बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो रही है. मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के संभावित एग्जिट और राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच उनके बेटे निशांत कुमार की जेडीयू (JDU) में सक्रियता ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. खबर है कि निशांत कुमार न केवल पार्टी के संगठन में बड़ा बदलाव करने वाले हैं, बल्कि नई सरकार के स्वरूप में भी उनका बड़ा दखल होगा.
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'टीम निशांत' का उदय और पुराने चेहरों की विदाई
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जेडीयू में अब 'टीम निशांत' का दौर शुरू होने वाला है. निशांत कुमार पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए बिहार के विभिन्न शहरों का दौरा करेंगे. इस दौरान वह संगठन के ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन कर सकते हैं. माना जा रहा है कि नीतीश कुमार के पुराने और भरोसेमंद साथियों को धीरे-धीरे मार्गदर्शक की भूमिका में भेजा जा सकता है और पार्टी की कमान नई पीढ़ी के हाथों में सौंपी जाएगी.
सरकार में पावर बैलेंस की रणनीति
निशांत कुमार की एंट्री सिर्फ पार्टी तक सीमित नहीं है. चर्चा यह भी है कि वह बिहार की नई सरकार में डिप्टी सीएम (Deputy CM) बन सकते हैं. जेडीयू कार्यकर्ताओं के बीच उन्हें 'सीएम मटेरियल' के तौर पर पेश किया जा रहा है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गृह विभाग (Home Department), जो वर्तमान में बीजेपी के पास है, उसे वापस जेडीयू के कोटे में लाने और निशांत कुमार को सौंपने की रणनीति पर भी काम चल रहा है. इसका मकसद सरकार में पावर बैलेंस को बनाए रखना है ताकि जेडीयू की प्रासंगिकता बनी रहे.
बीजेपी के साथ समीकरण और जेडीयू का वजूद
बिहार में एनडीए की सरकार बहुमत के आंकड़े के करीब है. बीजेपी के पास निर्दलीयों के साथ 117 का आंकड़ा है, जबकि बहुमत के लिए 122 की जरूरत है. ऐसे में निशांत कुमार की रणनीति यह है कि जेडीयू को इतना मजबूत रखा जाए कि बीजेपी के लिए जेडीयू की अहमियत कम न हो. निशांत खुद जेडीयू दफ्तर जाकर वरिष्ठ और युवा नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं और अपने पिता की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहरा रहे हैं.
क्या नीतीश जैसा करिश्मा दिखा पाएंगे निशांत?
निशांत कुमार ने सोशल मीडिया पर गर्व से लिखा है कि वह उस पिता की संतान हैं जिसने बिहार को 'जंगल राज' से मुक्त कराया. वह कार्यकर्ताओं से वही प्यार और समर्थन मांग रहे हैं जो नीतीश कुमार को मिला. हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या निशांत अपने पिता जैसा राजनीतिक कौशल और करिश्मा दिखा पाते हैं या नहीं.
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