8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में क्या कोरोना काल के रुके हुए पैसे का होगा एडजस्टमेंट ?

निधि तनेजा

15 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 15 2026 1:37 PM)

रेलवे कर्मचारी संगठन NFIR के कार्यकारी अध्यक्ष बीसी शर्मा ने बताया कि कांग्रेस की जब सरकार थी तब भी ऐसे सिचुएशन आए थे तब गवर्नमेंट महंगाई भत्ता नहीं दे पाई थी. हालांकि सरकार ने कर्मचारियों के भत्ते को उनके पीएफ में जमा करा दिया. जिससे वो पैसा सरकार के पास भी रहा और कर्मचारियों को लॉन्गटर्म फायदा भी हो गया. पर बीजेपी सरकार ने फ्रीज ही कर दिया.

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केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चाएं तेज हैं. कर्मचारियों को उम्मीद है कि नए वेतन आयोग के गठन के साथ ही उनकी कई पुरानी मांगें पूरी हो सकती हैं, जिनमें कोरोना काल (Covid-19) के दौरान रोके गए महंगाई भत्ते (DA) का मुद्दा सबसे अहम है.

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कोरोना काल में रुके डीए से भारी नुकसान 

News  Tak से खास बातचीत में रेलवे कर्मचारी संगठन NFIR के कार्यकारी अध्यक्ष बीसी शर्मा ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान भारत सरकार ने तीन किस्तों के महंगाई भत्ते को फ्रीज कर दिया था. इस फैसले पर विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के इतिहास में पहले कभी भी महंगाई भत्ते को इस तरह फ्रीज नहीं किया गया था. पूर्व की सरकारों (जैसे कांग्रेस सरकार) के समय जब ऐसी स्थिति आई थी, तब डीए की किस्त का पैसा प्रोविडेंट फंड (PF) में जमा कर दिया गया था, जिससे पैसा सरकार के पास ही रह गया और कर्मचारियों का नुकसान नहीं हुआ था.

मौजूदा व्यवस्था में डीए फ्रीज होने से सर्विंग और रिटायर होने वाले कर्मचारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. इसकी वजह से उनके डीसीआरजी (DCRG), पेंशन और लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment) पर सीधा असर पड़ रहा है. कर्मचारियों की मांग है कि सरकार को इस फ्रीज किए गए महंगाई भत्ते की किस्तों को जल्द से जल्द रिलीज करना चाहिए.

लेवल-1 के कर्मचारियों को कितना होगा फायदा? 

8वें वेतन आयोग को लेकर यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि लेवल-1 के कर्मचारियों को इससे बड़ा फायदा होने वाला है. इतिहास गवाह है कि जब भी नया पे कमीशन आता है, तो नए नियुक्त होने वाले (Newly Appointed) कर्मचारियों को अधिक फायदा होता है, जबकि लंबी सर्विस वाले कर्मचारियों को तुलनात्मक रूप से कम लाभ मिलता है.

सैलरी गैप को कम करने की मांग 

चौथे वेतन आयोग (4th Pay Commission) तक मिनिमम सैलरी वालों को 100% महंगाई भत्ता मिलता था, जबकि गजटेड अधिकारियों के लिए 75% का स्लैब था. उस समय न्यूनतम और अधिकतम वेतन के बीच अंतर बेहद कम (1:9) था. लेकिन आज यह गैप बहुत ज्यादा बढ़ चुका है, जहां एक तरफ अधिकतम सैलरी ढाई लाख तक है, वहीं दूसरी तरफ न्यूनतम सैलरी करीब 69,000 रुपये पर रुकी है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्रुप डी और नॉन-गजटेड कर्मचारी सबसे ज्यादा हार्ड वर्क करते हैं, जबकि अपर क्लास केवल टेक्निकल एडवाइस के लिए है. इसके बावजूद काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या घट रही है और अधिकारियों की संख्या व सैलरी-भत्ते बढ़ रहे हैं. उदाहरण के तौर पर, रेलवे में ग्रुप डी के कर्मचारी को अधिकतम 3 पास मिलते हैं, जबकि गजटेड अधिकारियों को 6 सेट पास दिए जाते हैं. कर्मचारियों की मांग है कि विदेशों की तर्ज पर काम करने वालों को बेहतर सैलरी और सुविधाएं मिलनी चाहिए ताकि वे मानसिक तनाव से मुक्त होकर अपना परिवार चला सकें.

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