करोड़ों के टेंडर और भ्रष्टाचार का 'मास्टरमाइंड' रिशु श्री! ED और SVU की जांच में खुली इन 5 कंपनियों की पोल

Rishu Shri Case: करोड़ों रुपये के सरकारी टेंडरों और कथित भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार रिशु श्री की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. ED और स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की पड़ताल में पांच ऐसी कंपनियां सामने आई हैं, जिनके जरिए सरकारी ठेकों, सब-कॉन्ट्रैक्ट और कमीशन के नेटवर्क को संचालित करने का आरोप है. जानिए रिशु श्री के कथित साम्राज्य, कंपनियों के नेटवर्क और जांच एजेंसियों के बड़े खुलासों की पूरी कहानी.

Rishu Shri
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ऋचा शर्मा

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बिहार में करोड़ों रुपए के सरकारी टेंडरों और कथित भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार रिशु श्री की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है. यह असल में कंपनियों के एक ऐसे बड़े और सुनियोजित नेटवर्क की कहानी है, जिसके जरिए उसने सरकारी विभागों में अपनी पकड़ को बेहद मजबूत किया हुआ था. ED और स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की जांच में अब यह साफ तौर पर सामने आया है कि रिशु श्री ने अलग-अलग नामों से कई मुखौटा और सहयोगी कंपनियां खड़ी कर रखी थीं. इन्हीं कंपनियों के सहारे उसने सरकारी परियोजनाओं में आसानी से एंट्री ली और देखते ही देखते अपना एक बहुत बड़ा आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर लिया.

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रिशु श्री के साम्राज्य की ये हैं वो 5 मुख्य कंपनियां

जांच एजेंसियों की पड़ताल के मुताबिक, रिशु श्री से सीधे तौर पर जुड़ी पांच प्रमुख कंपनियां अब रडार पर हैं. इनमें सबसे पहली कंपनी मेसर्स रिलायबल एंटरप्राइजेज है, जिसकी प्रोपराइटर खुद रिशु श्री है. इसके अलावा रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और नेस्ट बिल्ड इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड नाम की दो कंपनियां हैं, जिनमें रिशु श्री और उसकी पत्नी रितंबरा श्री दोनों डायरेक्टर के तौर पर शामिल हैं.

चौथी कंपनी अर्बन एनवायरमेंट सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड है, जिसमें उसकी पत्नी रितंबरा डायरेक्टर है. वहीं पांचवीं कंपनी मातृत्व कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड है, जिसे रिशु ने अपने एक बेहद करीबी कर्मचारी संतोष कुमार के नाम पर रजिस्टर करवा रखा था. जांच एजेंसियों का साफ मानना है कि इन सभी कंपनियों का इस्तेमाल अलग-अलग स्तर पर सरकारी ठेकों और बड़े प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी हासिल करने के लिए किया जाता था.

तीन स्तरों पर काम करता था रिशु श्री का कथित खेल

ED और SVU की गहन जांच में रिशु श्री के काम करने का एक खास और शातिर मॉडल सामने आया है, जो मुख्य रूप से तीन स्तरों पर संचालित होता था. इसका पहला तरीका अपनी खुद की कंपनियों के नाम पर सीधे सरकारी टेंडर हासिल करना था. रिशु इन कंपनियों के जरिए सीधे सरकारी विभागों में पैठ बनाकर टेंडर लेता था. जांच में नगर विकास विभाग, बुडको (BUIDCO) और जल संसाधन विभाग की कई बड़ी परियोजनाओं में उसकी इन कंपनियों की सीधी मौजूदगी और दखलअंदाजी सामने आई है.

दूसरों को टेंडर दिलाना और कमीशन का नेटवर्क

रिशु श्री के खेल का दूसरा तरीका सिर्फ अपनी कंपनियों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वह एक बड़े सिंडिकेट की तरह काम करता था. वह दूसरे ठेकेदारों और बाहरी कंपनियों को भी अपनी सेटिंग के दम पर सरकारी टेंडर दिलाने का काम धड़ल्ले से करता था. इस काम के बदले में वह उन कंपनियों और ठेकेदारों से कथित तौर पर भारी-भरकम कमीशन वसूलता था.ED के आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान रिशु श्री ने खुद यह बात स्वीकार की है कि कुछ मामलों में सेटिंग बैठाने के लिए संबंधित विभागीय इंजीनियरों को भी बकायदा प्रतिशत (कमीशन) के हिसाब से भुगतान किया जाता था.

सब-कॉन्ट्रैक्ट का खेल और असली कमाई का मॉडल

इस पूरे भ्रष्टाचार के खेल में तीसरा और सबसे अहम तरीका सब-कॉन्ट्रैक्ट का मॉडल माना जा रहा है. रिशु श्री पर आरोप है कि वह पहले अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर किसी दूसरी बड़ी कंपनी को सरकारी टेंडर दिलवा देता था. इसके बाद पर्दे के पीछे से खेल शुरू होता था और उसी स्वीकृत प्रोजेक्ट का काम रिशु की अपनी नेटवर्क वाली कंपनियों को 'सब-कॉन्ट्रैक्ट' के रूप में ट्रांसफर कर दिया जाता था. इसका मतलब यह हुआ कि कागजों पर टेंडर किसी और दूसरी कंपनी के नाम पर होता था, लेकिन जमीन पर असली काम और पूरा मुनाफा रिशु के नेटवर्क की कंपनियों के जरिए ही समेटा जाता था.

जांच एजेंसियों की रडार पर सरकारी अफसर और अधिकारी

इस बड़े खुलासे के बाद अब स्पेशल विजिलेंस यूनिट और ED इस बात का पता लगाने में पूरी मुस्तैदी से जुटी हैं कि रिशु श्री की इन पांच कंपनियों को अब तक कुल कितने सरकारी प्रोजेक्ट मिले हैं. इसके साथ ही इस पूरे सिंडिकेट में किन-किन सरकारी अधिकारियों और बड़े अफसरों की मिलीभगत रही है, इसकी भी कड़ियां जोड़ी जा रही हैं. एजेंसियां उन कंपनियों की सूची भी तैयार कर रही हैं जिन्हें टेंडर दिलाकर बाद में सब-कॉन्ट्रैक्ट का यह खेल खेला गया था.

जांच एजेंसियों का स्पष्ट मानना है कि रिशु श्री की असली ताकत सिर्फ उसकी अवैध संपत्ति नहीं, बल्कि इन पांच कंपनियों का वह मजबूत नेटवर्क था जिसके दम पर उसने पूरे सरकारी सिस्टम को अपने शिकंजे में ले रखा था. अब यही नेटवर्क जांच का मुख्य केंद्र बन चुका है और आने वाले दिनों में इस भ्रष्टाचार से जुड़े कई और रसूखदार नाम सामने आ सकते हैं.

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