बिना विधायक बने 6 महीने से ज्यादा कैसे बने रहे मंत्री? दीपक प्रकाश मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

हर्षिता सिंह

• 10:00 AM • 31 Jul 2026

बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश बिना विधायक/विधान परिषद सदस्य बने 6 महीने से ज्यादा पद पर कैसे बने रहे, इस संवैधानिक सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में रोहिणी आचार्य के तीखे हमलों के बीच अब मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी।

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उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश की कुर्सी खतरे में है (Photo-RLM)
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बिहार की सियासत में एक बार फिर संवैधानिक पेंच को लेकर भूचाल आ गया है. बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर नियुक्ति को लेकर मामला देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) तक पहुंच गया है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस याचिका पर बेहद सख्त रुख अपनाया है और मामले की सुनवाई के लिए मंगलवार का दिन तय किया है.

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दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी नीतीश-भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है.

 

क्या है पूरा मामला और क्यों फंसा है पेंच?

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी . दीपक प्रकाश न तो बिहार विधानसभा के सदस्य (MLA) हैं और न ही विधान परिषद (MLC) के. संविधान के नियमों के मुताबिक, कोई भी गैर-विधायक व्यक्ति अधिकतम 6 महीने तक ही मंत्री पद पर रह सकता है.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि दीपक प्रकाश इस 6 महीने की तय समयसीमा को पार कर चुके हैं. वकील ने साफ किया कि संविधान में दी गई यह 6 महीने की छूट केवल एक बार के लिए होती है, इसे बार-बार आगे नहीं बढ़ाया जा सकता.

CJI की सख्त टिप्पणी: "कानून का सवाल है, जवाब देना होगा"

मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने सख्त लहजे में कहा कि यह पूरी तरह से संविधान और कानून से जुड़ा सवाल है. राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि कोई व्यक्ति बिना किसी सदन का सदस्य बने 6 महीने से ज्यादा वक्त तक मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है? अदालत इस पर बिहार सरकार से जवाब मांगेगी.

वहीं, बिहार सरकार के वकील ने कोर्ट में कहा कि यह मामला पहले से ही 27 अगस्त के लिए सूचीबद्ध है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला सुनाएगा, राज्य सरकार उसका पूरी तरह पालन करेगी.

रोहिणी आचार्य ने किया तीखा हमला 

इस कानूनी जंग के बीच राजद नेता रोहिणी आचार्य ने भी बिहार सरकार को आड़े हाथों लिया है. रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर लिखा की सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि 6 महीने की संवैधानिक सीमा को किसी भी राजनीतिक पैंतरेबाज़ी से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता. इसके बावजूद भाजपा नीत सरकार में दीपक प्रकाश का मंत्री पद पर जमे रहना यह साबित करता है कि सत्ताधारी दल खुद को संविधान से भी ऊपर समझता है.

अब सबकी निगाहें मंगलवार को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां तय होगा कि दीपक प्रकाश की कुर्सी बचेगी या बिहार मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल देखना पड़ेगा.

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