Gold Price: क्या सोना पहुंचेगा $5,000 के पार? JPMorgan के बुलिश अनुमान से बढ़ी हलचल

तनीषा त्यागी

10 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 10 2026 11:54 AM)

जेपीमोर्गन ने 2026 तक सोना 5000 डॉलर प्रति औंस पार जाने का अनुमान जताया है. जानिए भारतीय बाजार का रुख, गोल्ड कंपनियों के मौके और जोखिम.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

भारतीय बाजार में 10 ग्राम सोना करीब 1.51 लाख रुपये पहुंचा

एक हफ्ते में सोने ने 5.86 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज की

तीन महीनों में गिरावट भी दिखी, इसलिए उतार चढ़ाव अभी बना

Gold Price : सोने की कीमतों को लेकर एक बार फिर निवेशकों के बीच चर्चा तेज हो गई है. सवाल सिर्फ यह नहीं है कि गोल्ड आगे कितना महंगा हो सकता है, बल्कि यह भी है कि अगर सोने में बड़ी तेजी आती है तो निवेशकों को सीधे गोल्ड में पैसा लगाना चाहिए या फिर गोल्ड से जुड़ी कंपनियां भी बेहतर कमाई का मौका दे सकती हैं. इस चर्चा की सबसे बड़ी वजह है JPMorgan का बुलिश आउटलुक. बैंक का अनुमान है कि 2026 की चौथी तिमाही तक सोने की कीमत 5,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर सकती है. हालांकि यह एक अनुमान है, किसी तरह की गारंटी नहीं. लेकिन दुनिया के बड़े वित्तीय संस्थानों में से एक की यह राय सोने को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी जरूर बढ़ा रही है.

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भारतीय बाजार में भी सोने की चमक बढ़ी

घरेलू बाजार में भी सोने की कीमतों में हालिया तेजी देखने को मिल रही है. खबर लिखे जाने तक 5 अक्टूबर 2026 एक्सपायरी वाला 10 ग्राम सोना करीब 2.10% की तेजी के साथ 1.51 लाख रुपये के आसपास कारोबार करता नजर आया. अगर पिछले प्रदर्शन पर नजर डालें तो एक हफ्ते में सोने की कीमत करीब 5.86% बढ़ी है. वहीं एक महीने में इसमें लगभग 2.69% की तेजी देखने को मिली है. हालांकि तीन महीने का प्रदर्शन अभी भी कमजोर है और इस अवधि में सोना करीब 6.17% नीचे है. इससे साफ है कि बुलियन मार्केट में तेजी जरूर लौटी है, लेकिन कीमतों की चाल अभी भी पूरी तरह एकतरफा नहीं हुई है. निवेशकों को तेजी के साथ-साथ उतार-चढ़ाव को भी ध्यान में रखना होगा.

$5,000 का Gold Target भारत में 10 ग्राम के हिसाब से कितना होगा?

अब सबसे अहम सवाल यह है कि अगर सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचता है, तो भारतीय निवेशकों के लिए इसकी कीमत करीब कितनी हो सकती है. अगर डॉलर का भाव करीब 95.25 रूपये माना जाए, तो 5,000 डॉलर की कीमत भारतीय मुद्रा में करीब 4.76 लाख रूपये प्रति ट्रॉय औंस बैठती है. एक ट्रॉय औंस में लगभग 31.1 ग्राम सोना होता है. इस हिसाब से $5,000 प्रति औंस का Gold Price करीब 1.53 लाख रूपये प्रति 10 ग्राम बैठता है. यानी मौजूदा डॉलर-रुपया स्तर को आधार मानें तो JPMorgan का $5,000 का अनुमान भारतीय मुद्रा में लगभग 1.53 लाख रूपये प्रति 10 ग्राम के बराबर हो सकता है. हालांकि यह एक अनुमानित अंतरराष्ट्रीय कीमत है. भारत में वास्तविक गोल्ड रेट पर इंपोर्ट ड्यूटी, GST, लोकल प्रीमियम और अन्य लागतों का असर पड़ता है. इसलिए घरेलू बाजार में कीमत इससे अलग हो सकती है. सीधे शब्दों में समझें तो: $5,000/oz Gold ≈1.53 लाख रूपये/10 ग्राम, अगर डॉलर-रुपया करीब 95.25 रूपये माना जाए.

आखिर JPMorgan को सोने में इतनी तेजी क्यों दिख रही है?

सोने को लेकर JPMorgan का सकारात्मक अनुमान ऐसे समय आया है जब ग्लोबल मार्केट में कई तरह की अनिश्चितताएं मौजूद हैं. बाजार में आर्थिक ग्रोथ, ब्याज दरों, भू-राजनीतिक तनाव और एसेट वैल्यूएशन को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है. JPMorgan के दूसरी तिमाही के अपडेट में बैंक के CEO Jamie Dimon ने भी वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े जोखिमों को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है. उन्होंने बाजार में मौजूद अलग-अलग जोखिमों की तुलना ऐसी टेक्टोनिक प्लेट्स से की, जिनके टकराने पर बड़ा आर्थिक झटका देखने को मिल सकता है. इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि कोई बड़ा आर्थिक संकट आने वाला है. लेकिन बाजार में जब अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक अपने पोर्टफोलियो में ऐसे एसेट्स की तलाश करते हैं जो जोखिम को संतुलित कर सकें. सोना लंबे समय से इसी वजह से एक सुरक्षित निवेश या hedge के तौर पर देखा जाता रहा है.

शेयर बाजार में अनिश्चितता बढ़ी तो Gold को मिल सकता है फायदा

सोने की खासियत यह है कि कई बार जब शेयर बाजार में जोखिम बढ़ता है, तो निवेशक अपने पोर्टफोलियो का कुछ हिस्सा Gold जैसे एसेट में शिफ्ट करते हैं. अगर महंगाई, ब्याज दरों, आर्थिक ग्रोथ या भू-राजनीतिक तनाव को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने की मांग को सपोर्ट मिल सकता है. यही वजह है कि JPMorgan का 5,000 डॉलर का अनुमान सिर्फ एक कमोडिटी प्राइस टारगेट नहीं है, बल्कि ग्लोबल रिस्क एनवायरमेंट से भी जुड़ा हुआ है. हालांकि निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि सोना हमेशा एक ही दिशा में नहीं चलता. ब्याज दरों, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों में बदलाव होने पर इसमें तेज गिरावट भी देखने को मिल सकती है.

क्या सिर्फ सोना खरीदना ही सबसे अच्छा विकल्प है?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर आपको लगता है कि सोने की कीमत आगे बढ़ सकती है तो निवेश कैसे किया जाए. ज्वेलरी एक विकल्प है, लेकिन निवेश के लिहाज से इसमें मेकिंग चार्ज और अन्य लागत जुड़ती हैं. इसके अलावा ज्वेलरी को बेचते समय भी कीमत और चार्ज का अंतर रिटर्न को प्रभावित कर सकता है. गोल्ड कॉइन या बुलियन के जरिए भी सोने में निवेश किया जा सकता है. लेकिन इसमें भी खरीदारी के समय प्रीमियम और स्टोरेज की चिंता हो सकती है. यहीं पर Gold से जुड़ी कंपनियों का विकल्प सामने आता है.

Gold Mining कंपनियों में क्यों बढ़ सकती है दिलचस्पी?

अगर सोने की कीमत बढ़ती है और किसी माइनिंग कंपनी की उत्पादन लागत अपेक्षाकृत नियंत्रण में रहती है, तो कंपनी के मार्जिन और मुनाफे में बढ़ोतरी हो सकती है. यानी सोने की कीमत में तेजी का असर सिर्फ खुद Gold पर नहीं, बल्कि उससे जुड़े बिजनेस पर भी पड़ सकता है. लेकिन यहां जोखिम भी कम नहीं हैं. माइनिंग कारोबार में ऑपरेशनल खर्च काफी ज्यादा होता है. किसी खदान में उत्पादन रुकना, लागत बढ़ना, रेगुलेटरी समस्या या किसी खास क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता कंपनी के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है. इसलिए Gold Mining कंपनियों को सीधे सोने का विकल्प मानना सही नहीं होगा.

Gold Streaming और Royalty कंपनियां क्यों अलग हैं?

सोने से जुड़ा एक और दिलचस्प मॉडल Gold Streaming और Royalty कंपनियों का है. Franco-Nevada, Royal Gold और Wheaton Precious Metals जैसी कंपनियां इसी तरह के बिजनेस मॉडल से जुड़ी हैं. इन कंपनियों का मॉडल पारंपरिक माइनिंग कंपनियों से अलग होता है. ये माइनिंग कंपनियों को पूंजी उपलब्ध करा सकती हैं और बदले में भविष्य में तय शर्तों पर सोना खरीदने या उससे जुड़ी रॉयल्टी हासिल करने का अधिकार प्राप्त करती हैं. इस मॉडल में सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि कंपनियों को खुद पूरी माइनिंग प्रक्रिया संचालित करने की जरूरत नहीं होती. इससे माइन ऑपरेशन से जुड़े कुछ जोखिमों से दूरी बन सकती है. साथ ही अलग-अलग कंपनियों और प्रोजेक्ट्स में एक्सपोजर होने से पोर्टफोलियो में विविधता भी आ सकती है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ये कंपनियां जोखिम से पूरी तरह मुक्त हैं. सोने की कीमत में गिरावट, माइनिंग कंपनियों की स्थिति और ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में उतार-चढ़ाव इन कंपनियों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं.

निवेशकों के लिए क्या है बड़ा संकेत?

JPMorgan का 5,000 डॉलर प्रति औंस का अनुमान निश्चित तौर पर सोने के लिए सकारात्मक संकेत है. लेकिन निवेशकों को इसे पक्की भविष्यवाणी के तौर पर नहीं देखना चाहिए. सोने की कीमत आगे किस दिशा में जाएगी, यह कई फैक्टर्स पर निर्भर करेगा. वैश्विक आर्थिक ग्रोथ, ब्याज दरों का रुख, डॉलर की चाल, बॉन्ड यील्ड, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता इसमें अहम भूमिका निभाएगी. अगर वैश्विक बाजार में जोखिम बढ़ता है और निवेशक सुरक्षित एसेट्स की तरफ जाते हैं, तो सोने को फायदा मिल सकता है. वहीं अगर आर्थिक आंकड़े मजबूत आते हैं और ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनता है, तो Gold पर दबाव भी देखने को मिल सकता है.

क्या 2026 में Gold $5,000 पार कर पाएगा?

फिलहाल यह सबसे बड़ा सवाल है. JPMorgan का अनुमान है कि 2026 की चौथी तिमाही तक सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो वैश्विक Gold Market में एक नया स्तर देखने को मिलेगा. लेकिन निवेशकों के लिए असली चुनौती सिर्फ यह पता लगाना नहीं है कि सोना 5,000 डॉलर तक पहुंचेगा या नहीं. चुनौती यह भी है कि उस तेजी के बीच जोखिम को कैसे मैनेज किया जाए. इसलिए सिर्फ किसी बड़े बैंक के प्राइस टारगेट को देखकर निवेश का फैसला करना सही रणनीति नहीं होगी. निवेश की अवधि, जोखिम उठाने की क्षमता और पोर्टफोलियो में पहले से मौजूद एसेट्स को ध्यान में रखना जरूरी है.

फिलहाल इतना जरूर है कि सोने में दोबारा तेजी की चर्चा तेज हो चुकी है और JPMorgan का 5,000 डॉलर का अनुमान इस कहानी को और मजबूत कर रहा है. आने वाले महीनों में ग्लोबल इकोनॉमी, ब्याज दरों और बाजार के जोखिमों के बीच सोने की चाल पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी. निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखें और जरूरत पड़ने पर किसी योग्य वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.

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