बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम का ऐलान हो गया है. इस टीम में कई बड़े और दिग्गज चेहरे जैसे स्मृति ईरानी, वसुंधरा राजे, राम माधव शामिल है. इसी कड़ी में बिहार के भी तीन नेताओं को नितिन नबीन की टीम में बड़ी जिम्मेदारी मिली है, जिनमें सिद्धार्थ शंभू को राष्ट्रीय सचिव, ऋतुराज सिन्हा को प्रकोष्ठ सह-संयोजक और शिवेश कुमार राम को अनुसूचित जाति (SC) मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है. इसी बीच शिवेश कुमार राम को लेकर चर्चाएं काफी तेज हो गई है. आइए विस्तार से जानते हैं कौन है शिवेश कुमार राम और उनकी पूरी कहानी.
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पार्टी ने हाल ही में भेजा था राज्यसभा
शिवेश कुमार राम बिहार में बीजेपी के बड़े दलित चेहरों में से एक माने जाते हैं. शिवेश कुमार पहले पार्टी के विधायक भी रह चुके हैं और शुरुआती दौर से बीजेपी के संगठन से जुड़े रहे हैं. साल 2024 में पार्टी ने उन्हें सासाराम लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार भी बनाया था, लेकिन वो चुनाव हार गए थे. हालांकि पार्टी ने उनके कामकाज और मेहनत को देखते हुए इसी बिहार से राज्यसभा भेजा और उन्हें राज्यसभा सांसद बनाया था. अब पार्टी ने उन्हें बीजेपी एससी मोर्चे की कमान दी गई है.
कौन हैं शिवेश कुमार राम?
शिवेश राम बिहार बीजेपी के प्रमुख और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं. उन्हें राजनीति का अनुभव विरासत में मिला है. उनके पिता स्वर्गीय मुनि लाल बीजेपी के कद्दावर नेता रहे और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली. मुनि लाल सासाराम से तीन बार सांसद रहे थे. राजनीति में आने से पहले वे आईएएस अधिकारी भी रह चुके थे. शिवेश राम की शुरुआती पढ़ाई रांची में हुई, जहां उन्होंने विज्ञान की पढ़ाई की. सौम्य स्वभाव और विवादों से दूरी के लिए पहचाने जाने वाले शिवेश राम फिलहाल बीजेपी के प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
अगीआंव से विधानसभा तक पहुंचा राजनीतिक सफर
शिवेश राम ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत जमीनी स्तर से की. साल 2010 में उन्होंने भोजपुर जिले की सुरक्षित अगीआंव विधानसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर पहली बार विधानसभा पहुंचे. 2010 से 2015 तक विधायक रहते हुए उन्होंने क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की. इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें सासाराम (SC) सीट से मैदान में उतारा. पार्टी ने इस चुनाव में मौजूदा सांसद छेदी पासवान का टिकट काटकर शिवेश राम पर भरोसा जताया था, हालांकि उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद पार्टी ने उनके संगठनात्मक अनुभव और लंबे राजनीतिक सफर को देखते हुए भरोसा कायम रखा.
सामाजिक और राजनीतिक समीकरण
बीजेपी का शिवेश राम को राज्यसभा भेजने का फैसला बिहार की राजनीति में सामाजिक और संगठनात्मक दोनों लिहाज से अहम माना जा रहा है. शिवेश राम अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से आते हैं. कहा जा रहा है ऐसे में उन्हें SC मोर्चा का अध्यक्ष बनाकर बीजेपी दलित वोटरों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है.
वहीं, संगठन के स्तर पर भी यह फैसला महत्वपूर्ण है. नितिन नबीन और शिवेश राम दोनों ही बीजेपी संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं. पार्टी ने ऐसे पुराने और भरोसेमंद नेताओं को आगे बढ़ाकर संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं को भी संदेश देने की कोशिश की है.
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