कच्चा तेल हुआ सस्ता, फिर भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम कब होंगे कम? जानिए अंदर का पूरा 'हिसाब किताब'

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें गिरने के बाद भी भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता क्यों नहीं हो रहा है? जानिए मिलिंद खांडेकर के शो 'हिसाब किताब' में यह खास विश्लेषण.

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कच्चे तेल का भाव गिरा पर पेट्रोल-डीजल का रेट जस का तस...ऐसा क्यों?

मिलिंद खांडेकर

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नई झड़पों और फिर बढ़ते तनाव से महंगा हो सकता है क्रूड ऑयल.

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पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर घाटे की भरपाई कर रही हैं पेट्रोलियम कंपनियां.

petrol diesel price rate: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें अब उसी स्तर पर आ गई हैं जहां वे इस साल फरवरी में थीं. जब ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव शुरू हुआ था तब क्रूड ऑयल करीब 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था. अब यह लगभग उसी भाव पर पहुंच चुका है. ऐसे में सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के बीच यह सवाल लगातार पूछा जा रहा है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता हुआ है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कब कम होंगी?

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इंडिया टुडे ग्रुप के 'Tak' चैनल्स के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर ने अपने खास शो 'हिसाब किताब' में इसका जवाब देते हुए कहा कि आम जनता को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत 'जल्दी नहीं' मिलने वाली है. इसके पीछे उन्होंने तीन मुख्य कारण और तकनीकी पेंच समझाए हैं.

अभी सस्ता क्यों नहीं होगा पेट्रोल-डीजल? ये हैं 3 बड़े कारण

1. युद्ध विराम की अनिश्चितता और सप्लाई का डर

अमेरिका और ईरान के बीच जो युद्ध विराम या समझौता हुआ है, वह सिर्फ 60 दिनों के लिए हुआ था. लेकिन इस समझौते के अभी महज 11 दिन ही बीते हैं और पिछले दो दिनों (शनिवार और रविवार) को दोनों देशों ने एक-दूसरे पर फिर से हमले शुरू कर दिए हैं. पूरी दुनिया का 20 फीसदी कच्चा तेल 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) से गुजरता है, जो फरवरी के आखिर से प्रभावित था. हालांकि ऑयल मार्केट बंद होने के कारण तत्काल इसका असर नहीं दिखा, लेकिन इन नई झड़पों से क्रूड ऑयल के दाम दोबारा बढ़ने की आशंका बनी हुई है. 

2. पेट्रोलियम कंपनियों का 1 लाख करोड़ का घाटा 

दूसरा बड़ा कारण सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) का घाटा है. अप्रैल महीने में हुए विधानसभा चुनावों के चलते सरकार के दबाव में कंपनियों ने मार्च से लेकर मई के मध्य तक पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए थे. 15 मई के बाद जब दाम बढ़े, तब तक ढाई-तीन महीने में इन कंपनियों को करीब 1 लाख करोड़ रुपए का भारी-भरकम नुकसान हो चुका था. कंपनियां अभी 7 रुपए प्रति लीटर महंगा पेट्रोल-डीजल बेचकर इस पुराने घाटे की भरपाई कर रही हैं, जिसमें कम से कम अगले ढाई से तीन महीने का समय और लगेगा. 

3. सरकार का एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का विकल्प 

मार्च के आखिर में सरकार ने तेल कंपनियों का घाटा कम करने के लिए पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी, जिससे सरकार को सालाना करीब 1 लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ. वर्तमान में सरकार की वित्तीय स्थिति (Fiscal Situation) और टैक्स कलेक्शन बहुत मजबूत स्थिति में नहीं है, जबकि सब्सिडी का खर्च लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में अगर क्रूड ऑयल के दाम और गिरते भी हैं, तो सरकार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर अपना टैक्स वसूल सकती है, जिससे आम जनता को कोई फायदा नहीं मिलेगा. 

तो फिर कब मिलेगी राहत? 

मिलिंद खांडेकर के मुताबिक, भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने का पुराना रिकॉर्ड हमेशा चुनावों से जुड़ा रहा है. साल 2021 के नवंबर में (2022 के यूपी-पंजाब चुनावों से ठीक पहले) और मार्च 2024 में (लोकसभा चुनावों से ठीक पहले) कीमतें कम की गई थीं. यदि क्रूड ऑयल की कीमतें मौजूदा स्तर पर स्थिर रहती हैं और तेल कंपनियां अपना घाटा पूरा कर लेती हैं, तो अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार दिवाली के बाद यानी अक्टूबर-नवंबर के महीने में जनता को राहत दे सकती है. 

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