8th Pay Commission new update: 8वें वेतन आयोग के गठन और फिटमेंट फैक्टर को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है. जेसीएम (JCM) की स्टाफ साइड की महत्वपूर्ण बैठक में कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी और फिटमेंट फैक्टर को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है. नेशनल काउंसिल (JCM) के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा ने News Tak से बातचीत में खुलासा किया है कि कर्मचारी यूनियनों के बीच 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग पर पूर्ण सहमति बन गई है.
ADVERTISEMENT
5 यूनिट के आधार पर तैयार हुआ नया फॉर्मूला
शिव गोपाल मिश्रा ने बताया कि इस बार फिटमेंट फैक्टर की गणना पुराने 3 यूनिट के बजाय 5 यूनिट के आधार पर की गई है. सरकार की ही एक समिति ने सिफारिश की थी कि परिवार में पत्नी और बच्चों के साथ-साथ माता-पिता को भी शामिल किया जाना चाहिए. इसी '5 यूनिट' के सिद्धांत को अपनाते हुए जब गणना की गई, तो 3.833 का साइंटिफिक आंकड़ा निकलकर सामने आया है.
बदलती जरूरतों को रखा गया ध्यान में
बैठक में यह चर्चा हुई कि अब पुराने 'डॉक्टर एक्रोयड फॉर्मूले' (Dr. Aykroyd Formula) में बदलाव की जरूरत है. आज के समय में कर्मचारी केवल रोटी-दाल-चावल तक सीमित नहीं हैं. बच्चों की शिक्षा, ब्रांडेड कपड़े, मोबाइल डेटा, परिवहन के लिए चार पहिया वाहन और बुजुर्ग माता-पिता की स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर इस नए फिटमेंट फैक्टर की मांग तैयार की गई है.
क्या यह मांग पूरी होना संभव है?
जब उनसे पूछा गया कि क्या 3.833 का फिटमेंट फैक्टर व्यावहारिक (Feasible) है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मांग पूरी तरह से तर्कसंगत और संवैधानिक है. उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का वेतन 10 साल में एक बार बढ़ता है. ऐसे में सरकार को उनके विकास के बारे में भी सोचना चाहिए. जेसीएम जल्द ही इस फॉर्मूले को वेतन आयोग के सामने पूरे जस्टिफिकेशन के साथ पेश करेगा.
JCM क्या है?
JCM (Joint Consultative Machinery) यानी संयुक्त सलाहकार मशीनरी केंद्र सरकार के कर्मचारियों और सरकार (नियोक्ता) के बीच बातचीत का एक आधिकारिक मंच है. इसकी शुरुआत 1966 में की गई थी. आसान शब्दों में कहें तो, यह एक ऐसी मेज है जहां सरकार और सरकारी कर्मचारी संगठनों (यूनियनों) के प्रतिनिधि साथ बैठकर कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों और काम करने की शर्तों पर चर्चा करते हैं और विवादों को सुलझाते हैं.
डॉ. एक्रोयड फॉर्मूला क्या है?
डॉ. एक्रोयड (Dr. Aykroyd Formula) वह वैज्ञानिक आधार है जिसका उपयोग भारत में वेतन आयोग (Pay Commissions) कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी (Minimum Wage) तय करने के लिए करते हैं. इसे 'नीड्स बेस्ड मिनिमम वेज' (जरूरत आधारित न्यूनतम वेतन) का सिद्धांत भी कहा जाता है. यह फॉर्मूला प्रसिद्ध पोषण विशेषज्ञ (Nutritionist) डॉ. वैलेस एक्रोयड द्वारा तैयार किया गया था. उन्होंने गणना की थी कि एक आम इंसान को स्वस्थ रहने और काम करने के लिए रोजाना कितनी कैलोरी और किन बुनियादी चीजों की जरूरत होती है. इसकी गणना के तहत डॉ. एक्रोयड ने न्यूनतम वेतन तय करने के लिए तीन बुनियादी पैमानों को मानक माना.
- भोजन (Food): एक वयस्क कर्मचारी के लिए रोजाना 2700 कैलोरी का भोजन अनिवार्य माना गया. इसमें दाल, चावल, सब्जी, दूध, चीनी और तेल की मात्रा तय की गई.
- कपड़ा (Clothing): एक परिवार के लिए प्रति वर्ष 18 गज (Yards) कपड़ा प्रति व्यक्ति के हिसाब से गणना की गई (यानी एक मानक परिवार के लिए सालाना 72 गज).
- आवास (Housing): सरकार द्वारा कम आय वर्ग के लिए तय किए गए न्यूनतम किराया क्षेत्र के आधार पर मकान किराया (HRA) की गणना.
'यूनिट' का सिद्धांत - 3 vs 5 यूनिट
पुरानी व्यवस्था (3 यूनिट): अब तक वेतन आयोग एक कर्मचारी के परिवार को 3 यूनिट मानता था (पति, पत्नी और 2 बच्चे-जहां बच्चों को आधा यूनिट गिना जाता था).
नई मांग (5 यूनिट): जैसा कि आपने शिव गोपाल मिश्रा के बयान में सुना, अब कर्मचारी यूनियन मांग कर रही हैं कि परिवार में बुजुर्ग माता-पिता को भी शामिल किया जाए. इससे यूनिट की संख्या 3 से बढ़कर 5 हो जाती है, जिससे न्यूनतम वेतन की गणना अपने आप बढ़ जाती है.
वेतन आयोग में इसका महत्व
15वें भारतीय श्रम सम्मेलन (1957): इस सम्मेलन में पहली बार डॉ. एक्रोयड फॉर्मूले को 'नीड्स बेस्ड वेज' के लिए आधिकारिक मान्यता दी गई. 7वां वेतन आयोग ने इसी फॉर्मूले का उपयोग करके 2016 में न्यूनतम वेतन ₹18,000 तय किया था. 8वें वेतन आयोग के लिए अब कर्मचारी यूनियनें कह रही हैं कि आज के जमाने में केवल भोजन और कपड़ा काफी नहीं है बल्कि इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन (Education, Health & Misc) के खर्चों को भी 25% अतिरिक्त जोड़कर देखना चाहिए.
8th Pay Commission update: वेतन आयोग में Job के मौके, सैलरी 90 हजार से 1 लाख 80 हजार तक
ADVERTISEMENT


