बिहार में नई सरकार का काउंटडाउन शुरू: 10 अप्रैल को शपथ, फिर इस्तीफा; जानें नीतीश कुमार का पूरा प्लान

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा की शपथ लेने के बाद इस्तीफा देंगे, लेकिन उससे पहले वे पूरी सक्रियता के साथ सरकारी कामकाज और राजनीतिक मुलाकातों में व्यस्त हैं. उनके उत्तराधिकारी और नए मंत्रिमंडल को लेकर बिहार में भारी उहापोह की स्थिति बनी हुई है.

नीतीश कुमार ने MLC सदस्य के पद से दिया इस्तीफा
नीतीश कुमार ने MLC सदस्य के पद से दिया इस्तीफा

सुजीत झा

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बिहार की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल मची हुई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे और नई सरकार के गठन को लेकर कयासों का बाजार गर्म है. हालांकि, इन सबके बीच नीतीश कुमार पूरी तरह बेफिक्र नजर आ रहे हैं. उन्होंने विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया है और जल्द ही मुख्यमंत्री पद भी छोड़ने वाले हैं, लेकिन उनके कामकाज की रफ्तार में कोई कमी नहीं आई है.

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इस्तीफे की तारीख तय पर काम जारी

नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे और उसके बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 12 या 13 अप्रैल को एनडीए (NDA) विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नए नेता का चुनाव किया जाएगा. इसके बावजूद, नीतीश कुमार रोजाना सुबह 9 बजे अपने दफ्तर पहुंच रहे हैं, फाइलों का निपटारा कर रहे हैं और विकास योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं. हाल ही में उन्होंने 'समृद्धि यात्रा' भी पूरी की, जो उनके प्रशासनिक अनुशासन को दर्शाता है.

फैजल रहमान की मुलाकात और सियासी मायने

नीतीश कुमार से आरजेडी (RJD) विधायक फैजल रहमान की मुलाकात ने बिहार की सियासत में नया मोड़ ला दिया है. फैजल रहमान वही विधायक हैं जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाला था, जिससे महागठबंधन का उम्मीदवार हार गया था. आज उन्होंने खुद फेसबुक पर मुख्यमंत्री से मुलाकात की जानकारी साझा की. दिलचस्प बात यह है कि तेजस्वी यादव ने अभी तक उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया है, क्योंकि एक भी विधायक कम होने पर तेजस्वी के हाथ से 'नेता प्रतिपक्ष' का पद निकल सकता है.

बीजेपी के 'दबाव' वाली थ्योरी को दिया झटका

नीतीश कुमार ने अभय पटेल से मुलाकात कर सबको चौंका दिया. अभय पटेल वही जेडीयू नेता हैं जिन्होंने नीतीश के राज्यसभा जाने के फैसले के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर पर कालिख पोती थी. इस मुलाकात के जरिए नीतीश ने यह संकेत दिया है कि वे किसी के दबाव में नहीं हैं, चाहे वह गठबंधन सहयोगी बीजेपी ही क्यों न हो.

संगठन को मजबूत करने पर जोर

नीतीश कुमार दिल्ली जाने के बाद भी जेडीयू (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे. वे लगातार पार्टी नेताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं ताकि उनके दिल्ली जाने के बाद भी संगठन एकजुट और मजबूत बना रहे. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नीतीश के बाद बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा और नए मंत्रिमंडल में किन पुराने चेहरों की छुट्टी होगी.

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