पटना IGIMS पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री को मरीजों ने घेरा, इलाज में ढिलाई पर फूटा गुस्सा

इन्द्र मोहन

• 10:37 AM • 07 Aug 2026

IGIMS पटना में नई सुविधाओं के शुभारंभ पर पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री को आक्रोशित मरीजों के परिजनों ने घेरकर अपनी समस्याएं सुनाईं. गार्ड्स ने सुरक्षा घेरे में बाहर निकाला.

Nishant Kumar
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न्यूज़ हाइलाइट्स

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स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का IGIMS दौरा

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अस्पताल की व्यवस्था देख बिफरे निशांत

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अधिकारियों को दिए सख्त दिशा-निर्देश

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मरीजों ने स्वास्थ्य मंत्री के सामने ही सुनाई समस्या

राजधानी पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई, जब नई चिकित्सकीय सुविधाओं का फीता काटने पहुंचे राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को अस्पताल परिसर में ही आक्रोशित लोगों का सामना करना पड़ा. प्रशासनिक लाव-लश्कर के बीच पहुंचे मंत्री के सामने जब एक-एक कर बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं का पुलिंदा खुला, तो वहां मौजूद हर कोई सन्न रह गया.

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आंसू, लाचारी और इलाज में धांधली का दर्द

स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल परिसर में अत्याधुनिक डायलिसिस सेंटर सहित पांच नए विभागों का शुभारंभ करने पहुंचे थे. लेकिन जैसे ही वे निरीक्षण के लिए आगे बढ़े, ओपीडी और वार्डों के बाहर खड़े लाचार मरीजों और उनके परिजनों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया. अस्पताल के भीतर का माहौल उस वक्त पूरी तरह भावुक और गंभीर हो गया, जब एक पीड़ित शख्स ने रोते हुए मंत्री से अपनी आपबीती सुनाई. उसने आरोप लगाया कि बुनियादी निगरानी और लापरवाही के चलते उसकी मां ने इसी अस्पताल के बेड पर तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया. पीड़ित ने हाथ जोड़कर गुहार लगाई कि कागजी दावों से इतर अधिकारी ज़मीनी हकीकत का मुआयना करें. वहीं एक महिला ने अपने बिगड़ते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए गिड़गिड़ाकर गुहार लगाई कि महीनों से ऑपरेशन और जरूरी इलाज के नाम पर सिर्फ तारीखें दी जा रही हैं.

'दवाइयां गायब, आयुष्मान कार्ड पर भी बाहर का रास्ता'

मरीजों ने अस्पताल की अंदरूनी व्यवस्था और कथित बिचौलिया संस्कृति पर सीधे हमला बोला. परिजनों की शिकायत थी कि सरकारी काउंटरों पर पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद डॉक्टरों द्वारा दवाइयां बाहर के प्राइवेट मेडिकल स्टोर से खरीदने का दबाव बनाया जाता है. मुफ्त और कैशलेस इलाज की योजना होने के बावजूद गरीब मरीजों को काउंटर-दर-काउंटर भटकना पड़ रहा है. जांच और पर्चा बनाने की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि मरीज इलाज शुरू होने से पहले ही टूट जाता है.

30 जवानों का सुरक्षा घेरा, कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकले मंत्री

अस्पताल परिसर में अचानक उभरे जनआक्रोश और भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए. मंत्री की सुरक्षा में तैनात पुलिस बल और अस्पताल के निजी गार्ड्स ने तुरंत मुस्तैदी दिखाई. करीब 30 सुरक्षाकर्मियों ने उनके चारों तरफ एक मजबूत मानवीय घेरा बनाया और लोगों को समझा-बुझाकर पीछे हटाते हुए मंत्री को सुरक्षित गाड़ियों के काफिले तक पहुंचाया.

'सुविधाओं में इजाफा, व्यवस्थाओं पर कड़ा रुख'

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने मौके पर मौजूद चिकित्सकों और उच्चाधिकारियों को कड़े निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य तंत्र में किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. गौरतलब है कि इस दौरे के दौरान संस्थान में 20 नई डायलिसिस यूनिट्स, अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर आईसीयू, मॉड्यूलर ओटी और एक एकीकृत ओपीडी कमांड सेंटर की नींव रखी गई, जिससे आने वाले दिनों में गंभीर मरीजों को सहूलियत मिलने का दावा किया गया है.