Gold Price Today: एक तरफ वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का रुख है, वहीं दूसरी तरफ चीन लगातार अपने खजाने में सोना भरे जा रहा है. मई महीने में चीन ने लगातार 19वें महीने अपने गोल्ड रिजर्व में इजाफा किया है. जब दुनिया के कई निवेशक सोने से दूरी बना रहे हैं, तो चीन के इस 'गोल्ड गेम' के पीछे की वजह क्या है और भारतीय सर्राफा बाजार पर इसका क्या असर होगा? चलिए समझते हैं. सोमवार को भारतीय वायदा बाजार (MCX) पर सोना और चांदी दोनों भारी दबाव में नजर आए. खबर लिखे जाने के समय MCX पर सोना करीब 1.25 फीसदी गिरकर 1,53,661 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था. वहीं, चांदी में और बड़ी गिरावट देखी गई और यह करीब 2.44 फीसदी टूटकर 2,42,485 रुपये प्रति किलो के आसपास ट्रेड कर रही थी. बाजार में इस कमजोरी के बीच, चीन की लगातार सोना खरीदने की रणनीति ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है.
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चीन का रिकॉर्ड तोड़ 'गोल्ड रिजर्व' अभियान
रविवार को जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में चीन के केंद्रीय बैंक (People's Bank of China) ने अपने रिजर्व में करीब 3 लाख 20 हजार ट्रॉय औंस सोना जोड़ा है. इसके साथ ही चीन का कुल गोल्ड रिजर्व बढ़कर 74.96 मिलियन औंस हो गया है, जो अप्रैल में 74.64 मिलियन औंस था. सिर्फ एक महीने में चीन ने अपने खजाने में भारी मात्रा में नया सोना शामिल किया है. कीमत के लिहाज से चीन के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू अब 340 अरब डॉलर से ज्यादा हो चुकी है. यह 2015 के बाद से चीन का सबसे लंबा (लगातार 19वां महीना) गोल्ड खरीदारी अभियान है.
आखिर क्यों सोना जमा कर रहा है ड्रैगन?
सवाल उठता है कि चीन आखिर ऐसा क्यों कर रहा है? असल में यह मामला सिर्फ निवेश का नहीं, बल्कि अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने का है. दुनिया की ज्यादातर ट्रेडिंग आज भी डॉलर में होती है, लेकिन चीन पिछले कुछ सालों से डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है. इसी रणनीति के तहत वह अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सोने में बदल रहा है. सोना एक ऐसी सुरक्षित संपत्ति है जिस पर किसी एक देश या सरकार का कंट्रोल नहीं होता और संकट के समय इसकी अहमियत सबसे ज्यादा होती है. यानी चीन अपनी आर्थिक सुरक्षा की दीवार मजबूत कर रहा है.
चीन की खरीदारी के बाद भी क्यों गिर रहे हैं दाम?
यदि चीन इतनी बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहा है, तो फिर कीमतें गिर क्यों रही हैं? इसके पीछे कई वैश्विक कारण हैं. पहला कारण मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ता तनाव है. इजरायल और ईरान के बीच ताजा मिसाइल हमलों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़ी हैं. दूसरा और सबसे बड़ा कारण अमेरिका से आए मजबूत रोजगार आंकड़े और महंगाई की चिंता है. इन आंकड़ों से संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) ब्याज दरों में जल्द कटौती नहीं करेगा. ऊंची ब्याज दरों के कारण निवेशक सोने के बजाय बेहतर रिटर्न वाले दूसरे विकल्पों की तरफ रुख कर रहे हैं, जिससे सोने पर दबाव है.
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यदि आप सोने या चांदी में निवेश करते हैं, तो चीन की यह लगातार खरीदारी एक बड़ा और सकारात्मक दीर्घकालिक संकेत है. यह साफ करता है कि दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक आज भी सोने को सबसे सुरक्षित संपत्ति मानते हैं. हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि कीमतें तुरंत आसमान छूने लगेंगी. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शॉर्ट टर्म (कम अवधि) में सोना और चांदी दोनों दबाव में रह सकते हैं.
चांदी और सोने का अगला आउटलुक
एक्सिस सिक्योरिटीज के मुताबिक, इस हफ्ते सोने में कमजोरी का रुख जारी रह सकता है, क्योंकि बाजार की नजर अमेरिकी ब्याज दरों और महंगाई के आंकड़ों पर टिकी हुई है. वहीं, चांदी का आउटलुक भी फिलहाल कमजोर है. विश्लेषकों का मानना है कि जब तक चांदी अंतरराष्ट्रीय बाजार में 73 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर के ऊपर नहीं निकलती, तब तक उस पर दबाव बना रह सकता है. आने वाले दिनों में निवेशकों को मिडिल ईस्ट के हालात, अमेरिका के महंगाई के आंकड़े और फेड के संकेतों पर नजर रखनी होगी.
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