Bihar liquor ban: बिहार में 5 अप्रैल 2016 को शराबबंदी कानून लगा किया गया. तब से बिहार में शराबबंदी तो जारी है लेकिन आए दिन जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत हो रही है. जहरीली शराब पीने से अब तक लोगों की मौत का सरकारी आंकड़ा भले ही 150 हो लेकिन ये आंकड़ा काफी बड़ा है. सिवान में जहरीली शराब से हुई 25 से ज्यादा मौतों के बाद यह सवाल उठने लगा है की ऐसी शराबबंदी किस काम की जिसमें लोगों की मौत हो रही है.
ADVERTISEMENT
शराबबंदी पर घिर रही है नीतीश सरकार
विधानसभा चुनाव से पहले जहरीली शराब से हुई मौत की वजह से विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. तेजस्वी ने जहां एक्स पर पोस्ट करके नीतीश कुमार को घेरा है तो जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के अंहकार पर सवाल उठाया है. नीतीश कुमार पर सवाल उठाते हुए प्रशांत किशोर ने कहा की सिर्फ ठेकों को बंद कर देने से शराबबंदी कानून लागू नहीं हो जाता है.
शराबबंदी कानून की कोर्ट में हुई है किरकिरी
बिहार के शराबबंदी कानून को सुप्रीम कोर्ट ने उन कानूनों के उदाहरण के तौर पर पेश किया जिसे बनाने में दूरदृष्टि की कमी दिखती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिहार के शराबबंदी कानून ने कोर्ट का दम घोंट रखा है, पटना हाईकोर्ट के 14-15 जज शराब मामलों में बेल के केस सुन रहे हैं जिससे बाकी मामलों की सुनवाई पर असर पड़ रहा है. पटना हाईकोर्ट ने कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू करने में सरकार फेल है और इसकी वजह से लोगों को गांजा-चरस और दूसरे ड्रग्स की लत लग रही है.
शराबबंदी कानून लागू होने से फायदा
बिहार में शराबबंदी कानून के लागू होने के बाद महिलाओं के खिलाफ पति या ससुराल के घरेलू हिंसा के मामले कम हुए. वहीं महिलाओं के साथ अपराध की दर में कमी आई है. साथ ही शराब पीने के नुकसान को लेकर राज्य में जागरूकता बढ़ी है. इतना ही नहीं सार्वजनिक जगहों पर शराब पीकर हंगामा और हुड़दंग के मामले नगण्य है.
शराबबंदी कानून के लागू होने से नुकसान
बिहार को शराबबंदी कानून के लागू होने के बाद से राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है. 2015 में 4000 करोड़ की कमाई हुई थी तब से अब तक 9 सालों में 36 हजार करोड़ का नुकसान अनुमानित है. हालांकि जानकार इसे 50 हजार करोड़ का नुकसान मानते हैं. शराबबंदी कानून को लागू कराने के लिए नीतीश सरकार ने मद्य निषेध विभाग बनाया जिस पर करोड़ों रुपये खर्च किए. जमीन, आसमान, जल हर जगह निगरानी पर हर साल करोड़ों का खर्च है. बिहार सरकार ने कई नौकरी भी निकाली जो सिर्फ शराबबंदी कानून को लागू करने के लिए थी. इसके जरिए भी सरकार पर राजस्व का भार बढ़ा. बिहार में शराबबंदी होने के बाद शराब का अंडरवर्ल्ड तैयार हुआ जो पुलिस के लिए भी सिरदर्द बना. एक अनुमान के तहत बिहार में शराब के अवैध धंधे से 10 हजार करोड़ का काला धन पैदा हो रहा है.
ADVERTISEMENT


