8th Pay Commission: आठवां वेतन आयोग आने के बाद सरकारी कर्मचारियों की सैलरी देगी प्राइवेट सेक्टर को टक्कर? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

8th Pay Commission: क्या आठवां वेतन आयोग आने से सरकारी कर्मचारियों की सैलरी प्राइवेट सेक्टर को टक्कर देगी? जानिए फिटमेंट फैक्टर और जीडीपी पर पड़ने वाले असर को लेकर विशेषज्ञों का क्या दावा है.

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8वां वेतन आयोग.

निधि तनेजा

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8th Pay Commission new update: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को लंबे समय से 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन का इंतजार है. कर्मचारियों की तरफ से फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) से लेकर मिनिमम सैलरी और फैमिली यूनिट को बढ़ाने की मांग लगातार उठाई जा रही है. इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या 8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों की सैलरी प्राइवेट सेक्टर के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर हो जाएगी और क्या इससे देश की अर्थव्यवस्था पर कोई नकारात्मक असर पड़ेगा?

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न्यूज तक (News Tak) से बात करते हुए कर्मचारी संगठन NC-JCM के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा ने इस पूरे मामले पर बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं.

प्राइवेट सेक्टर की तरफ न भागे 'ब्रेन', इसलिए जरूरी है सैलरी हाइक 

सैलरी के मामले में जब सरकारी और प्राइवेट सेक्टर की तुलना की गई, तो विशेषज्ञ ने साफ किया कि सरकारी क्षेत्र को किसी भी हाल में प्राइवेट सेक्टर से पीछे नहीं रहना चाहिए. उन्होंने कहा, "अगर सरकारी क्षेत्र की सैलरी प्राइवेट सेक्टर के मुकाबले पिछड़ गई, तो देश का जो 'ब्रेन' (इंटेलिजेंसिया) है, वह सरकारी नौकरियों की तरफ आकर्षित न होकर पूरी तरह से प्राइवेट सेक्टर की तरफ भागेगा." देश के विकास के लिए कुशल और बुद्धिमान लोगों का सरकारी तंत्र में बने रहना बेहद जरूरी है.

3.68 फिटमेंट फैक्टर की मांग और राज्यों पर बढ़ता दबाव 

केंद्रीय कर्मचारियों द्वारा लगातार 3.68 फिटमेंट फैक्टर की मांग की जा रही है. हालांकि, अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि केंद्र सरकार के फैसले को राज्य सरकारें भी फॉलो करती हैं, जिससे उन राज्यों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है जिनकी कमाई कम है.

इस आशंका को खारिज करते हुए विशेषज्ञ ने पिछले सात वेतन आयोगों का अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि हर बार वेतन आयोग लागू होने के समय यह दलील दी जाती है कि राज्य कंगाल हो जाएंगे, लेकिन आज तक कोई भी राज्य इस वजह से कंगाल नहीं हुआ है. केंद्र के बाद राज्यों के कर्मचारियों को भी बढ़ा हुआ वेतन मिलना ही चाहिए और यह उनका हक है.

सैलरी बढ़ने से देश की GDP को मिलता है बूस्ट 

वेतन आयोग को केवल वित्तीय नुकसान या बोझ के रूप में देखना बिल्कुल गलत है. इसके पीछे का अर्थशास्त्र समझाते हुए विशेषज्ञ ने बताया कि- 

  • जब कर्मचारियों की तनख्वाह बढ़ती है, तो बाजार में उनकी परचेजिंग पावर (क्रय शक्ति) का विकास होता है.
  • परचेजिंग पावर बढ़ने से बाजार में मांग (Demand) बढ़ती है, जिससे सीधे तौर पर देश की जीडीपी (GDP) में जबरदस्त उछाल आता है.

सरकारी आंकड़ों और अर्थशास्त्रियों के पुराने रिकॉर्ड गवाह हैं कि जब-जब नया पे कमीशन आया है, भले ही शुरुआती दौर में थोड़ी बहुत महंगाई (Inflation) देखने को मिली हो, लेकिन उसने देश की जीडीपी और मार्केट को हमेशा रफ्तार देने का काम किया है.

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