Prashant Kishor Bankipur Seat: चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने आखिरकार खुद चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है. जन सुराज पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से उन्हें पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किया गया. अपने नाम के आधिकारिक ऐलान के तुरंत बाद प्रशांत किशोर पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर पहुंचे. यहां उन्होंने भगवान हनुमान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आगामी चुनावी सफर के लिए आशीर्वाद लिया. जन सुराज पार्टी ने इस धार्मिक यात्रा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि पीके ने भगवान का आशीर्वाद लेकर अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की है.
ADVERTISEMENT
बीजेपी के सबसे मजबूत 'गढ़' में पीके की एंट्री
आपको बांकीपुर विधानसभा सीट को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का सबसे अभेद्य किला माना जाता है. बीजेपी के दिग्गज नेता और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन इस सीट से लगातार चुनाव जीतते आ रहे थे. हालांकि, नितिन नवीन के राज्यसभा जाने और विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद यह सीट खाली हुई है. ऐसे में बीजेपी के इस पारंपरिक और बेहद मजबूत गढ़ में खुद प्रशांत किशोर का उतरना मुकाबले को बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय बनाने जा रहा है.
चुनाव लड़ने पर क्या बोले प्रशांत किशोर?
उम्मीदवारी की घोषणा के बाद प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया से बातचीत में कहा, "यह चुनाव बांकीपुर के किसी आम विधायक का चुनाव नहीं है, न ही यह सरकार बनाने या गिराने का चुनाव है. यह बिहार में एक नई राजनीतिक व्यवस्था की शुरुआत करने का चुनाव है. नवंबर 2025 के विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद हमारे कार्यकर्ताओं और समर्थकों में थोड़ी उदासी थी, लेकिन बांकीपुर की जीत बिहार बदलाव की सोच को फिर से जीवित कर देगी."
पीके ने आगे कहा कि पार्टी ने उन्हें आदेश दिया है, इसलिए वह पूरी ईमानदारी से इस चुनौती को स्वीकार कर रहे हैं. उन्होंने बांकीपुर के प्रबुद्ध मतदाताओं से अपील की कि वे जाति, धर्म और दल से ऊपर उठकर सबसे योग्य उम्मीदवार को वोट दें.
सम्राट चौधरी सरकार पर जनमत संग्रह होगा यह चुनाव- पीके
प्रशांत किशोर ने सूबे की एनडीए सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि बांकीपुर का यह उपचुनाव पिछले 6 महीनों से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में चल रही सरकार के कामकाज, चाल, चरित्र और चेहरे पर जनता का एक जनमत संग्रह होने जा रहा है. अगर यहां बीजेपी हारती है, तो सरकार को समझना होगा कि जनता को उनकी नीतियां स्वीकार्य नहीं हैं. उन्होंने दावा किया कि भले ही वह अकेले चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन अगर जनता ने उन्हें जिताकर विधानसभा भेजा, तो जन सुराज का एक अकेला प्रतिनिधि भी सदन के बाकी 242 विधायकों पर भारी पड़ेगा.
ADVERTISEMENT


