समस्तीपुर के कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र में लड़की के साथ कथित छेड़छाड़ और अभद्र व्यवहार का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की. पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वीडियो की जानकारी मिलने के बाद तकनीकी जांच के जरिए घटनास्थल और आरोपियों की पहचान की गई और करीब छह घंटे के भीतर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. इसी कार्रवाई से जुड़े एक वीडियो में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से कुछ की चाल अलग नजर आ रही है. वीडियो में वे लंगड़ाते हुए आगे बढ़ते दिखाई देते हैं. इसके बाद सामने आए दूसरे वीडियो में, जब आरोपियों को कोर्ट में पेशी के लिए ले जाया गया, उनकी चाल पहले वीडियो की तुलना में सामान्य दिखाई दे रही है. यही अंतर अब इस मामले में एक नया सवाल खड़ा कर रहा है.
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एक दिन बाद पेशी का वीडियो क्यों चर्चा में?
गिरफ्तारी के वीडियो और कोर्ट परिसर के वीडियो को साथ देखने पर दोनों मौकों पर आरोपियों की शारीरिक गतिविधि में फर्क नजर आता है. हालांकि, केवल वीडियो देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि ऐसा क्यों हुआ. इस बदलाव की वजह चोट में सुधार, चलने का तरीका, वीडियो का एंगल या कोई दूसरी परिस्थिति हो सकती है. इस संबंध में पुलिस की ओर से ऐसी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है कि गिरफ्तारी के समय आरोपी के पैर में क्या समस्या थी या अगले दिन उसकी स्थिति में क्या बदलाव आया. इसलिए दोनों वीडियो को लेकर उठ रहे सवालों को फिलहाल सवाल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.
चार आरोपी गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा न्यायिक हिरासत में
पुलिस ने मामले में विकास कुमार, राहुल कुमार, रामबाबू सहनी और अवधेश पासवान को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार, घटना का वीडियो सामने आने के बाद आरोपियों की पहचान की गई और उन्हें गिरफ्तार किया गया. बाद में सभी को कोर्ट में पेश किया गया. रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने चारों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. पुलिस ने यह भी बताया है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक के मोबाइल फोन में घटना से जुड़ा वीडियो मिला था. पुलिस के अनुसार, इसी मोबाइल से वीडियो किसी अन्य व्यक्ति को भेजा गया और इसके बाद वह सोशल मीडिया पर फैल गया. मोबाइल को जब्त कर जांच में शामिल किया गया है.
वीडियो की जांच भी कर रही पुलिस
इस पूरे मामले में पुलिस सिर्फ आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है. वीडियो कैसे बनाया गया, किसने बनाया, किसके मोबाइल से आगे भेजा गया और घटना में कितने लोग शामिल थे, इन बिंदुओं पर भी जांच की जा रही है. पुलिस ने लोगों से वायरल वीडियो को आगे शेयर नहीं करने की अपील की है, क्योंकि इससे पीड़िता की पहचान उजागर होने का खतरा है. खास बात यह है कि पुलिस के मुताबिक वीडियो में दिखाई दे रही लड़की प्रथमदृष्ट्या नाबालिग प्रतीत होती है. इसलिए उसकी पहचान बताने वाली तस्वीर, वीडियो या कोई अन्य जानकारी प्रसारित नहीं की जानी चाहिए.
पूरी घटना क्या है?
पुलिस के मुताबिक, मामला समस्तीपुर के कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के जगतसिंहपुर गांव के पास का है. शुरुआती जांच में घटना करीब 15 सितंबर के आसपास की बताई गई है, जबकि वीडियो 23 सितंबर की रात सोशल मीडिया पर पुलिस की नजर में आया. वीडियो में कुछ युवक एक लड़की के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार करते दिखाई दे रहे हैं. पुलिस के अनुसार, लड़की प्रथमदृष्ट्या नाबालिग प्रतीत होती है. वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और घटनास्थल की पहचान जगतसिंहपुर बांध के पास की सड़क के रूप में की. पुलिस ने करीब छह घंटे के भीतर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया. मामले में भारतीय न्याय संहिता, पॉक्सो एक्ट और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है.
घटना के वीडियो को किसने रिकॉर्ड किया?
अब जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि घटना के वीडियो को किसने रिकॉर्ड किया, उसे आगे किसने भेजा और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका क्या थी. साथ ही गिरफ्तारी के समय और अगले दिन पेशी के दौरान आरोपियों की चाल में दिख रहे अंतर को लेकर उठ रहे सवालों पर भी स्पष्टता का इंतजार है.
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