बिहार की चर्चित लोक गायिका और विधायक मैथिली ठाकुर ने देश में आरक्षण को लेकर चल रही सियासी व सामाजिक बहस पर खुलकर अपनी बात रखी है. इंटरव्यू के दौरान जब उनसे आरक्षण और जातिगत व्यवस्था को लेकर उनके वायरल बयान पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि आज का युवा जाति और सरनेम के आधार पर भेदभाव से अलग हटकर समान अवसरों वाले समाज की सोच रखता है.
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'सरनेम के आधार पर न हो अलग व्यवहार'
आरक्षण पर अपनी सोच स्पष्ट करते हुए मैथिली ठाकुर ने कहा कि आज हर घर में इस विषय पर चर्चा हो रही है. उन्होंने कहा, 'भारत के युवा और जन-जी (Gen-Z) एक साथ खड़े हैं. मुझे नहीं लगता कि हममें से कोई भी युवा यह चाहेगा कि उसके सरनेम (जाति) के आधार पर उसके साथ किसी भी तरह का अलग व्यवहार किया जाए.' उन्होंने माना कि आरक्षण एक बेहद संवेदनशील और पेचीदा विषय है, जिस पर हर पक्ष के पास अपने तर्क और विचार हैं. कुछ लोग इसमें सुधार (Reforms) की मांग करते हैं तो कुछ इसके सामाजिक पक्षों की बात करते हैं.
'मैं एक इंडिविजुअल और यूथ के तौर पर सोचती हूं'
राजनीतिक और सामाजिक संतुलन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कई बार वे भूल जाती हैं कि वे एक जनप्रतिनिधि हैं और एक आम युवा के तौर पर लोगों से संवाद करती हैं. उनका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा समाज बनाने का है जहां हर नागरिक को पढ़ाई, बोलने और आगे बढ़ने के बराबर अधिकार और अवसर (Equal Opportunities) मिल सकें.
बिहार सरकार के कामकाज पर भी रखी बात
बिहार की एनडीए सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व पर चर्चा करते हुए मैथिली ठाकुर ने कहा कि राज्य में पिछले कुछ महीनों में सकारात्मक बदलाव दिखे हैं. उन्होंने बताया कि शिक्षकों की समस्याओं और सरकारी नौकरियों के मुद्दों पर सरकार बहुत गंभीरता और संवेदनशीलता से काम कर रही है, जिससे युवाओं और जनप्रतिनिधियों को काफी प्रोत्साहन मिल रहा है.
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