सड़क किनारे कचरा बीन रहे बच्चे के लिए रुकवाई गाड़ी, पूछा- 'स्कूल नहीं जाते?'; तुरंत कराया एडमिशन

स्मित कुमार

• 03:06 PM • 02 Oct 2026

पूर्णिया डीएम अंशुल कुमार ने निरीक्षण के दौरान सड़क किनारे कचरा बीनते बच्चे मोहम्मद इमरान से बात की और उसका स्कूल में एडमिशन कराया. इस मानवीय पहल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

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प्रशासनिक व्यस्तता और सरकारी दौरों के बीच अक्सर बड़े अधिकारियों की गाड़ियाँ तेजी से गुजर जाती हैं, लेकिन बिहार के पूर्णिया से एक ऐसी संवेदनशील और मानवीय तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया है. दालकोला चेकपोस्ट के निरीक्षण पर निकले पूर्णिया के जिलाधिकारी (DM) अंशुल कुमार ने सड़क किनारे बोरा लेकर कचरा बीनते एक छोटे बच्चे को देखा, तो तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई. इसके बाद जो हुआ, उसने एक गरीब बच्चे की पूरी जिंदगी की दिशा ही बदल दी.

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'बेटा, स्कूल नहीं जाते हो?'

मिली जानकारी के अनुसार, पूर्णिया डीएम अंशुल कुमार अपने तय सरकारी काम से दालकोला चेकपोस्ट की तरफ जा रहे थे. रास्ते में बायसी थाना क्षेत्र के पास उनकी नज़र एक मासूम बच्चे पर पड़ी, जो हाथ में बड़ा सा बोरा लिए कचरे में कुछ सामान तलाश रहा था. डीएम ने गाड़ी रुकवाकर बच्चे को अपने पास बुलाया और स्नेह से पूछा— 'बेटा, स्कूल नहीं जाते हो?' बच्चे ने मासूमियत से जवाब दिया— 'नहीं.'

बस इसी एक शब्द ने जिला प्रमुख को झकझोर कर रख दिया. डीएम ने तुरंत अपने साथ मौजूद अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस बच्चे का पास के ही स्कूल में एडमिशन कराया जाए, ताकि इसके हाथों में बोरे की जगह किताबें आ सकें.

कौन है मोहम्मद इमरान?

सड़क किनारे कचरा बीन रहे इस मासूम बच्चे का नाम मोहम्मद इमरान है, जो बायसी थाना क्षेत्र का रहने वाला है. जिस उम्र में बच्चों के हाथों में कॉपियां और पेंसिल होनी चाहिए, उस उम्र में इमरान घर की मजबूरियों और गरीबी के कारण सड़क से ऐसी चीजें चुन रहा था, जिन्हें बेचकर कुछ पैसे कमाए जा सकें. उसके लिए सड़क, कचरा और बोरा ही रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके थे.

बच्चे को दिए बिस्किट, पढ़ाई के लिए किया प्रेरित

डीएम अंशुल कुमार अक्सर अपने दौरों के दौरान गाड़ियों में बिस्किट के पैकेट रखते हैं. जब भी रास्ते में उन्हें ज़रूरतमंद या छोटे बच्चे दिखते हैं, तो वे उनसे संवाद करते हैं और बिस्किट देकर पढ़ाई के लिए प्रेरित करते हैं. बातचीत के बाद उन्होंने मोहम्मद इमरान को भी बिस्किट का पैकेट थमाया और उसे मन लगाकर पढ़ने की सलाह दी.

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

डीएम और बच्चे की इस आत्मीय बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. लोग अधिकारी के इस व्यवहार और त्वरित संज्ञान की खुलकर तारीफ कर रहे हैं. हालांकि यह कहानी एक बड़े सवाल को भी जन्म देती है— आज भी कितने ही ऐसे मासूम बच्चे हैं जो गरीबी के कारण स्कूल से दूर सड़कों पर कचरा बीनने को मजबूर हैं? मोहम्मद इमरान के मामले में डीएम की एक नजर और एक निर्देश ने उसकी जिंदगी में उम्मीद की नई किरण जरूर जला दी है. प्रशासन अब इमरान के नियमित स्कूल जाने और उसकी पढ़ाई जारी रखने की व्यवस्था में जुट गया है.

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