बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI बोले- "छह महीने से ज्यादा मंत्री कैसे रह सकते हैं ?"

संजय शर्मा

30 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 30 2026 1:46 PM)

बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. CJI की अध्यक्षता वाली बेंच ने सवाल उठाया कि बिना विधायक या विधान परिषद सदस्य बने कोई 6 महीने से अधिक मंत्री कैसे रह सकता है.

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दीपक प्रकश के मंत्री बने रहने पर उठे सवाल. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.
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बिहार में NDA की जीत के बाद एक मंत्री का शपथ चर्चा में रहा. जहां सभी लोग कुर्ता पायजामा में शपथ ग्रहण करने आए वहीं एक नौजवान ने जिंस टी-शर्ट में मंत्री पद की शपथ ली. ये कोई नहीं बल्कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं. अब इनके मंत्री के तौर पर नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. इस याचिका की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट भी इनकी नियुक्ति को लेकर सख्त नजर आया. अब इस याचिका पर चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच मंगलवार को सुनवाई करेगी. 

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याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि दीपक प्रकाश विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं. गैर-विधायक को मंत्री पद पर बने रहने के लिए मिली छह महीने की छूट केवल एक बार के लिए होती है. वो इस समयसीमा को पार कर चुके है. राज्य सरकार  की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह मामला पहले से  कोर्ट में 27 अगस्त को सुनवाई के लिए लगा है. सुप्रीम कोर्ट को जो मंजूर होगा, हम वो करेगे. 

चीफ जस्टिस ने किया सवाल 

इधर मामले CJI ने कहा कि यह पूरी तरह कानून का सवाल है. राज्य सरकार को बताना होगा कि कोई व्यक्ति बिना विधायक या विधान परिषद का सदस्य बने छह महीने से अधिक समय तक मंत्री कैसे बना रह सकता है. हम उनसे जवाब मांगेंगे.

कौन हैं दीपक प्रकाश? 

दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं. उन्हें सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में RLM कोटे से मंत्री बनाया गया है. वर्तमान में वे बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) के सदस्य नहीं हैं. 

व्यक्तिगत और शैक्षणिक पृष्ठभूमि

  • जन्म: 22 अक्टूबर 1989
  • स्कूली शिक्षा: ICSE बोर्ड से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की.
  • उच्च शिक्षा: साल 2011 में MIT मणिपाल से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की.
  • करियर: इंजीनियरिंग के बाद 2011 से 2013 तक एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्य किया. इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया.
  • राजनीति में प्रवेश: साल 2019-20 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा.

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