बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली नई एनडीए सरकार में कैबिनेट विस्तार को लेकर पेंच फंसता नजर आ रहा है. जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार के ताजा बयानों ने संकेत दिए हैं कि नीतीश कुमार अब बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं. जेडीयू की मांग है कि मंत्रिमंडल में उनके मंत्रियों की संख्या बीजेपी से अधिक होनी चाहिए. विस्तार से जानिए पूरी बात.
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श्रवण कुमार बने JDU विधायक दल के नेता
सोमवार को हुई जेडीयू विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार को नेता चयन के लिए अधिकृत किया गया था. मंगलवार को नीतीश कुमार ने श्रवण कुमार के नाम पर मुहर लगा दी. श्रवण कुमार अब बिहार विधानसभा में जेडीयू विधायक दल के नेता होंगे. वे नीतीश कुमार की ही जाति (कुर्मी) और गृह क्षेत्र से आते हैं. इसके साथ ही जेडीयू ने विजय कुमार चौधरी (भूमिहार) और बिजेंद्र प्रसाद यादव (यादव) को उपमुख्यमंत्री बनाकर एक मजबूत जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है.
जेडीयू का 'एक ज्यादा' वाला फॉर्मूला
खबरों के मुताबिक, जेडीयू इस रणनीति पर काम कर रही है कि मंत्रिमंडल में उनके पास बीजेपी से हमेशा एक मंत्री ज्यादा हो. अगर बीजेपी के कोटे से 14 मंत्री शपथ लेते हैं, तो जेडीयू अपने 15 या 16 मंत्री बनाना चाहती है. श्रवण कुमार ने स्पष्ट कहा कि आने वाले कैबिनेट विस्तार में जेडीयू का कोटा बढ़ेगा और पिछली सरकार की तुलना में उनके ज्यादा लोग मंत्रिमंडल में शामिल होंगे.
नीतीश कुमार की 'बिहार यात्रा' और सक्रियता
बैठक के दौरान नीतीश कुमार ने अपने विधायकों को आश्वस्त किया कि वे बिहार छोड़कर कहीं नहीं जा रहे हैं. उन्होंने कहा, 'मैं पहले से भी ज्यादा बढ़-चढ़कर काम करूंगा और लोगों के बीच जाकर सरकार की उपलब्धियां बताऊंगा.' जरूरत पड़ने पर नीतीश कुमार एक बार फिर बिहार यात्रा पर भी निकल सकते हैं. नीतीश की यह सक्रियता बीजेपी के लिए चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि वे राज्य की राजनीति पर अपनी पकड़ ढीली नहीं होने देना चाहते.
कैबिनेट विस्तार में देरी की वजह
वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, कैबिनेट विस्तार में देरी का मुख्य कारण अन्य राज्यों (जैसे बंगाल) में चल रहे चुनाव और उनके परिणाम हैं. कहा जा रहा है कि गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव नतीजों तक रुकने की सलाह दी है. संभावना है कि मई के पहले या दूसरे हफ्ते में मंत्रिमंडल का विस्तार हो जाएगा. इस विस्तार में जेडीयू और बीजेपी दोनों की ओर से कुछ नए और युवा चेहरों को जगह मिल सकती है. नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, हालांकि वे अभी संगठन को समझने पर ध्यान दे रहे हैं.
विभाग बंटवारे का गणित
बिहार में कुल 36 मंत्री बन सकते हैं. जेडीयू के कोटे में लगभग 18 विभाग आने की उम्मीद है. पेच इस बात पर फंसा है कि बाकी बचे विभागों में बीजेपी और अन्य सहयोगी दलों (चिराग पासवान की पार्टी, जीतन राम मांझी की 'हम' और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम) के बीच तालमेल कैसे बैठेगा. यदि जेडीयू अपनी 'ज्यादा मंत्री' वाली मांग पर अड़ी रहती है, तो सम्राट चौधरी के लिए संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होगा.
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