नए साल और शादियों के सीजन के बीच सोने की कीमतों में रही तूफानी तेजी ने लोगों को सोच में डाल दिया है. सोने-चांदी के दाम 14 जनवरी को लगातार तीसरे दिन ऑल टाइम हाई पर पहुंच गए थे. पिछले 10 दिनों के अंदर 24 कैरेट सोने के दाम में करीब 6000 रुपये का उछाल आ चुका है. हालांकि 15 जनवरी की बात करें तो सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है. अब एक्सपर्ट्स ने आने वाले दिनों में सोने की कीमतों पर एक बड़ी चेतावनी दी है. सोना-चांदी के इस एपिसोड में आज जानेंगे की क्या आने वाले वक्त में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आने वाली है और एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?
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सोने का क्या है भाव?
सबसे पहले सोने की कीमतों के बारे में बात करते हैं. ग्लोबल मार्केट में स्पॉट गोल्ड 15 जनवरी को 0.50 फीसदी गिरकर 4604 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. पिछले सेशन में सोना 4642 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. फरवरी डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.9 फीसदी गिरकर 4594 डॉलर पर आ गया है. जानकारों के मुताबिक, पिछले सेशन में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने इसमें प्रॉफिट बुकिंग की है. इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फेडरल रिजर्व और ईरान पर नरम रुख ने भी इसके सेफ हेवन डिमांड को कम किया है। इसका असर सोने की कीमतों पर देखने को मिल रहा है.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निवेशक अब इस साल दो बार 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की उम्मीद कर रहे हैं. इतिहास गवाह है कि जब ब्याज दरें नीचे जाती हैं और दुनिया में भू-राजनीतिक या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स तेजी से चमकती हैं. और फिलहाल दुनिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन, आर्थिक जोखिम और बाजार में अस्थिरता तीनों मौजूद हैं.
सोने के कीमतों में फिर आएगा उछाल?
तो सवाल आता है कि आने वाले दिनों में सोने की कीमतों में कितना उछाल आएगा और बड़ी ग्लोबल बैंकों की इसपर क्या राय है. ऑस्ट्रेलिया के बड़े बैंक ANZ का मानना है कि, सोने की कीमत 2026 की पहली छमाही में $5,000 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जा सकती है. ANZ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कम ब्याज दरों का माहौल और वैश्विक अनिश्चितता सोने को मजबूत सपोर्ट देती रहेगी.
दूसरी ओर, स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने भी 2026 को लेकर काफी अहम संकेत दिए हैं. बैंक का कहना है कि 2026 में भी सोना निवेशकों के रडार पर पूरी मजबूती से बना रहेगा. स्टैंडर्ड चार्टर्ड सोने पर अब भी ओवरवेट(Overweight) पोजीशन रखे हुए है. स्टैंडर्ड चार्टर्ड के मुताबिक, अगले 3 महीनों में सोने का टारगेट $4,350 डॉलर प्रति औंस रह सकता है. अगले 12 महीनों में टारगेट $4,800 डॉलर प्रति औंस होगा. बैंक का कहना है कि, उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद, कमजोर अमेरिकी डॉलर और रियल बॉन्ड यील्ड्स के साथ सोने का उल्टा रिश्ता इस रैली को आगे बढ़ा सकता है.
एक्सपर्ट्स की क्या है राय?
कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने की कीमतें जिस तरह से तेजी से रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची हैं. अब इनमें प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिल सकती है. फरवरी और मार्च 2026 के बीच कीमतों में 10 फीसदी से लेकर 15 फीसदी तक की तकनीकी गिरावट देखने को मिल सकती है. अगर ग्लोबल लेवल पर व्यापारिक तनाव कम होता है या अमेरिकी डॉलर में मजबूती आती है तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर बाकी एसेट्स में लगा सकते हैं जिससे घरेलू भाव नीचे आ सकते हैं.
जेपी मॉर्गेन और गोल्डमैन सैक्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का मानना है कि ये गिरावट सिर्फ अस्थायी होगी. साल 2026 के अंत तक सोना 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के जादुई आंकड़े को छू सकता है. पिछले कुछ सालों में चीन, भारत समेत कई उभरते देशों के सेंट्रल बैंकों ने सोने की भारी खरीद की है. इसका मकसद है, डॉलर पर निर्भरता कम करना और रिजर्व को सुरक्षित बनाना. यही वजह है कि सोने को अब सिर्फ एक कमोडिटी नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो डाइवर्सिफायर के तौर पर देखा जा रहा है.
कुल मिलाकर विशेषज्ञ मानते हैं कि शॉर्ट टर्म में मुनाफावसूली से थोड़ा दबाव आ सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में सोने की बुनियाद अब भी मजबूत है. 2026 की ओर देखते हुए, सोना सिर्फ तेजी की कहानी नहीं, बल्कि जोखिम से बचाव की रणनीति भी है. जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ेगी, तो सोना निवेशकों को स्थिरता देने का काम करेगा. आपको क्या लगता है सोने की कीमतों आने वाले दिनों में गिरेंगी या फिर इनमें गिरावट देखने को मिलेगी.
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