Bihar Politics: बिहार में 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं, उससे पहले राजनीति में चल क्या रहा है ये किसी को समझ नहीं आ रहा. हां इतना जरुर है कि कुछ तो खिचड़ी पक रह रही है. ये बात यूं ही नहीं कही जा रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्री प्लान था. दिल्ली में एनडीए नेताओं से मिलने का, लेकिन ये इस्तीफा कहिए या कुछ और...
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इस बीच देश के पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का निधन हो गया. नीतीश कुमार दिल्ली तो आए लेकिन ये कहकर कि श्रद्धांजलि देने जा रहे हैं. अब दिल्ली आएं और बिहार में खेल की चर्चा के बीच अगर एनडीए नेताओं से मुलाकात न हो तो और भी अंदेशा बढ़ जाता है.
दरअसल, दिल्ली में नीतीश कुमार की ना तो जेपी नड्डा से मुलाकात हुई ना ही पीएम मोदी से और बिना मुकालात खामोशी से नीतीश कुमार बिहार लौट गए. इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली से बिहार लौटते ही राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मिलने राजभवन पहुंचे. सीएम नीतीश कुमार ने शॉल भेंट किया.
वहीं राज्यपाल ने भी उनका स्वागत किया और शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट की. इस दौरान पूर्व राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर भी मौजूद रहे. सीएम और नये राज्यपाल की यह मुलाकात औपचारिक थी.
क्या कोई खिचड़ी पक रही है?
राजनीति की अपनी एक ‘खामोश भाषा’ भी होती है और वर्तमान राजनीति में इस ‘फन’ के सबसे अधिक माहिर नीतीश कुमार कहे जाते हैं. हाल के दिनों में नीतीश कुमार की खामोशी ने बिहार की राजनीति में जो हलचल मचा दी, इसे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की इस बेबाकी (नीतीश कुमार के साथ नहीं जाने की बात कहकर) ने जरूर कुछ ठंडा कर दिया, लेकिन सियासत को समझने वाले अभी भी नीतीश कुमार की खामोशी का सबब तलाश रहे हैं. उनकी राजनीति के स्टाइल को देखें तो यह भी कुछ संकेत करता है.
BJP सांसद ने दी सफाई
सियासत की बात पर चर्चा तेज हुई तो बीजेपी के तरफ से बयान भी जारी कर दिया गया. बीजेपी नेता निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सफाई दी. साथ में X पर लिखा- 'नीतीश कुमार जी बीजेपी के साथ मिलकर ही बिहार का अगला विधानसभा चुनाव लड़ेंगे और बिहार में सबसे लम्बे समय तक मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाएंगे. वे जब चाहेंगे माननीय प्रधानमंत्री जी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाक़ात होती रहेगी. मेरी सूचना के अनुसार उनका केवल पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी के परिजनों से ही मिलने का कार्यक्रम था.'
निशिकांत दुबे ने दी तो सफाई ही लेकिन इसके बीच चर्चा औऱ तेज हो गई कि आखिर बीजेपी को नीतीश कुमार पर सफाई क्यों देनी पड़ रही है. बिहार की राजनीति में जो कुछ आजकल हो रहा है वह देश की पॉलिटिक्स पर असर कर सकता है. बिहार पॉलिटिक्स के अंदरखाने काफी कुछ हो रहा है, लेकिन अभी साफ-साफ पढ़ा नहीं जा रहा है.
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रूटीन चेकअप कराया और पटना लौट गए नीतीश
नीतीश कुमार दिवंगत पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के परिवार वालों से मिले. इसके बाद 30 दिसंबर की सुबह उन्होंने फिर अपना रूटीन चेकअप कराया और शाम को वह दिल्ली से पटना लौट गए. उधर, बिहार में छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए नीतीश कुमार ने आनन-फानन में पटना का प्रोग्राम बनाया. लेकिन, क्या सियासत की भाषा इतनी आसानी से समझी जा सकती है?
तेजस्वी यादव ने खुला ऐलान किया कि अब नीतीश कुमार के साथ नहीं जाएंगे. अगर गए तो यह अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा. यहां गौर करने वाली बात यह कि तेजस्वी यादव के इस ऐलान के थोड़ी ही देर में यह खबर आ गई कि जेपी नड्डा और नीतीश कुमार की मुलाकात नहीं होने जा रही है. कहा जाता है जब कहीं आग लगती है तभी धुआं उठता है. जाहिर है सियासत के जानकार यहां भी धुआं ढूंढ रहे हैं कि इसका धुंधलापन कितना गहरा है या फिर कुछ साफ-साफ भी है.
क्या है एनडीए के अंदरखाने हलचल की कहानी?
बिहार में छात्रों का विरोध, नीतीश कुमार का दिल्ली आना बिना एनडीए नेताओं से मिले वापस चले जाना, अमित शाह के अंबेडकर वाले बयान पर चुप्पी साधना, बीजेपी के नेताओं का सफाई देना, यू ही नहीं हो रहा है सबकुछ, हालांकि क्या कुछ नया, नए साल में होने वाला है ये आने वाला वक्त ही बताएगा. लेकिन बात ये भी नीतीश कुमार और नेताओं की तरह नहीं, नीतीश हरदम तैयार रहने वाले नेता हैं.
इस सब के बावजूद, ऐसी परिस्थिति अब तक सामने से नहीं दिख रही कि सीएम नीतीश कुमार एनडीए से अलग कुछ सोच रहे हैं. बहरहाल, सियासत में कब क्या हो कोई नहीं जानता इंतजार करिये अगले टर्न और ट्विस्ट का.
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