करना चाहिए, इसलिए 12:30 बजे मुहूर्त के बाद बाकी राखी बांधने का कार्यक्रम आगे बढ़ा. वहां पहुंची बहनों के लिए खाने-पीने का पूरा इंतजाम किया गया. अंत में खान सर ने संदेश देते हुए कहा कि बहनों के सपनों के आड़े कोई बाधा नहीं बननी चाहिए और समाज को उनके सपनों का सम्मान करना चाहिए. उन्हें खुलकर जीने का अधिकार मिलना चाहिए और उन पर जबरन बंदिशें नहीं थोपी जानी चाहिए.
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