बिहार में प्रशासनिक मशीनरी को रफ्तार देने और शासन व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बड़ी समीक्षा बैठक की. इस अहम बैठक में राज्य के सभी आईएएस, आईपीएस और तमाम वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि अब फाइलों में नहीं, बल्कि जमीन पर काम दिखना चाहिए. उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि विकास, कानून व्यवस्था और जनसेवा के मुद्दों पर अब किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
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डीएम और एसपी के लिए नया फरमान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जनता की शिकायतों के निवारण के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है. उन्होंने सभी जिलों के जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को कड़ा निर्देश दिया है कि उन्हें रोजाना सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक अनिवार्य रूप से अपने कार्यालय में बैठना होगा. इस दौरान उन्हें आम लोगों की समस्याएं सुननी होंगी और मौके पर ही उनका समाधान सुनिश्चित करना होगा. मुख्यमंत्री का मानना है कि लोगों को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें यह भरोसा हो कि सरकार उनकी बात सुन रही है.
निवेशकों के लिए 'नोडल अधिकारी' और इंडस्ट्रियल हब पर जोर
राज्य में निवेश और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हर जिले में इंडस्ट्री हब विकसित करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि अगर स्थानीय स्तर पर उद्योग लगेंगे, तो युवाओं को अपने ही इलाके में रोजगार मिलेगा और पलायन पर लगाम लगेगी. निवेशकों की सुविधा के लिए सीएम ने एक नया सिस्टम लागू करने को कहा है, जिसके तहत हर निवेशक के साथ एक नोडल अधिकारी जोड़ा जाएगा. यह अधिकारी निवेशक की हर समस्या को तुरंत सुलझाने के लिए जिम्मेदार होगा, ताकि राज्य में बेहतर निवेश का माहौल बन सके.
अपराधियों पर नकेल और महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि
कानून व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री का रुख बेहद सख्त नजर आया. उन्होंने स्पष्ट किया कि जघन्य अपराधों, खासकर महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ होने वाले अपराधों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए. उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज हो, आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाए और समय पर चार्जशीट दाखिल कर कोर्ट में मजबूत पैरवी के जरिए सख्त सजा दिलवाई जाए. इसके साथ ही डायल 112 सेवा को और अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया ताकि आपात स्थिति में त्वरित मदद मिल सके.
अधिकारियों को 2 महीने की डेडलाइन और सीधी चेतावनी
अपने 27 सालों के राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को सीधे तौर पर कहा कि अगर जिले के डीएम और एसपी की सोच और नियत सही हो, तो 75% समस्याएं बिना किसी बड़े प्रयास के खत्म हो सकती हैं. उन्होंने अधिकारियों को दो महीने की स्पष्ट डेडलाइन देते हुए कहा कि इस अवधि के भीतर किए गए कार्यों का असर जमीन पर दिखना चाहिए. बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यामृत ने अधिकारियों को पूरी क्षमता से काम करने को कहा, वहीं डीजीपी विनय कुमार ने आदतन अपराधियों की जमानत रुकवाने के लिए रणनीति बनाने के निर्देश दिए.
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