NEET परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामले ने पूरे देश के छात्रों को झकझोर कर रख दिया है. इस गंभीर मुद्दे पर देश के जाने-माने शिक्षक खान सर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बिहार तक को दिए एक विशेष इंटरव्यू में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सब बिना अंदरूनी मिलीभगत के मुमकिन नहीं है. खान सर ने पेपर लीक करने वाले सिंडिकेट की तुलना आतंकवादियों से करते हुए उन्हें समाज के लिए अधिक घातक बताया है.
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'अंदर के लोग मिले हैं, तभी बाहर आया पेपर'
खान सर ने सीधे तौर पर NTA के अधिकारियों की ईमानदारी पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि बिना अंदर के लोगों की मदद के इतनी हाई-सिक्योरिटी वाली परीक्षा का प्रश्न पत्र बाहर नहीं आ सकता. उनका मानना है कि सरकार चाहे जितनी भी लीपापोती कर ले, जब तक NTA के भीतर गहन जांच नहीं होगी, तब तक जड़ तक पहुंचना नामुमकिन है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर विभाग का मुखिया यह कहता है कि 'हम जिम्मेदारी लेते हैं', तो ऐसी जिम्मेदारी का छात्र क्या करेंगे? जिम्मेदारी लेने का मतलब यह होना चाहिए कि भविष्य में ऐसी गलती न हो और दोषियों को कड़ी सजा मिले.
'आतंकवादियों से भी ज्यादा खतरनाक है पेपर लीक गैंग'
इंटरव्यू के दौरान खान सर भावुक और आक्रोशित नजर आए. उन्होंने कहा कि पेपर लीक करने वाले लोग आतंकवादियों से भी ज्यादा खतरनाक हैं. उन्होंने तर्क दिया कि आतंकवादी एक सीमित संख्या में लोगों को निशाना बनाते हैं, लेकिन पेपर लीक करने वाले लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर देते हैं. जो अयोग्य व्यक्ति पैसे के दम पर डॉक्टर बनेगा, वह भविष्य में किसी की जान भी ले सकता है. खान सर ने मांग की कि जब तक इस अपराध के लिए फांसी जैसी कठोर सजा का प्रावधान नहीं होगा, तब तक यह धंधा बंद नहीं होगा.
NTA को भंग करने और CBI जांच पर उठाए सवाल
खान सर ने इस मामले की जांच के तरीके पर भी असहमति जताई. उन्होंने कहा कि केवल CBI जांच पर्याप्त नहीं है क्योंकि यह मामला करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है. उन्होंने सुझाव दिया कि NTA जैसी संस्था को पूरी तरह बदल देना चाहिए या इसे सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चलाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जिस तरह ISRO और DRDO सीधे PMO के अंडर काम करते हैं, वैसी ही सुरक्षा और गंभीरता परीक्षाओं के लिए भी होनी चाहिए.
'गरीब छात्रों के सपनों की हत्या है पेपर लीक'
छात्रों की पीड़ा बयां करते हुए खान सर ने कहा कि 23 लाख बच्चों में से 80 प्रतिशत ऐसे हैं जो अभावों में रहकर पढ़ाई करते हैं. कई लड़कियों के माता-पिता ने उन्हें आखिरी मौका दिया था, अब वे उन्हें दोबारा परीक्षा नहीं दिलाने देंगे और उनकी शादी कर देंगे. उन्होंने उन छात्रों का जिक्र किया जिनके माता-पिता ने खेत गिरवी रखकर या गहने बेचकर कोचिंग की फीस भरी थी. खान सर के अनुसार, दोबारा परीक्षा कराना समाधान नहीं है क्योंकि एक छात्र जो मानसिक तनाव झेलता है और जो पैसा खर्च करके सेंटर तक पहुंचता है, उसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता.
कोचिंग संस्थानों और बिजनेस नेक्सस पर प्रहार
खान सर ने इशारों-इशारों में कुछ बड़े कोचिंग संस्थानों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि आज कोचिंग एक हजारों करोड़ का बिजनेस बन गया है. कुछ रसूखदार लोग पेपर लीक कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर देते हैं ताकि उनके संस्थान का रिजल्ट बेहतर दिखे. उन्होंने मांग की कि जांच की शुरुआत उन्हीं से की जाए, वे अपनी संस्था की जांच कराने के लिए भी तैयार हैं.
बिहार के शिक्षकों और युवाओं के हालात पर चर्चा
नीट के अलावा खान सर ने बिहार में शिक्षकों पर हुए लाठीचार्ज और परीक्षा पैटर्न (TRE 4) में अचानक बदलाव पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जमीन पर उतरकर देखना चाहिए कि छात्र कितनी मेहनत करते हैं. उन्होंने सरकार को नसीहत दी कि अगर परीक्षा का स्तर IAS जैसा रखना है, तो सुविधाएं और वेतन भी वैसा ही देना होगा. अंत में उन्होंने छात्रों से धैर्य बनाए रखने की अपील की और वादा किया कि वे अपने छात्रों को दोबारा मुफ्त में रिवीजन कराएंगे.
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