बिहार MLC चुनाव: बागियों पर एक्शन का दौर जारी, लेकिन अनंत सिंह पर JDU के 'नरम रुख' के पीछे क्या है सियासी खेल?

इन्द्र मोहन

• 04:22 PM • 15 Oct 2026

Bihar MLC Election Anant Singh: बिहार MLC चुनाव में नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर प्रचार कर रहे बाहुबली विधायक अनंत सिंह पर JDU कार्रवाई क्यों नहीं कर रही? जानिए इसके पीछे के बड़े सियासी मायने.

चुनाव प्रचार के दौरान अनंत सिंह
चुनाव प्रचार के दौरान अनंत सिंह
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Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद (MLC) की स्नातक और शिक्षक सीटों पर हो रहे चुनावों के बीच राज्य का राजनीतिक तापमान चरम पर है. एक तरफ जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और सत्ताधारी दल अपने बागी नेताओं पर ताबड़तोड़ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह (छोटे सरकार) के मामले में जनता दल यूनाइटेड (JDU) की खामोशी और नरम रुख ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. गठबंधन धर्म और पार्टी अनुशासन की सख्त हिदायतों के बीच अनंत सिंह को मिली यह ढील बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बनी हुई है.

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पटना स्नातक सीट: JDU प्रत्याशी के खिलाफ ही मोर्चे पर अनंत सिंह

विवाद का मुख्य केंद्र पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र है, जहां से जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार मैदान में हैं. हालांकि, जेडीयू विधायक अनंत सिंह खुलेआम पार्टी लाइन का उल्लंघन करते हुए जन सुराज समर्थित प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह का समर्थन कर रहे हैं. अनंत सिंह जन सुराज प्रत्याशी के नामांकन, जनसंपर्क और चुनावी सभाओं में खुलकर शिरकत कर रहे हैं. अनंत सिंह का आरोप है कि बीते विधानसभा चुनाव में नीरज कुमार ने उनके खिलाफ पर्दे के पीछे से काम किया था, इसलिए वे इस बार किसी भी कीमत पर नीरज कुमार का साथ नहीं देंगे.एनडीए विधानमंडल दल की बैठकों में सख्त कार्रवाई की चेतावनियों के बावजूद अनंत सिंह अपने रुख से एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.

क्यों अनंत सिंह पर कार्रवाई से हिचक रही है JDU?

अन्य नेताओं पर कार्रवाई करने वाली जेडीयू आखिरकार अनंत सिंह के मामले में बैकफुट पर क्यों दिख रही है? इसके पीछे चार प्रमुख रणनीतिक और राजनीतिक कारण माने जा रहे हैं:

मोकामा और मगध क्षेत्र में व्यक्तिगत प्रभाव

अनंत सिंह केवल एक विधायक नहीं हैं, बल्कि मोकामा और आसपास के कई इलाकों में उनका अपना एक मजबूत कैडर और वोट बैंक है. पार्टी चुनाव के ऐन वक्त पर उन पर कार्रवाई करके स्थानीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना चाहती.

भूमिहार वोटरों की नाराजगी का खतरा 

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए जेडीयू अपने पारंपरिक और दबदबे वाले क्षेत्रों में किसी भी तरह की नाराजगी से बचना चाहती है. अनंत सिंह पर कड़ा रुख अपनाने से भूमिहार बहुल इलाकों में पार्टी के समीकरण बिगड़ने का खतरा है.

पार्टी के भीतर अंदरूनी गुटबाजी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीरज कुमार और अनंत सिंह का यह टकराव सिर्फ दो नेताओं का झगड़ा नहीं है. यह जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व के भीतर जारी अंदरूनी खींचतान और शक्ति-संतुलन की बानगी भी पेश करता है.

सुलह की कोशिशें नाकाम, पर कड़ा कदम उठाने से परहेज

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने दोनों पक्षों के बीच मतभेद सुलझाने की कई बार कोशिश की. लेकिन जब बात नहीं बनी, तब भी पार्टी ने कठोर निर्णय लेने के बजाय 'प्रतीक्षा करो और देखो' (Wait and Watch) की नीति अपनाना ज्यादा मुफीद समझा.

विरोधियों के निशाने पर NDA का अनुशासन

जहां एक ओर भाजपा और जेडीयू के बड़े नेता नीरज कुमार की जीत सुनिश्चित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, वहीं अपनी ही पार्टी के विधायक का विपक्षी उम्मीदवार के पक्ष में वोट मांगना एनडीए के सांगठनिक अनुशासन पर सवाल खड़े कर रहा है. विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार और जेडीयू की दोहरी नीति पर लगातार हमलावर हैं.

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