Dhoot Transmission : शेयर बाजार में दमदार एंट्री, 37% प्रीमियम पर लिस्टिंग के बाद क्या अब भी है निवेश का मौका?

तनीषा त्यागी

• 11:57 AM • 17 Aug 2026

धूत ट्रांसमिशन का शेयर 37.8 फीसदी प्रीमियम पर 1200 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ. जानें ईवी मौके, विस्तार योजना, जोखिम और नए निवेशकों के लिए क्या रणनीति ठीक रहेगी.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

कंपनी का आईपीओ करीब 74 गुना भरा, जिससे मजबूत मांग दिखी

शेयर 871 रुपये के इश्यू भाव से 1200 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ

आईपीओ की रकम कर्ज घटाने, इकाइयां बढ़ाने और निवेश में लगेगी

Dhoot Transmission : ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनी Dhoot Transmission ने शेयर बाजार में शानदार शुरुआत की है. कंपनी के आईपीओ को निवेशकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और इश्यू करीब 74 गुना सब्सक्राइब हुआ. लिस्टिंग के दिन भी शेयर ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया. कंपनी के शेयर एनएसई पर 1,200 रुपये के भाव पर सूचीबद्ध हुए, जो 871 रुपये के आईपीओ इश्यू प्राइस से करीब 37.8 फीसदी अधिक है. मजबूत लिस्टिंग के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शेयर में अभी भी निवेश का मौका है या फिर लिस्टिंग के बाद तेजी के कारण इसमें सावधानी बरतने की जरूरत है. कंपनी का कारोबार, विस्तार की योजना, इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र से जुड़ी संभावनाएं और इससे जुड़े जोखिम इस फैसले में अहम भूमिका निभाएंगे.

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74 गुना सब्सक्रिप्शन के बाद शानदार लिस्टिंग

Dhoot Transmission के आईपीओ को निवेशकों की ओर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली. इश्यू करीब 74 गुना सब्सक्राइब हुआ. इसके बाद बाजार में इसकी लिस्टिंग को लेकर भी काफी उम्मीदें थीं. कंपनी के शेयर एनएसई पर 1,200 रुपये पर सूचीबद्ध हुए. इसका मतलब है कि 871 रुपये के इश्यू प्राइस की तुलना में शेयर करीब 37.8 फीसदी प्रीमियम पर बाजार में आया. लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में करीब 30 फीसदी प्रीमियम का अनुमान लगाया जा रहा था, लेकिन वास्तविक लिस्टिंग इससे भी बेहतर रही. लिस्टिंग के बाद कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब 24,419 करोड़ रुपये पहुंच गया. इस मजबूत शुरुआत ने निवेशकों का ध्यान कंपनी के कारोबार और आगे की संभावनाओं की तरफ खींचा है.

आईपीओ से मिले पैसे का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी आईपीओ से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण कामों के लिए करने वाली है. इसका एक प्रमुख हिस्सा पुराने कर्ज को चुकाने या समय से पहले उसके भुगतान में लगाया जाएगा. इसके अलावा कंपनी अपनी सहायक कंपनियों में भी निवेश करेगी, ताकि उनका कर्ज कम किया जा सके. कंपनी की विस्तार योजना में हरियाणा के झज्जर और तमिलनाडु के होसुर में नए वायरिंग हार्नेस संयंत्र स्थापित करना भी शामिल है. इसके अलावा भविष्य में कंपनी अधिग्रहण और दूसरे रणनीतिक निवेश के लिए भी इस रकम का इस्तेमाल कर सकती है. यानी आईपीओ से जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल एक तरफ कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत करने और दूसरी तरफ उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाएगा.

क्या कारोबार करती है Dhoot Transmission?

Dhoot Transmission की शुरुआत 1999 में हुई थी. कंपनी ऑटोमोबाइल और दूसरे उद्योगों के लिए इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट तैयार करती है. कंपनी के कारोबार में वायरिंग हार्नेस एक महत्वपूर्ण उत्पाद है. इसके अलावा यह इलेक्ट्रॉनिक सेंसर और नियंत्रक, ऑटोमोटिव स्विच, पावर कॉर्ड, केबल, कनेक्टर और टर्मिनल जैसे उत्पाद भी बनाती है. कंपनी का कारोबार सिर्फ यात्री वाहनों तक सीमित नहीं है. इसके उत्पाद दोपहिया, तिपहिया, वाणिज्यिक वाहन, ऑफ-रोड वाहन, अर्थ मूवर और कृषि उपकरणों में भी इस्तेमाल होते हैं. इसके अलावा कंपनी चिकित्सा उपकरणों और घरेलू उपकरणों के लिए भी उत्पाद तैयार करती है. इस तरह कंपनी का कारोबार ऑटोमोबाइल के साथ-साथ कई दूसरे क्षेत्रों तक फैला हुआ है.

इलेक्ट्रिक वाहन बनेगा बड़ा विकास का जरिया

कंपनी के लिए इलेक्ट्रिक वाहन यानी ईवी क्षेत्र आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण विकास का क्षेत्र हो सकता है. इलेक्ट्रिक वाहनों में इलेक्ट्रॉनिक्स और वायरिंग की जरूरत काफी महत्वपूर्ण होती है. जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ता है, वैसे-वैसे इनसे जुड़े कंपोनेंट की मांग भी बढ़ सकती है. Dhoot Transmission का वायरिंग हार्नेस और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट कारोबार कंपनी को इस बदलाव से फायदा उठाने का मौका देता है. हालांकि ईवी क्षेत्र से मिलने वाला वास्तविक फायदा कंपनी की उत्पादन क्षमता, नए ऑर्डर और कारोबार को लागू करने की क्षमता पर निर्भर करेगा.

कंपनी की तीन बड़ी मजबूती

  • कंपनी की पहली बड़ी मजबूती उसका वायरिंग हार्नेस कारोबार है. यह ऑटोमोबाइल क्षेत्र में महत्वपूर्ण कंपोनेंट है और कंपनी लंबे समय से इस क्षेत्र में काम कर रही है.
  • दूसरी मजबूती कंपनी का विविध कारोबार है. कंपनी के उत्पाद अलग-अलग प्रकार के वाहनों और कई औद्योगिक क्षेत्रों में इस्तेमाल होते हैं. इससे किसी एक वाहन श्रेणी या एक ही कारोबार पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है.
  • तीसरी बड़ी संभावना ईवी कारोबार से जुड़ी है. इलेक्ट्रिक वाहनों में इलेक्ट्रॉनिक और वायरिंग कंपोनेंट की बढ़ती जरूरत कंपनी के लिए लंबे समय में विकास का अवसर बन सकती है.

इसके अलावा कंपनी नई उत्पादन क्षमता तैयार करने की दिशा में भी काम कर रही है. अगर ये विस्तार योजनाएं तय समय और लागत के भीतर सफलतापूर्वक पूरी होती हैं, तो भविष्य में कंपनी के कारोबार को बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

कंपनी के सामने कुछ बड़े जोखिम भी 

किसी भी कंपनी की तरह Dhoot Transmission के कारोबार में भी कुछ जोखिम मौजूद हैं. इसमें सबसे महत्वपूर्ण जोखिम ग्राहकों पर निर्भरता का है.

  • अगर कंपनी का कारोबार कुछ बड़े ग्राहकों से आने वाले ऑर्डर पर काफी निर्भर रहता है, तो किसी बड़े ग्राहक की ओर से ऑर्डर कम होने की स्थिति में कंपनी के राजस्व और मुनाफे पर असर पड़ सकता है.
  • दूसरा बड़ा जोखिम विस्तार योजनाओं को लागू करने से जुड़ा है. नए संयंत्र लगाना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना और नए कारोबार को संभालना आसान नहीं होता. अगर परियोजनाओं में देरी होती है या लागत उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है, तो कंपनी की वित्तीय स्थिति पर दबाव आ सकता है.
  • इसके अलावा मजबूत लिस्टिंग के बाद शेयर का मूल्यांकन भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है. केवल शानदार लिस्टिंग को देखकर निवेश का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है.

बाजार विशेषज्ञों की राय 

Swastika Investmart की प्रमुख संपत्ति अधिकारी शिवानी न्याती के मुताबिक कंपनी की मजबूत राजस्व वृद्धि, वायरिंग हार्नेस कारोबार में स्थिति और ईवी क्षेत्र में बढ़ता जुड़ाव लंबे समय के लिए सकारात्मक पहलू हैं. हालांकि उनके मुताबिक ग्राहकों पर निर्भरता और कारोबार को सफलतापूर्वक लागू करने से जुड़े जोखिमों पर भी नजर रखना जरूरी है. उनका नजरिया लंबे समय के लिए सकारात्मक है और उन्होंने 1,100 रुपये के नुकसान-सीमा स्तर के साथ शेयर को बनाए रखने की राय दी है.

वहीं Kantilal Chhaganlal Securities के महेश एम. ओझा के मुताबिक मजबूत लिस्टिंग के बाद छोटी अवधि के निवेशक कुछ मुनाफा सुरक्षित कर सकते हैं. लंबी अवधि के निवेशकों के लिए उनका मानना है कि ईवी कारोबार में संभावित वृद्धि और कंपनी की क्षमता विस्तार योजनाएं महत्वपूर्ण विकास के अवसर बन सकती हैं. हालांकि नए निवेशकों के लिए उनका सुझाव है कि लिस्टिंग के तुरंत बाद शेयर का पीछा करने के बजाय कीमत में स्थिरता आने और बेहतर मूल्यांकन मिलने का इंतजार करना ज्यादा बेहतर हो सकता है.

अभी शेयर खरीदना चाहिए?

Dhoot Transmission की बाजार में शुरुआत निश्चित तौर पर मजबूत रही है. आईपीओ का करीब 74 गुना सब्सक्राइब होना और करीब 37.8 फीसदी प्रीमियम पर लिस्टिंग कंपनी में निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी को दिखाती है. कंपनी के लिए वायरिंग हार्नेस कारोबार, ईवी क्षेत्र में बढ़ता अवसर और नई उत्पादन क्षमता भविष्य के विकास के प्रमुख आधार बन सकते हैं. साथ ही आईपीओ से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कर्ज घटाने और विस्तार में किया जाना भी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण है. लेकिन मजबूत लिस्टिंग के बाद शेयर में निवेश करने से पहले मूल्यांकन पर नजर रखना जरूरी है. ग्राहकों पर निर्भरता, नई परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की क्षमता और कारोबार के विस्तार का वास्तविक असर आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगा. इसलिए लंबी अवधि के नजरिए से कंपनी की कहानी सकारात्मक नजर आती है, लेकिन नए निवेशकों के लिए लिस्टिंग के तुरंत बाद तेजी का पीछा करने के बजाय शेयर में स्थिरता और बेहतर मूल्यांकन का इंतजार करना ज्यादा संतुलित रणनीति हो सकती है.

डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है. किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें.

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