Prashant Kishor on Samrat Choudhary: बिहार की राजनीति में इन दिनों भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर भूचाल आया हुआ है. एक तरफ जहांसरकार इसे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई बता रही है, वहीं जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने इस मामले पर खुलकर अपना पक्ष रखा है. 'बिहार तक' को दिए एक इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने साफ शब्दों में कहा कि भरत तिवारी का कोई एनकाउंटर नहीं हुआ, बल्कि पुलिस ने उनकी हत्या की है.
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"एनकाउंटर का मतलब गोली दोनों तरफ से चले"
प्रशांत किशोर ने पुलिसिंग की पोल खोलते हुए कहा कि "बाय डेफिनेशन एनकाउंटर का मतलब होता है कि गोली दोनों ओर से चले. यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ. बिहार में मौजूदा सरकार बनने के बाद से 20 से ज्यादा सो-कॉल्ड एनकाउंटर और 'हाफ एनकाउंटर' (पैर में गोली मारना) जैसी घटनाएं हुई हैं. सत्ता में बैठे मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को लगता है कि पुलिसिंग का मतलब सिर्फ गोली चलाना और किसी को मार देना है, जो कि बिल्कुल गलत सोच है."
कौन अपराधी है, यह तय करना कोर्ट का काम: पीके
पीके ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों पर कार्रवाई जरूर होनी चाहिए, लेकिन अपराधी कौन है, उसका अपराध क्या है और उसे क्या सजा मिलनी चाहिए, यह तय करना किसी मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, विधायक या थानेदार का काम नहीं है. संविधान के तहत यह पूरी जिम्मेदारी देश की अदालतों (न्यायालय) की है. जब आप व्यवस्था से हटकर मंचों से कहेंगे कि अपराधियों को गोली मार दो तो फिर वो आपे नियंत्रण में नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि ये वही देश है जहां सरेआम गुनाह करने वाले कसाब, इंदिरा गांधी और महात्मा गांधी के हत्यारों तक का बकायदा कोर्ट में ट्रायल चला था.
सम्राट चौधरी पर लगाया बेहद गंभीर आरोप
इंटरव्यू के दौरान प्रशांत किशोर ने बिहार के उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखा हमला बोला. पीके ने कहा कि "सम्राट चौधरी राजनीतिक रूप से अपरिपक्व हैं. वह पुलिस को खुली छूट देने की बात करते हैं. अगर उनके ही नियमों को माना जाए तो सात लोगों की हत्या के मामले में जब वह खुद जेल गए थे तो क्या पुलिस को उन्हें भी गोली मार देनी चाहिए थी?"
पीके ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि सम्राट चौधरी को कोर्ट ने सात लोगों की हत्या के आरोपों से बरी नहीं किया है, बल्कि वह तो फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर खुद को नाबालिग (15 साल का) बताकर जेल से बाहर आए थे. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "यह वो दाग है जो कोई भी सर्फ या एरियल लगाने से नहीं धुलेगा."
गृह मंत्रालय और शीर्ष अधिकारियों की हो जांच
प्रशांत किशोर ने मांग की है कि भरत तिवारी मामले की जो न्यायिक जांच हो रही है, उसकी परिधि में सिर्फ छोटे पुलिसवाले नहीं आने चाहिए. जांच इस बात की होनी चाहिए कि पटना में बैठे पुलिस हेडक्वार्टर के किस अफसर और गृह मंत्रालय के किस नेता के बयानों का असर इस पुलिसिया व्यवहार पर पड़ा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पुलिस को ऐसे ही खुली छूट मिलती रही, तो आने वाले दिनों में बिहार की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाएगी.
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