तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में चिराग की गैर-मौजूदगी से गरमाई राजनीति, आखिर क्यों बनी यह दूरी?

Dahi Chura Politics: तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में चिराग पासवान की पार्टी की गैर-मौजूदगी से बिहार की राजनीति गरमा गई है. मकर संक्रांति के मौके पर जहां बीजेपी-जेडीयू समेत कई दिग्गज नेता भोज में शामिल हुए, वहीं लोजपा (रामविलास) को न्योता न मिलने पर सवाल उठने लगे हैं. क्या महुआ विधानसभा की हार बनी दूरी की वजह? जानिए पूरी सियासी कहानी और इसके राजनीतिक मायने.

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तेज प्रताप के दही-चूड़ा भोज में चिराग पासवान की गैर-मौजूदगी ने गरमाई राजनीति

अनिकेत कुमार

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बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति के मौके पर 'दही-चूड़ा' भोज हमेशा से राजनीति गरमाते आ रहा है. इस बार लालू प्रसाद यादव के बड़े लाल और जनशक्ति जनता दल प्रमुख तेज प्रताप यादव ने इस भोज का आयोजन किया था. तेज प्रताप ने इस भोज के लिए खुद आमंत्रण कार्ड बांटने से लेकर तैयारियों का पूरा जायजा लिया. तेज प्रताप ने भोज के लिए सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष सबको निमंत्रण दिया लेकिन एक पार्टी की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी. तेज प्रताप की दही-चूड़ा भोज में चिराग पासवान की पार्टी के एक भी नेता नहीं आए जिसे लेकर अब चर्चाएं तेज हो गई है. आइए विस्तार से समझते हैं पूरी बात.

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दिग्गजों का हुआ जमावड़ा

तेज प्रताप यादव की इस पार्टी में आज खुद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव मौजूद रहे. वहीं इनके अलावा बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी शिरकत की. लेकिन सबसे चौंकाने वाली तस्वीर एनडीए नेताओं की मौजूदगी रही क्योंकि बीजेपी के कद्दावर नेता और उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, जेडीयू के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी, चेतन आनंद और मदन सैनी जैसे दिग्गज इस भोज में शामिल हुए. तेज प्रताप ने खुद जाकर इन नेताओं को व्यक्तिगत रूप से निमंत्रण दिया था.

चिराग पासवान से रही दूरी

इस भव्य आयोजन में जहां एनडीए के लगभग सभी घटक दलों के नेता दिखें, वहीं चिराग पासवान की पार्टी 'लोजपा (रामविलास)' पूरी तरह नदारद रही. गौर करने वाली बात यह है कि तेज प्रताप यादव ने बीजेपी, जेडीयू, जीतन राम मांझी की 'हम' पार्टी, और उपेंद्र कुशवाहा की 'आरएलएम' के नेताओं को तो न्योता दिया, लेकिन चिराग की पार्टी के किसी भी विधायक या पदाधिकारी को आमंत्रित नहीं किया. दिलचस्प बात यह है कि चाचा पशुपति कुमार पारस (राष्ट्रीय लोजपा) इस पार्टी में नजर आए, लेकिन भतीजे चिराग की पार्टी से किसी को नहीं बुलाया गया.

क्या 'महुआ' की हार बनी है खटास की वजह?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दूरी के पीछे पुरानी चुनावी कड़वाहट हो सकती है. याद दिला दें कि तेज प्रताप यादव को महुआ विधानसभा सीट से एलजेपी के उम्मीदवार संजय सिंह के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा था. तो अब सवाल उठता है कि क्या उस हार का घाव आज भी हरा है? क्या यही वजह है कि तेज प्रताप ने पूरी एनडीए को गले लगाया, लेकिन चिराग पासवान से दूरी बनाए रखी?

सियासी संदेश के मायने

एक तरफ जहां तेज प्रताप यादव बीजेपी और जेडीयू के नेताओं के प्रति सॉफ्ट नजर आ रहे हैं और खुद जाकर उन्हें निमंत्रण कार्ड दे रहे हैं, वहीं लोजपा (रामविलास) को दरकिनार करना बिहार की भविष्य की राजनीति की ओर इशारा कर रहा है. अब सवाल यह उठता है कि क्या यह महज एक व्यक्तिगत नाराजगी है या फिर बिहार की राजनीति में कोई नया समीकरण आकार ले रहा है? फिलहाल, चिराग की पार्टी की अनुपस्थिति ने इस 'दही-चूड़ा' भोज के स्वाद में सियासी पारा गरमा तो दिया है.

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