बिहार विधानसभा में बजट सत्र चल रहा जिस दौरान नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच हुई मीठी नोकझोंक खूब चर्चा में है. लेकिन कल जैसे ही सत्र खत्म हुआ तो एक और बात की चर्चा उठी जो कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को लेकर हो रही है. अब तक जहां विपक्ष नीतीश कुमार की तबीयत को लेकर उन्हें घेरता था, अब इस घेरे में खुद तेजस्वी यादव आ गए है. मामला यहीं नहीं रुका और एनडीए नेताओं ने तो विधानसभा के अंदर उनके नशे में होने का शक के साथ-साथ मेडिकल जांच की बात भी कह दी है. आइए विस्तार से जानते हैं इस सियासी उबाल की पूरी कहानी.
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क्या है पूरा मामला?
बिहार विधानसभा में बजट सत्र चल रहा है. सत्र के तीसरे दिन सदन में काफी गर्म माहौल देखा गया और नीतीश कुमार कई बार तेजस्वी यादव को चुप करके बैठने को बोलते हुए दिखाई दिए. सदन की कार्यवाही के बीच जब तेजस्वी यादव बोलने के उठ खड़े हुए तो वे थोड़े असहज दिखे. तेजस्वी बोलते-बोलते कई बार रुक गए और खड़े होकर सही से बोल नहीं पा रहे थे. फिर राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने स्पीकर से कहा कि महोदय पैर में दर्द हैं तो सत्ता पक्ष के नेता कुछ-कुछ बोलने लगे तब तेजस्वी ने तीखे अंदाज में कहा कि इंसानियत नाम की इन लोगों में कोई चीज है क्या?
तेजस्वी यादव ने खुद मांगी अनुमति
हालांकि तेजस्वी यादव ने खुद स्पीकर प्रेम कुमार से अनुमति मांगी. उन्होंने कहा कि, 'अध्यक्ष महोदय अगर आपकी अनुमति हो तो हम बैठ के अपनी बात रखेंगे. क्योंकि मेरा नाखून पूरा कबर(नाखून उखड़ना) चुका है, जिससे बहुत ज्यादा दर्द है और एंटीबायोटिक के सहारे हम चल रहे हैं.' प्रेम कुमार ने तेजस्वी यादव को बैठ कर अपनी बात रखने की अनुमति दे दी, लेकिन सत्र खत्म होते ही सियासत गर्म हो गई. तेजस्वी यादव जिस प्रकार बोलते-बोलते रुक जा रहे थे इसे लेकर बीजेपी और जदयू नेता ने शक जताया कि वे विधानसभा के अंदर नशे की हालात में थे.
बीजेपी विधायक ने नशीली दवाओं के सेवन का जताया शक
इस मामले में बीजेपी विधायक मिथिलेश तिवारी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि, देखिए सच पूछिए तो हम लोगों को थोड़ा इंतजार था कि आज धारदार बोलेंगे. झूठ ही बोलेंगे तो कम से कम ठीक से बोलेंगे. लेकिन जैसे खड़े हुए और जिस प्रकार से वो लड़खड़ाने लगे, एक समय सदन के सब विधायकों को लगा कि शायद वो नशे में है. फिर उन्होंने कहा कि नहीं मेरे पांव में दर्द है। मैं बहुत हाई एंटीबायोटिक ले खड़ा हूं. माननीय अध्यक्ष जी ने कहा कि ठीक है आप बैठ के बोलिए, लेकिन जब वो बैठ के भी बोले तो वही हाल था.
मिथिलेश तिवारी ने आगे तंज भरे लहजे में कहा कि,
'मैं चिंतित हूं आज कि कहीं ऐसा तो नहीं कि कोई वो नशीली दवाई खा रहे हो. गम भुलाने के लिए भी खा रहे हो या बीमारी ठीक करने के लिए खा रहे हो या कोई और नशा का सेवन तो नहीं कर रहे हैं. इसलिए मैं सरकार से मांग करूंगा कि उनके स्वास्थ्य की ठीक से जांच की जाए क्योंकि नेता प्रतिपक्ष भी बिहार विधानसभा का धरोहर है. इसीलिए मैं बिहार सरकार से मांग करूंगा कि नेता प्रतिपक्ष के स्वास्थ्य की जांच अविलंब हो. क्योंकि वह तो मेरे जिले से भी है, भले वह जिला में नहीं जाते हो लेकिन हमारे जिले से भी संबंधित है और लालू जी के अकेले लाल बच गए हैं जो पूरे परिवार को संभालने में लगे हैं. परिवार संभल नहीं रहा है, बेचारे बिहार संभालने चले हैं और इस स्थिति में वो तनाव में हैं तो हो सकता है कि कोई नशली दवाई का सेवन कर रहे हो.'
वह डोल रहे थे- जदयू विधायक
वहीं जदयू विधायक विनय चौधरी ने साफ कहा कि, वह डोल रहे थे. लग रहा था कि किसी दूसरी दुनिया में हो, नॉर्मल नहीं लग रहे थे. ना नॉर्मल उनका व्यवहार था ना नॉर्मल उनका स्पीच था. उनकी मां अनपढ़ थी तब पर भी वो पढ़ लेती थी और ये तो नौवां फेल है. पढ़ते-पढ़ते रुक जाते थे. अपने मुस्कुराते थे, अपने लग रहा था उनको कि हमको नहीं पढ़ा हो रहा है. उन्होंने आगे कहा कि विधानसभा में विपक्ष के नेता धरोहर होता है और उस धरोहर की रक्षा करना हम लोगों का दायित्व बनता है. इसलिए उनका मेडिकल जांच करा करके उनका समुचित इलाज होना चाहिए.
हालांकि अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आग की कार्यवाही के दौरान सदन में क्या-कुछ होता है और साथ ही क्या कल की तरह फिर चाचा-भतीजा की मीठी नोकझोंक एक बार फिर चर्चा का विषय बनेगी.
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