अब मार्केट में नहीं बिकेंगे सस्ते और नकली टेम्पर्ड ग्लास, सरकार लेकर आई नया नियम

अलका कुमारी

• 12:59 PM • 23 Sep 2026

केंद्र सरकार ने घटिया उत्पादों पर लगाम लगाने के लिए 1 अप्रैल 2027 से स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए BIS प्रमाणन अनिवार्य कर दिया है. इस फैसले से देशी निर्माताओं और 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा मिलेगा, जिससे 20,000 करोड़ रुपये के इस बाजार में हजारों नए रोजगार पैदा होंगे.

टेम्पर्ड ग्लास को लेकर सरकार का नया नियम
टेम्पर्ड ग्लास को लेकर सरकार का नया नियम
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आमतौर पर स्मार्टफोन खरीदने के बाद हम पहला काम जो करते हैं वो है टेंम्पर्ड ग्लास लगाना. इस दौरान दुकानदार अलग-अलग टेम्पर्ड ग्लास की प्राइस बताता है और आप अपनी जेब के हिसाब से कोई एक चुन लेते हैं और खुशी-खुशी घर आ जाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस टेम्पर्ड ग्लास पर आप हजारों रुपये के फोन की सुरक्षा का जिम्मा छोड़ रहे हैं वो सच में आपके फोन की स्क्रीन बचाएगा या हल्का सा गिरते ही खुद भी टूटेगा और स्क्रीन का भी कचरा कर देगा?

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इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. अब आपके फोन के स्क्रीन गार्ड और टेम्पर्ड ग्लास को लेकर नियम एकदम सख्त होने जा रहे हैं. आइए, इस पूरे मामले को बारीकी से समझते हैं कि आखिर सरकार ने क्या नया नियम बनाया है, इसका आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा और इससे देश के कारोबार को कैसे पंख लगेंगे!

मामला क्या है? 

हाल ही में केंद्र सरकार ने साफ-साफ कह दिया है कि अब कोई भी ऐरा-गैरा या लोकल स्क्रीन प्रोटेक्टर बनाकर या विदेशों से लाकर भारत में खुलेआम नहीं बेच सकेगा. अब हर स्क्रीन प्रोटेक्टर के पास  BIS यानू ब्यूरों ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड की मुहर होना यानी 'बीआयएस सर्टिफिकेशन' होना एकदम अनिवार्य कर दिया गया है. अगर किसी स्क्रीन प्रोटेक्टर बनाने वाली कंपनी या उसे आयात करने वाले व्यापारी के पास यह बीआईएस का सर्टिफिकेट नहीं होगा तो वो भारत के बाजार में अपना माल नहीं बेच पाएगा.

यह नियम लागू कब से होगा? 

सरकार ने इसके लिए थोड़ा वक्त दिया है ताकि कंपनियां अपनी तैयारी पूरी कर सकें . यह नियम  1 अप्रैल 2027  से पूरे देश में सख्ती से लागू कर दिया जाएगा .

सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?

आप सोच रहे होंगे कि सरकार इतने छोटे से स्क्रीन गार्ड के पीछे क्यों पड़ गई? तो इसके पीछे दो-तीन बहुत बड़ी और जायज वजहें हैं:

1. नकली और घटिया माल का पूरा मायाजाल

भारत में हर साल करोड़ों की संख्या में स्क्रीन गार्ड बिकते हैं. इनमें से ज्यादातर माल चीन या अन्य देशों से घटिया क्वालिटी का आता है. यह टेम्पर्ड ग्लास देखने में तो बहुत चमकदार लगते हैं, लेकिन असल में यह साधारण कांच से भी गए-बीते होते हैं. जरा सा फोन जेब से निकला या मेज से गिरा, तो टेम्पर्ड ग्लास तो चकनाचूर होता ही है, साथ में फोन की अंदर वाली महंगी डिस्प्ले भी फूट जाती है. ग्राहक को लगता है कि उसने तो सुरक्षा कवच लगाया था, फिर भी हजारों का नुकसान हो गया!

2. आंखों और उंगलियों का नुकसान

सस्ते और निकृष्ट क्वालिटी वाले स्क्रीन गार्ड में ब्लू-लाइट फिल्टर जैसी कोई तकनीक नहीं होती . जब आप दिन-रात उस पर उंगलियां घिसते हैं और गेम खेलते हैं या रील्स देखते हैं, तो उससे आपकी आंखों पर बहुत बुरा असर पड़ता है. इसके अलावा कई घटिया स्क्रीन गार्ड्स में घटिया केमिकल वाले चिपचिप (गोंद) का इस्तेमाल होता है, जिससे स्क्रीन का टच रिस्पॉन्स खराब हो जाता है.

3. देश की कंपनियों को बढ़ावा (मेक इन इंडिया)

जब विदेश से घटिया माल कौड़ियों के दाम में भारत में भर दिया जाता है, तो जो कंपनियां भारत में सही और मजबूत सामान बनाना चाहती हैं, वे टिक नहीं पातीं . सरकार के इस नियम से घटिया इंपोर्टेड माल पर ब्रेक लगेगा और 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत में ही स्क्रीन गार्ड बनाने वाली देसी कंपनियों को एक बहुत बड़ा मौका मिलेगा .

इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया का '66वां महारथी'

आपको जानकार हैरानी होगी कि सरकार इलेक्ट्रॉनिक सामानों की क्वालिटी सुधारने के लिए 'कम्पलसरी रजिस्ट्रेशन ऑर्डर' (CRO) नाम की एक लिस्ट चलाती है. अब तक इस लिस्ट में आपके घर का टीवी, लैपटॉप, मोबाइल फोन, लैपटॉप चार्जर, प्रिंटर, सेट-टॉप बॉक्स, माइक्रोवेव ओवन जैसी 65 बड़ी-बड़ी चीजें शामिल थीं. अब सरकार ने  स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर को इस लिस्ट का 66वां प्रोडक्ट  बना दिया है. यानी अब जिस तरह एक अच्छे और ब्रांडेड चार्जर या टीवी पर सुरक्षा के मानक जांचे जाते हैं, ठीक उसी तरह आपके मोबाइल के 100 रुपये वाले स्क्रीन गार्ड का भी बाकायदा लैब टेस्ट होगा कि वह गिराए जाने पर कितना दबाव झेल सकता है.

ऑप्टिमस इन्फ्राकॉम और कॉर्निंग का बड़ा धमाका

इस नियम के आने की भनक लगते ही और देश में इसकी भारी मांग को देखते हुए बड़ी-बड़ी कंपनियों ने भारत में अपने कारखाने लगाने शुरू कर दिए हैं. इसमें सबसे बड़ा नाम सामने आ रहा है ऑप्टिमस इन्फ्राकॉम का. ऑप्टिमस कंपनी ने उत्तर प्रदेश के  नोएडा  में टेम्पर्ड ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर बनाने के लिए एक बहुत ही आधुनिक प्लांट (फैक्टी) तैयार किया है .

इसे बनाने में किसकी तकनीक का इस्तेमाल होगा?  

आपने मोबाइल के विज्ञापनों में 'गोरिल्ला ग्लास' का नाम तो सुना ही होग. इस गोरिल्ला ग्लास को बनाने वाली अमेरिका की मशहूर कंपनी का नाम है कॉर्निंग. ऑप्टिमस कंपनी इसी कॉर्निंग की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके भारत में टेम्पर्ड ग्लास बनाएगी. कंपनी का कहना है कि वे जनवरी 2027 से इस फैक्ट्री से बने स्क्रीन प्रोटेक्टर की सप्लाई (Shipment) शुरू कर देंगे. कंपनी ने शुरुआती दौर में ही सालाना  2 करोड़ स्क्रीन प्रोटेक्टर  अतिरिक्त बनाने की योजना तैयार की है. ऑप्टिमस का अनुमान है कि इस टेम्पर्ड ग्लास के बिजनेस से ही वे चालू वित्त वर्ष में करीब  1,800 से 2,000 करोड़ रुपये  की कमाई (रेवेन्यू) खड़ा कर लेंगे .

कितना बड़ा है यह बाजार?

हम और आप जब दुकान पर जाकर 100-150 रुपये का टेम्पर्ड ग्लास लगवाते हैं तो लगता है कि यह तो बहुत छोटी सी चीज है . लेकिन जब पूरे भारत के आंकड़ों को जोड़ेंगे, तो आपके होश उड़ जाएंगे. इंडियन सेल्यूलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) जो कि भारत में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनियों की सबसे बड़ी संस्था है उसने कुछ चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं. जिसके अनुसार भारत में हर साल  50 करोड़ से भी ज्यादा स्क्रीन प्रोटेक्टर बेचे और खरीदे जाते हैं.

बिक्री के लिहाज से भारत में स्क्रीन प्रोटेक्टर का बाजार करीब  20,000 करोड़ रुपये  का है. ऐसे में नए नियमों के लागू होने के बाद जब देसी कंपनियां अपनी फैक्ट्रियां लगाएंगी, तो इस सेक्टर में करीब  60,000 (साठ हजार) लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से नौकरियां  (रोजगार) मिलेंगी. जब सारा काम नंबर एक में होगा और बिल फाड़े जाएंगे, तो सरकार को अकेले स्क्रीन गार्ड के कारोबार से लगभग  2,000 करोड़ रुपये का जीएसटी (GST)  टैक्स मिलेगा .

आम जनता (आप और हम) पर इसका क्या असर पड़ेगा?

अब आपके मन में सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा होगा कि इससे आम आदमी के जेब पर क्या असर पड़ेगा? क्या अब 100 रुपये वाला टेम्पर्ड ग्लास 500 रुपये का हो जाएगा?आइए इसे समझ लेते हैं:

1. थोड़ा दाम बढ़ सकता है पर टिकाऊपन मिलेगा

जब हर टेम्पर्ड ग्लास को लैब टेस्ट से गुजरना पड़ेगा और बीआईएस (BIS) का ठप्पा लेना होगा तो बेहद सस्ते, प्लास्टिक जैसे और घटिया क्वालिटी वाले टेम्पर्ड ग्लास बाजार से गायब हो जाएंगे . हो सकता है कि जो स्क्रीन गार्ड आपको सड़क किनारे 40-50 रुपये में मिल जाता था वह अब बंद हो जाए . आपको थोड़ा सा बेहतर और प्रामाणिक सामान खरीदना पड़े . लेकिन इसका फायदा यह होगा कि अगर आप 150 या 200 रुपये खर्च करेंगे तो आपको असली मजबूती मिलेगी .

2. फोन की महंगी डिस्प्ले का 'बीमा'

आजकल के स्मार्टफोन की स्क्रीन बदलना बहुत महंगा काम है . अगर आपका फोन 20,000 रुपये का है, तो उसकी स्क्रीन ही 6,000 से 8,000 रुपये की आती है . एक बीआईएस सर्टिफाइड मजबूत स्क्रीन प्रोटेक्टर लगाने से आपके फोन की महंगी डिस्प्ले फटने से बच जाएगी . यानी थोड़ा सा अच्छा टेम्पर्ड ग्लास आपके हजारों रुपये बचा लेगा!

3. आंखों और फोन की लंबी उम्र

अच्छी क्वालिटी के स्क्रीन गार्ड आने से फोन का टच बिल्कुल मक्खन की तरह चलेगा . फिंगरप्रिंट सेंसर तेजी से काम करेगा और आपकी आंखों पर रोशनी का बुरा असर भी कम पड़ेगा .

भारत बनेगा दुनिया का 'स्क्रीन गार्ड हब'!

सरकार का यह कदम सिर्फ भारत के लोगों को अच्छा सामान देने तक सीमित नहीं है. सरकार की नजर बहुत दूर तक है. अब तक पूरी दुनिया में मोबाइल एक्सेसरीज बनाने के मामले में चीन का एकछत्र राज था . लेकिन अब जब भारत में बीआईएस (BIS) के कड़े नियम लागू होंगे और नोएडा जैसी जगहों पर कॉर्निंग जैसी दिग्गज अमेरिकी टेक्नोलॉजी के साथ फैक्ट्रियां बनेंगी तो भारत में तैयार होने वाले टेम्पर्ड ग्लास की क्वालिटी पूरी दुनिया में नंबर-वन होगी .

इससे आने वाले समय में

भारत न केवल अपनी 50 करोड़ स्क्रीन गार्ड की घरेलू मांग को खुद पूरा करेगा. बल्कि यहां से बने मजबूत और बीआईएस अप्रूव्ड स्क्रीन गार्ड यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और खाड़ी देशों में  निर्यात (Export)  किए जाएंगे . यानी भारत स्क्रीन प्रोटेक्टर के उत्पादन और निर्यात का एक बहुत बड़ा 'ग्लोबल हब' बन सकता है.

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