सारण MLC चुनाव से पहले RLM का बड़ा एक्शन, राम पुकार सिन्हा 6 साल के लिए सस्पेंड... अब तीन विधायकों पर क्या होगा?

RAM Pukar Sinha Suspended : बिहार में सारण शिक्षक निर्वाचन सीट के चुनाव को लेकर राष्ट्रीय लोक मोर्चा में विवाद गहरा गया है. पार्टी ने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे राम पुकार सिन्हा को छह साल के लिए निलंबित कर दिया है, जिससे अब पार्टी के तीन बागी विधायकों पर भी तलवार लटक गई है.

RAM Pukar Sinha Suspended
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RLM Suspended RAM Pukar Sinha: बिहार में सारण शिक्षक निर्वाचन सीट के चुनाव को लेकर राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के भीतर घमासान मचा हुआ है. इस बीच अब पार्टी ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपने प्रदेश महासचिव सह प्रवक्ता राम पुकार सिन्हा को छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया है. बताया जा रहा है कि उन्होंने पार्टी के फैसले के खिलाफ जाकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल कर दिया था. इसके बाद उनहे खिलाफ यह कार्रवाई की गई. एनडीए ने इस सीट से जनता दल यूनाइटेड (JDU) के आनंद पुष्कर को अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया है, लेकिन पार्टी के ही भीतर उठे विरोध के सुरों ने नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

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राम पुकार सिन्हा पर छह साल का निलंबन

राष्ट्रीय लोक मोर्चा की ओर से 12 अक्टूबर को यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई. पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष सह मुख्यालय प्रभारी प्रशांत पंकज द्वारा जारी पत्र में बताया कि राम पुकार सिन्हा ने एनडीए के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़कर पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन किया है. पार्टी का मानना है कि इस कदम से संगठन की छवि को ठेस पहुंची है, जिसके चलते उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है. हालांकि, सिन्हा पहले ही साफ कर चुके थे कि वह हर हाल में चुनाव मैदान में डटे रहेंगे.

तीन विधायकों की मौजूदगी से बढ़ा सियासी पारा

इस पूरे विवाद का सबसे दिलचस्प और पेचीदा पहलू पार्टी के तीन विधायकों का रुख है. जब राम पुकार सिन्हा अपना नामांकन दाखिल करने पहुंचे, तो उनके साथ दिनारा के विधायक व पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार सिंह, मधुबनी के विधायक माधव आनंद और बाजपट्टी के विधायक रामेश्वर महतो मौजूद थे. इन तीनों की मौजूदगी को सीधे तौर पर सिन्हा के समर्थन के रूप में देखा गया. हालांकि, आलोक कुमार सिंह ने इसके पीछे पुराने कार्यकर्ताओं के सम्मान और उनके मनोबल की बात उठाई थी, जबकि पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा का रुख एनडीए गठबंधन के साथ पूरी तरह से जुड़े रहने का है.

एनडीए की बैठक से दूरी और उपेंद्र कुशवाहा के सामने चुनौती

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 9 अक्टूबर को मुख्यमंत्री आवास पर हुई एनडीए की महत्वपूर्ण बैठक में ये तीनों विधायक शामिल नहीं हुए. इस बैठक में विधान परिषद चुनाव की रणनीति और गठबंधन के प्रत्याशियों को समर्थन देने पर चर्चा होनी थी. विधायकों की इस गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह को जगजाहिर कर दिया. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उपेंद्र कुशवाहा उन तीनों विधायकों के खिलाफ भी कोई सख्त कदम उठाएंगे जो खुलेआम बागी तेवर दिखा रहे हैं, या फिर इस मामले को बातचीत के जरिए शांत करने की कोशिश की जाएगी.

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