Gold Price : सोने की कीमतों में एक बार फिर तेज रफ्तार देखने को मिल रही है और अब दुनिया के बड़े निवेश बैंकों में शामिल Morgan Stanley के एक अनुमान ने Gold Market की हलचल और बढ़ा दी है. बैंक का मानना है कि सोने में आगे भी तेजी की गुंजाइश बनी हुई है और 2027 में इसकी कीमत 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार जाने का रास्ता खुल सकता है. अगर आप सोने में निवेश करते हैं या आने वाले समय में Gold खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो Morgan Stanley का यह अनुमान आपके लिए खासा अहम हो सकता है. हालांकि, बैंक ने यह भी संकेत दिया है कि सोने की तेजी का सफर बिल्कुल सीधा नहीं रहने वाला है. कीमतों में तेज उछाल के साथ बीच-बीच में बड़ी गिरावट और भारी उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है.
ADVERTISEMENT
Q4 का टारगेट समय से पहले हासिल
Morgan Stanley ने सोने के लिए चौथी तिमाही यानी Q4 का 4,450 डॉलर प्रति औंस का टारगेट तय किया था. खास बात यह है कि सोना इस स्तर तक बैंक के अनुमान से पहले ही पहुंच गया. यही वजह है कि अब बाजार की नजर बैंक के अगले बड़े अनुमान पर टिक गई है. Morgan Stanley के मुताबिक, 2027 में सोने की कीमत 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार जाने की संभावना बन सकती है. हालांकि, इसे किसी निश्चित लक्ष्य या गारंटी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. Gold Market कई ऐसे फैक्टर्स से प्रभावित होता है, जो बेहद तेजी से बदल सकते हैं. ऐसे में आगे कीमतों में तेजी के साथ करेक्शन और Volatility दोनों देखने को मिल सकते हैं.
Fed की ब्याज दरों की चाल क्यों है अहम
सोने की कीमतों के लिए अमेरिका की Monetary Policy हमेशा से एक बड़ा फैक्टर रही है. खासकर Federal Reserve की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें Gold की दिशा पर असर डालती हैं. Morgan Stanley के मुताबिक, अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना पहले की तुलना में कम हुई है. अगर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दबाव कम रहता है, तो यह सोने के लिए सपोर्टिव माहौल तैयार कर सकता है. ब्याज दरों और सोने के बीच संबंध को समझना भी जरूरी है. जब ब्याज दरें ज्यादा होती हैं, तो निवेशकों के लिए ऐसे एसेट्स ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं जिनसे ब्याज या यील्ड मिलती है. इसके मुकाबले सोना खुद कोई ब्याज नहीं देता. वहीं, जब दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम होती है, तो Gold की Relative Attractiveness बढ़ सकती है.
Gold ETF में भी बदली निवेशकों की तस्वीर
सोने में निवेशकों की दिलचस्पी का अंदाजा Gold ETF में होने वाले निवेश से भी लगाया जा सकता है. Morgan Stanley के आंकड़ों के मुताबिक, मई और जून के दौरान Gold ETF से करीब 93 टन सोना बाहर निकला था. लेकिन जुलाई और अगस्त में स्थिति बदलती दिखाई दी और करीब 70 टन सोना वापस ETF में आया. इस बदलाव को Gold Demand के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है. यानी जिस दौर में ETF से सोना बाहर जा रहा था, उसके बाद निवेशकों की तरफ से दोबारा खरीदारी देखने को मिली है. अगर यह ट्रेंड आगे भी कायम रहता है, तो इससे सोने की कीमतों को अतिरिक्त सपोर्ट मिल सकता है.
Central Banks की खरीदारी भी जारी
सोने की तेजी की कहानी सिर्फ ETF निवेशकों तक सीमित नहीं है. दुनिया के Central Banks भी अपने Gold Reserves को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं. Morgan Stanley के मुताबिक, चीन ने इस साल अब तक करीब 60 टन सोना अपने रिजर्व में जोड़ा है. यह 2023 के बाद चीन की सबसे बड़ी खरीद बताई गई है. दूसरी तरफ पोलैंड ने भी करीब 82 टन सोना खरीदा है. इसके बाद पोलैंड का कुल Gold Reserve लगभग 632 टन तक पहुंच गया है. देश की नजर अब 700 टन के लक्ष्य पर है. Central Banks की लगातार खरीदारी Gold Market के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सोने की Institutional और Official Demand को मजबूती मिलती है.
भारत में भी सोने की कीमतों में जोरदार तेजी
वैश्विक बाजार में तेजी का असर घरेलू Gold Market में भी दिखाई दे रहा है. 5 अक्टूबर 2026 एक्सपायरी वाला सोना खबर लिखे जाने तक करीब 1.89 फीसदी की तेजी के साथ लगभग 1.62 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रहा था. अगर पिछले एक हफ्ते की बात करें, तो सोने की कीमत में करीब 5.02 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है. वहीं एक महीने के दौरान Gold ने लगभग 13.38 फीसदी का जोरदार उछाल दर्ज किया है. इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि फिलहाल सोने में Short Term के साथ-साथ एक महीने की अवधि में भी तेजी का ट्रेंड मजबूत बना हुआ है.
लेकिन सोने की तेजी में सबसे बड़ा रिस्क क्या है ?
गोल्ड मार्केट में तेजी के बीच निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात Risk और Volatility को समझना है. Morgan Stanley ने 2027 में 5,000 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जाने की संभावना जरूर जताई है, लेकिन बैंक ने यह भी संकेत दिया है कि इस सफर में उतार-चढ़ाव काफी ज्यादा रह सकता है. यानी ऐसा जरूरी नहीं है कि सोना लगातार एक ही दिशा में बढ़ता रहे. बीच में Profit Booking, Correction या किसी बड़े Global Event के कारण कीमतों में तेज गिरावट भी आ सकती है. इसलिए 5,000 डॉलर का अनुमान एक संभावित Scenario है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं.
Inflation Data पर भी रहेगी नजर
आने वाले समय में अमेरिका के Inflation Data भी Gold Market के लिए काफी अहम रहेंगे. महंगाई के आंकड़ों से यह संकेत मिल सकता है कि Federal Reserve आगे Monetary Policy को लेकर क्या रुख अपना सकता है. अगर Inflation को लेकर दबाव कम होता है और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कमजोर रहती है, तो Gold को सपोर्ट मिल सकता है. इसके अलावा COMEX पर Gold की Short Positioning भी एक महत्वपूर्ण संकेतक है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यह अप्रैल 2020 के बाद अपने सबसे निचले स्तर के करीब है. इसका मतलब यह भी है कि आगे Gold में तेजी को Short Covering से मिलने वाला सपोर्ट पहले की तुलना में सीमित हो सकता है. इसलिए बाजार में पहले से बनी तेजी के बावजूद नई खरीदारी और आगे की दिशा को लेकर सावधानी जरूरी होगी.
Gold अब सिर्फ ब्याज दरों की कहानी नहीं
सोने और अमेरिकी Real Yield के बीच संबंध को लंबे समय से बाजार में काफी अहम माना जाता रहा है. लेकिन Morgan Stanley के मुताबिक, Gold की कीमतों पर अब सिर्फ Yield का असर नहीं देखा जा रहा. बाजार अमेरिकी Fiscal स्थिति यानी सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंताओं को भी Gold की कीमत में शामिल कर रहा है. इस बदलाव का मतलब यह है कि निवेशकों के लिए सोना सिर्फ Inflation Hedge या Interest Rate से जुड़ा Asset नहीं रह गया है. आर्थिक अनिश्चितता, सरकारी वित्तीय स्थिति और नीतिगत जोखिम बढ़ने पर भी Gold को एक Safe Haven Asset के तौर पर देखा जा सकता है.
2027 में $5,000 का स्तर कितना बड़ा होगा
अगर Morgan Stanley का अनुमान सही साबित होता है और Gold 2027 में 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंचता है, तो यह मौजूदा स्तरों से एक और बड़ा उछाल होगा. हालांकि, इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कई परिस्थितियों का एक साथ अनुकूल होना जरूरी होगा. Central Bank Buying, ETF Demand, अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा, Inflation, Real Yield और Global Economic Uncertainty जैसे फैक्टर्स आगे Gold की चाल तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. यही वजह है कि सोने में तेजी की कहानी को सिर्फ एक Price Target के नजरिए से देखना सही नहीं होगा.
निवेशकों के लिए क्या है संकेत
फिलहाल Gold Market में कई ऐसे संकेत हैं जो तेजी के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं. Central Banks की खरीदारी जारी है, Gold ETF में निवेशकों की वापसी हुई है और Federal Reserve की तरफ से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम होने से भी सोने को सपोर्ट मिल सकता है. दूसरी तरफ, Gold में पहले ही तेज उछाल देखने को मिल चुका है. ऐसे में कीमतों में Correction का जोखिम भी बना हुआ है. इसलिए अगर कोई निवेशक Gold में निवेश करने की योजना बना रहा है, तो सिर्फ Morgan Stanley के 5,000 डॉलर वाले अनुमान को देखकर फैसला लेना सही रणनीति नहीं होगी. निवेश का फैसला अपने Risk Appetite, Investment Horizon और Portfolio Allocation को ध्यान में रखकर करना ज्यादा जरूरी है. फिलहाल बाजार के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि Q4 के 4,450 डॉलर के लक्ष्य को अनुमान से पहले हासिल करने के बाद क्या Gold 2027 में Morgan Stanley के बताए 5,000 डॉलर प्रति औंस के अगले बड़े मुकाम तक पहुंच पाएगा. Gold की मौजूदा तेजी को देखते हुए यह स्तर अब बाजार के लिए सिर्फ एक अनुमान नहीं, बल्कि आने वाले समय का सबसे बड़ा Watch Point बन गया है.
Gold Loan Boom: घर का सोना बन रहा नया ATM, JPMorgan ने बताया अगले 5 साल का बड़ा खेल
ADVERTISEMENT

