Gold-silver rate: सोना 2500 रुपए तक फिसला, चांदी के भाव में आई बड़ी गिरावट, रेट का फ्यूचर क्या होगा...एक्सपर्ट से जानें
चिराग ठाकुर
23 Jun 2026 (अपडेटेड: Jun 23 2026 2:45 PM)
सोने की कीमतों में हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव जारी है. रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद गोल्ड में गिरावट देखी गई है. क्या सोना फिर नई ऊंचाई बनाएगा या 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल सकता है? जानिए अमेरिकी फेड, डॉलर इंडेक्स, शॉर्ट कवरिंग और वैश्विक संकेतों का गोल्ड पर क्या असर पड़ रहा है.
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इस कारोबारी सप्ताह के दूसरे दिन सोने-चांदी के रेट में एक बार फिर गिरावट आई है. सप्ताह के शुरूआत में रेट चढ़ने से निवेशकों को उम्मीदें जगीं, लेकिन मंगलवार दोपहर 12 बजे जब IBJA (इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन) ने रेट जारी किया तो सभी हैरान रह गए. चतकीली धातुओं ने एक बार फिर निवेशकों को तगड़ा झटका दे दिया. वहीं खरीदारों के लिए मंगलवार का दिन मंगलमय हो गया.
23 जून को 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम 1,47,310 रुपए से गिरकर 1,44,788 रुपए पर आ गई. वहीं चांदी 10,000 रुपए से भी ज्यादा लुढ़ककर 2,27,235 रुपए पर आ गई. ध्यान देने वाली बात है कि सोमवार को प्योर चांदी (999) प्रति किलो 2,37,801 रुपए पर थी.


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कुल मिलाकर सोने की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव बना हुआ है. एक तरफ निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर गोल्ड की ओर देख रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताएं सोने पर दबाव बना रही हैं. दिलचस्प बात ये है कि हाल के दिनों में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने वाला सोना अब लगातार गिरावट की ओर बढ़ रहा है. कई विदेशी विश्लेषकों का मानना है कि अगर हालात नहीं बदले तो सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे भी जा सकता है. तो आखिर और आने वाले दिनों में सोने का आउटलुक कैसा रह सकता है?
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ट्रेडर्स की नजर फेड रिजर्व की ब्याज दरों पर
बाजार अभी भी पूरी तरह से बुलिश नहीं हुआ है. ट्रेडर्स की नजर अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर इंडेक्स और मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति पर बनी हुई है. यानी फिलहाल सोना रिकवरी तो कर रहा है, लेकिन बड़ी तेजी का माहौल अभी नहीं बना है. अब सवाल है कि जब पिछले कई दिनों से सोने में दबाव बना हुआ था, तो आज रिकवरी क्यों दिख रही है? इसके पीछे कई कारण हैं.
पहला कारण है शॉर्ट कवरिंग
पिछले सप्ताह लगातार बिकवाली के बाद कई ट्रेडर्स ने अपने शॉर्ट पोजिशन काटे, जिससे कीमतों को सहारा मिला.
दूसरा कारण है सुरक्षित निवेश की मांग
मध्य पूर्व से जुड़ी अनिश्चितताएं अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर कई सवाल बने हुए हैं.
तीसरा कारण है तकनीकी सपोर्ट
कई विश्लेषकों का मानना है कि हालिया गिरावट के बाद सोना महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन के आसपास पहुंच गया था. वहां से खरीदारी निकलना स्वाभाविक था.
लेकिन यह रिकवरी कितनी टिकाऊ होगी, यह आने वाले आर्थिक आंकड़े तय करेंगे.


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अब उस बड़ी कहानी को समझते हैं जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है. इस समय सोने के लिए सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी फेडरल रिजर्व है. बाजार को उम्मीद थी कि फेड जल्द ब्याज दरों में कटौती शुरू करेगा, लेकिन हालिया बयानों से संकेत मिला है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं. इसे बाजार की भाषा में "Higher for Longer" कहा जाता है. यही बात सोने पर दबाव डाल रही है.
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डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों का कनेक्शन...इसलिए भाव में हलचल
दरअसल सोना कोई ब्याज नहीं देता है. जब बैंक जमा, बॉन्ड और ट्रेजरी यील्ड ज्यादा रिटर्न देने लगते हैं तो निवेशकों को सोना रखने का आकर्षण कम हो जाता है. यानी अगर निवेशक को सुरक्षित सरकारी बॉन्ड में अच्छा ब्याज मिल रहा है तो वह सोने में पैसा क्यों लगाए? यही वजह है कि ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना सोने के लिए निगेटिव मानी जाती है. सोने की कमजोरी के पीछे दूसरा बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर है. फेड के सख्त रुख के कारण डॉलर मजबूत बना हुआ है. जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना महंगा हो जाता है. इससे अंतरराष्ट्रीय मांग पर असर पड़ता है. नतीजा ये होता है कि गोल्ड की कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है. इसी वजह से पिछले कुछ हफ्तों में डॉलर की मजबूती और सोने की कमजोरी साथ-साथ देखने को मिली है.
विदेशी ब्रोकरेज और रिसर्च फर्मों के कुछ विशेषज्ञ अब एक नई चेतावनी दे रहे हैं. Tradu.com के वरिष्ठ बाजार विश्लेषक Nikos Tzabouras का कहना है कि सोना Bear Market की तरफ बढ़ सकता है. उनका मानना है कि अगर फेड का सख्त रुख जारी रहता है और डॉलर मजबूत बना रहता है तो सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे भी जा सकता है. हालांकि ये एक संभावना है, कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं, लेकिन इस बयान ने बाजार का ध्यान जरूर खींचा है.


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अमेरिका Vs ईरान...बड़ा फैक्टर
सोने की दिशा तय करने वाला दूसरा बड़ा फैक्टर है अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत. हाल ही में दोनों देशों के बीच शांति समझौते की खबरें आई थीं. बाजार ने इसे सकारात्मक माना था, लेकिन अब इस समझौते के अगले चरण को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. इतिहास गवाह है कि जब भी दुनिया में युद्ध, तनाव या राजनीतिक संकट बढ़ता है तो निवेशक सोने की ओर भागते हैं. इसीलिए गोल्ड को Safe Haven Asset कहा जाता है. अगर अमेरिका-ईरान बातचीत में कोई बड़ा सकारात्मक परिणाम आता है तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है. लेकिन अगर तनाव बढ़ता है तो सोना फिर से तेजी पकड़ सकता है.
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ये तीन बातें सोने को करेगी सस्ता
अब मूल तीन बातें हैं जो सोने को सस्ता कर सकती है. पहला फेड रिजर्व ब्याज दरों में कटौती न करें और ब्याज दरें ऊंची बनी रहे. दूसरा डॉलर कमजोर होने से सोने की मांग घटेगी और भाव गिरेगा. तीसरा अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा की ओर बढ़े तेल से जुड़ा व्यापार सुचारू रूप से पटरी पर आ जाए. ऐसे में सोने के भाव में गिरावट देखी जा सकती है.










