बिहार की सियासत में इन दिनों नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की खबरों ने बाजार गर्म कर रखा है. लेकिन इन सबके बीच एक और बड़ी चर्चा जोरों पर है- क्या नीतीश कुमार के हटते ही बिहार में शराबबंदी कानून खत्म हो जाएगा? वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत प्रत्युष ने एक निजी बातचीत का हवाला देते हुए इस पर बड़ा खुलासा किया है.
ADVERTISEMENT
नीतीश के करीबी मंत्री का दावा
वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत प्रत्युष के अनुसार, नीतीश कुमार के एक बेहद करीबी मंत्री ने संकेत दिए हैं कि 31 मार्च के बाद बिहार में शराबबंदी खत्म हो सकती है. हालांकि, प्रत्युष का मानना है कि इसे पूरी तरह खत्म करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से ढील दी जा सकती है. चर्चा है कि नई सरकार के गठन के साथ ही इस कानून की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.
राजस्व का नुकसान और नई सरकार की चुनौती
बिहार सरकार को शराबबंदी के कारण सालाना करीब 30,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. बीजेपी और अन्य सहयोगी दल जैसे जीतन राम मांझी की पार्टी (HAM) और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी (RLM) पहले ही इस कानून की समीक्षा की मांग कर चुके हैं. राज्य में फाइव स्टार होटलों के बढ़ते निवेश और पर्यटन को हो रहे नुकसान को देखते हुए, माना जा रहा है कि होटलों और सरकारी आउटलेट्स के जरिए शराब की बिक्री फिर से शुरू की जा सकती है.
अवैध कारोबार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
शराबबंदी के बावजूद बिहार में अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है. नकली और जहरीली शराब से होने वाली मौतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. श्रीकांत प्रत्युष ने बताया कि शराबबंदी के नाम पर पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार बढ़ा है और कानून व्यवस्था प्रभावित हो रही है. ऐसे में नई सरकार राजस्व की भरपाई और रोजगार सृजन के लिए इस कानून में बड़े बदलाव कर सकती है.
ADVERTISEMENT


