IPS Shobha Ohatkar: बिहार पुलिस के इतिहास में कुछ ऐसे नाम दर्ज हैं जिनका जिक्र आज भी लोगों की जुबान पर आते ही अपराधियों में खौफ और आम जनता में सुरक्षा का अहसास करा देता है. एक ऐसा ही नाम रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी शोभा ओहतकर का है, जिनसे न केवल अपराधी बल्कि मातहत अफसर भी कांपते थे. अपनी बेहद सख्त कार्यशैली के कारण उन्हें 'हंटर वाली मैडम' के नाम से जाना जाने लगा. डीजी के पद से रिटायर होने वाली शोभा ओहतकर का करीब तीन दशकों का प्रशासनिक सफर उपलब्धियों और विवादों दोनों से भरा रहा है.
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महज 22 साल की उम्र में बनी थीं आईपीएस अधिकारी
शोभा ओहतकर का जन्म महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था. उन्होंने हैदराबाद से पॉलिटिकल साइंस (राजनीति विज्ञान) में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. उनके पिता बलराम ओहतकर आबकारी आयुक्त के पद पर कार्यरत थे. शोभा ओहतकर ने कई मौकों पर यह खुलकर स्वीकार किया है कि उन्हें वर्दी पहनने और पुलिस अधिकारी बनने की प्रेरणा अपने पिता से ही मिली थी. पिता के सपने को पूरा करते हुए उन्होंने महज 22 साल की उम्र में देश की सबसे कठिन यूपीएससी परीक्षा पास की और 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी बनकर सेवा में आईं.
बुलेट मोटरसाइकिल पर गश्त और अपराधियों में डर का माहौल
साल 1992 में शोभा ओहतकर को उनकी पहली पोस्टिंग में सिटी एसपी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. यह वह दौर था जब बिहार राज्य अपहरण, रंगदारी, लूट, हत्या और संगठित अपराध जैसी गंभीर घटनाओं से बुरी तरह जूझ रहा था. उस कठिन समय में इस युवा महिला आईपीएस अधिकारी ने कानून व्यवस्था को मजबूत करने का बीड़ा उठाया. जब वह खुद बुलेट मोटरसाइकिल पर सवार होकर सड़कों पर गश्त करने के लिए निकलती थीं, तो अपराधियों के बीच खौफ छा जाता था. इसके बाद उन्होंने कई जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में बेहद कड़क प्रशासनिक फैसले लिए.
देवघर पोस्टिंग से कैसे मिला 'हंटर वाली मैडम' का नाम
शोभा ओहतकर के करियर का सबसे चर्चित और अहम मोड़ उनके देवघर जिले में पोस्टिंग के दौरान आया. उस समय देवघर में बाबा वैद्यनाथ धाम मंदिर के आसपास पूजा-पाठ के लिए आने वाली महिलाओं के साथ छेड़छाड़, दुर्व्यवहार और मनचलों की बदतमीजी की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं. पदभार संभालते ही शोभा ओहतकर ने इन मनचलों और अपराधियों के खिलाफ बेहद आक्रामक और सख्त रवैया अपनाया. इस बड़ी कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर लोग उन्हें 'हंटर वाली मैडम' कहकर पुकारने लगे. यह नाम उनकी ऐसी पहचान बन गया जो उनके रिटायरमेंट के बाद भी आज तक कायम है.
इन जिलों में निभाई जिम्मेदारी और की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति
अपने लंबे पुलिसिंग करियर में उन्होंने बिहार और तत्कालीन संयुक्त बिहार के पटना, दरभंगा, हजारीबाग, सारण, वैशाली और देवघर जैसे चुनौतीपूर्ण जिलों में एसपी के रूप में अपनी सेवाएं दीं. हजारीबाग में भी उनका कार्यकाल काफी चर्चा में रहा क्योंकि उन्होंने वहां की चरमराती कानून व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त कर दिया था. साल 2000 में वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर महाराष्ट्र चली गईं. इसके बाद करीब दो दशक यानी 20 साल तक केंद्रीय सेवाओं में रहने के बाद साल 2020 में वह वापस बिहार कैडर में लौटीं, जहां उन्हें पुलिस महानिदेशक (डीजी) स्तर की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई. उन्होंने बिहार होमगार्ड्स और फायर सर्विसेज के महानिदेशक सह कमांडेंट जनरल के रूप में काम करते हुए इन विभागों के आधुनिकीकरण और संस्थागत सुधारों में अहम भूमिका निभाई.
साल 2023 में सीनियर अफसर विकास वैभव के साथ हुआ बड़ा विवाद
तेजतर्रार छवि के बावजूद साल 2023 में शोभा ओहतकर का नाम एक बड़े प्रशासनिक विवाद के कारण राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया. तत्कालीन आईजी विकास वैभव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर उन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए थे. विकास वैभव ने दावा किया था कि शोभा ओहतकर द्वारा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है. हालांकि, शोभा ओहतकर ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था. उन्होंने स्पष्ट किया था कि यह पूरा मामला केवल अनुशासन और विभागीय कार्यप्रणाली से जुड़ा हुआ है. दो बड़े आईपीएस अफसरों का यह टकराव उस वक्त सरकार के संज्ञान में भी पहुंचा था और इसने खूब सुर्खियां बटोरी थीं.
तीन दशकों की लंबी सेवा के बाद हुईं सेवानिवृत्त
लगभग तीन दशकों से अधिक समय तक बिहार पुलिस और केंद्रीय सेवाओं में अपनी धाक जमाने के बाद शोभा ओहतकर बीते दिनों डीजी पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं. प्रशासनिक हलकों में उनकी गिनती बिहार की सबसे सख्त, असरदार और प्रभावशाली महिला आईपीएस अधिकारियों में की जाती है. उनके करियर में जितनी उपलब्धियां रहीं, उतने ही विवादों ने भी उनका पीछा किया, लेकिन इसमें कोई दोराय नहीं है कि 'हंटर वाली मैडम' के रूप में उन्होंने अपराधियों के मन में जो डर पैदा किया, उसकी चर्चा आज भी बिहार पुलिस के इतिहास में बड़े सम्मान के साथ की जाती है.
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