चीन के नए नियमों से बदल सकता है पूरी दुनिया का गोल्ड मार्केट... जानिए भारत पर कितना पड़ेगा असर?

Gold Price News: दुनिया का सबसे बड़ा सोना खरीदार देश चीन गोल्ड इंपोर्ट-एक्सपोर्ट नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रहा है. इस फैसले के बीच भारत में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. अब सवाल उठ रहा है कि क्या चीन का नया कदम भारतीय सर्राफा बाजार में भी बड़ी उथल-पुथल मचाने वाला है?

चीन के गोल्ड प्लान से मचा हड़कंप.
चीन के गोल्ड प्लान से मचा हड़कंप.

सौरभ दीक्षित

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Gold Price Today: दुनिया का सबसे बड़ा सोना खरीदार देश चीन अब गोल्ड मार्केट में एक ऐसा कदम उठाने जा रहा है, जिसकी गूंज भारत समेत पूरी दुनिया के सर्राफा बाजारों में सुनाई दे सकती है. दरअसल, चीन की सरकार सोने के आयात और निर्यात (इंपोर्ट-एक्सपोर्ट) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है. जब वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा सोना खरीदने वाला देश अपने नियमों को बदलने का ड्राफ्ट तैयार करे, तो उसका सीधा असर कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ना तय है. भारत जैसे देश के लिए यह खबर और भी अहम हो जाती है, जहां सोना सिर्फ एक निवेश नहीं बल्कि लोगों की भावनाओं और परंपराओं से जुड़ा हुआ है. आइए जानते हैं कि आखिर चीन का यह नया गोल्ड प्लान क्या है और बाजार में इसका क्या असर दिख रहा है.

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भारतीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट

चीन की इस बड़ी हलचल के बीच भारतीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 अगस्त डिलीवरी वाले सोने की कीमत पिछले कारोबारी दिन 1 लाख 42 हजार 402 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी. लेकिन जैसे ही आज बाजार खुला, सोने में तेज गिरावट देखने को मिली. सोना 1 लाख 40 हजार 886 रुपये पर खुला और शुरुआती कारोबार में करीब 1,950 रुपये तक टूटकर 1 लाख 40 हजार 450 रुपये तक पहुंच गया. यानी एक ही दिन में सोने ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है. चांदी की बात करें तो 4 सितंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले कारोबारी दिन 2 लाख 22 हजार 634 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी, जो आज बाजार खुलते ही 2 लाख 20 हजार 247 रुपये पर पहुंच गई. शुरुआती कारोबार में चांदी में भी करीब 2,400 रुपये तक की गिरावट देखने को मिली, जिससे दोनों कीमती धातुओं में बिकवाली का साफ दबाव नजर आया.

क्या है चीन का नया ड्राफ्ट और नियमों में बदलाव

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का केंद्रीय बैंक यानी 'पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना' और वहां का कस्टम विभाग मिलकर सोने के आयात-निर्यात के नए नियमों का ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं. सरकार का कहना है कि इन नए नियमों का मुख्य मकसद कारोबार को आसान बनाना, लोगों के लिए कागजी प्रक्रिया को सरल करना और सीमा पार सोना लाने-ले जाने के नियमों को ज्यादा पारदर्शी बनाना है. अभी तक की व्यवस्था के तहत अगर कोई व्यक्ति सीमा पार सोना लेकर जाता था या बाहर से लाता था, तो उसके नियम चीन का केंद्रीय बैंक और कस्टम विभाग दोनों मिलकर संयुक्त रूप से तय करते थे. लेकिन नए ड्राफ्ट में इस व्यवस्था को बदलने का प्रस्ताव है. अब आगे चलकर सीमा पार सोने की निगरानी का बड़ा जिम्मा सिर्फ कस्टम विभाग के पास रहेगा और केंद्रीय बैंक की भूमिका पहले जैसी नहीं रहेगी. आसान शब्दों में कहें तो पहले जहां दो विभाग मिलकर फैसला लेते थे, वहीं अब ज्यादातर जिम्मेदारी अकेले कस्टम विभाग संभालेगा.

नियम तोड़ने वालों पर सख्ती और रिकॉर्डतोड़ आयात के आंकड़े

सरकार का मानना है कि इस नए सिस्टम से नियम आसान होंगे, विदेशी व्यापार तेज होगा और निगरानी ज्यादा स्पष्ट तरीके से हो पाएगी. इसके साथ ही विदेशी व्यापार करने वाली कंपनियों पर नकेल कसी जाएगी और नियम तोड़ने वालों पर जुर्माने की व्यवस्था को भी और अधिक सख्त व स्पष्ट किया जाएगा. इन चर्चाओं के बीच एक चौंकाने वाला आंकड़ा यह भी सामने आया है कि चीन ने मई महीने में रिकॉर्ड मात्रा में सोने का आयात किया है. आंकड़ों के मुताबिक, मई में चीन ने करीब 163 टन सोना आयात किया, जो पिछले दो साल से भी ज्यादा समय का सबसे बड़ा मासिक आयात है. अगर पूरे साल की बात करें, तो जनवरी से मई तक चीन करीब 692 टन सोना आयात कर चुका है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले लगभग 76 प्रतिशत ज्यादा है.

आखिर क्यों चीन में अचानक बढ़ गई सोने की मांग

विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में सोना खरीदने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़ी वजहें रही हैं. पहली वजह यह है कि चीन के घरेलू निवेशकों ने गोल्ड बार यानी सोने की ईंटों में अपना निवेश काफी बढ़ा दिया है. दूसरी वजह, वहां के बहुत से आम लोग धीरे-धीरे हर महीने थोड़ा-थोड़ा सोना खरीदने वाली बचत योजनाओं में लगातार पैसा लगा रहे हैं. तीसरी और सबसे बड़ी वजह यह रही कि कुछ समय पहले चीन के घरेलू बाजार में सोने की कीमत अंतरराष्ट्रीय कीमतों से काफी ज्यादा चल रही थी. ऐसी स्थिति में व्यापारियों के लिए बाहर से सोना मंगाकर घरेलू बाजार में बेचना एक बड़े फायदे का सौदा साबित हो रहा था, जिसके चलते आयात में यह भारी उछाल देखने को मिला.

रिकॉर्ड आयात के बीच चीनी बाजार में दिखने लगी ठंडक

एक तरफ जहां आयात के आंकड़े आसमान छू रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चीनी बाजार से एक बिल्कुल अलग कहानी भी सामने आ रही है, जहां अब सुस्ती और ठंडक के संकेत मिलने लगे हैं. जून की शुरुआत में चीन के गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) से बड़ी मात्रा में पैसा बाहर निकल गया. सिर्फ एक महीने के भीतर निवेशकों ने करीब 10 अरब युआन, यानी लगभग 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा की भारी-भरकम रकम गोल्ड ईटीएफ से निकाल ली. इसका साफ मतलब है कि अब कई निवेशकों को लगने लगा है कि फिलहाल सोने की कीमतों में पहले जैसी एकतरफा तेजी शायद नहीं रहने वाली है. पहले जहां लोग हर गिरावट पर सोना खरीदने दौड़ पड़ते थे, वहीं अब निवेशकों की राय बंटी हुई है; कुछ लोग अभी भी खरीदारी कर रहे हैं, जबकि एक बड़ा वर्ग अब इंतजार करना बेहतर समझ रहा है.

शेयर बाजार में सुस्ती और कोरोना काल के बाद की सबसे बड़ी गिरावट

इस अनिश्चितता का असर चीन के शेयर बाजार और फिजिकल मार्केट पर भी साफ देखा जा सकता है. हांगकांग शेयर बाजार में सोने के कारोबार से जुड़ी कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में दो से चार प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली है, जिससे साफ है कि शेयर बाजार भी अब सोने को लेकर थोड़ा सतर्क नजर आ रहा है. वहीं असली बाजार यानी फिजिकल ट्रेड की बात करें तो चीन की मुख्य ट्रेडिंग संस्था से आए ताजा आंकड़े बताते हैं कि मई महीने में सोने की निकासी सिर्फ 63.5 टन रही. यह आंकड़ा फरवरी 2020 यानी कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद का सबसे निचला स्तर है, जो मार्च के मुकाबले लगभग आधा रह गया है. इससे यह साफ हो जाता है कि शुरुआत में जिस आक्रामक रफ्तार से लोग सोना खरीद रहे थे, अब वह रफ्तार काफी धीमी पड़ चुकी है.

क्या भारत के सर्राफा बाजार पर भी पड़ेगा इसका असर

अब सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि चीन के इस खेल का भारत पर क्या असर होगा. चूंकि चीन और भारत दुनिया के दो सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देश हैं, इसलिए इन दोनों देशों की हलचल से वैश्विक बाजार प्रभावित होता है. अगर चीन में सोने की मांग दोबारा बढ़ती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ऊपर भागेंगी. लेकिन अगर चीन में निवेशकों की दिलचस्पी इसी तरह कम होती रही और वहां खरीदारी सुस्त पड़ी, तो वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों पर भारी दबाव आ सकता है और कीमतें गिर सकती हैं. आने वाले महीनों में दुनिया भर के कमोडिटी मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी रहेंगी कि चीन अपने इन नए नियमों को कब से लागू करता है और वहां के निवेशक आगे चलकर क्या रुख अपनाते हैं. फिलहाल रिकॉर्ड आयात और बाजार की सुस्ती के बीच पूरी दुनिया चीन के इस नए गोल्ड मॉडल के अगले कदम का इंतजार कर रही है.

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