Gold Silver Price Today: दुनियाभर के कमोडिटी बाजार से लेकर भारतीय सराफा बाजार तक इस समय सोना और चांदी दोनों ही कीमती धातुओं पर भारी दबाव देखा जा रहा है. वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों को लेकर गहराती चिंताओं के बीच भारत सरकार के एक बड़े फैसले ने बाजार में हड़कंप मचा दिया है. कीमतों में आई इस तेज गिरावट और सरकार के नए नियमों के बाद निवेशकों के मन में कई सवाल हैं. आइए जानते हैं कि आखिर सरकार का वह कौन सा बड़ा फैसला है जिसने बाजार की चाल बदल दी है और आने वाले दिनों में आपकी जेब पर इसका क्या असर होने वाला है.
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वैश्विक बाजार में क्यों टूट रहे हैं सोना और चांदी?
कीमती मेटल्स पर रिसर्च करने वाली वैश्विक संस्था हेरायस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय सोना और चांदी दोनों ही भारी दबाव के दौर से गुजर रहे हैं. इसका मुख्य कारण दुनियाभर में पैर पसारती महंगाई और ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंकों की बदलती रणनीति है. विशेषकर अमेरिका में उपभोक्ता (CPI) और उत्पादक (PPI) दोनों ही स्तरों पर महंगाई लगातार बढ़ रही है. इसे देखते हुए बाजार के जानकारों का मानना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' फिलहाल ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं करेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर दरें और बढ़ाई जा सकती हैं. जब भी ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक सोने जैसे गैर-ब्याज वाले सुरक्षित एसेट से पैसा निकालकर बैंक एफडी और सरकारी बॉन्ड जैसे विकल्पों में लगाने लगते हैं, जिससे सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट आती है.
भारतीय बाजार में आज के भाव
अगर भारतीय वायदा बाजार (MCX) की बात करें तो 27 मई को दोपहर करीब ढाई बजे दोनों ही कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 5 जून 2026 की डिलीवरी वाला सोना 544 रुपये की कमजोरी के साथ 1,57,072 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. वहीं, दूसरी ओर चांदी में और भी तगड़ा झटका देखने को मिला; जहां 3 जुलाई 2026 की डिलीवरी वाली चांदी 2,640 रुपये की गिरावट के साथ 2,67,988 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर ट्रेड कर रही थी. बाजार में मंदी का यह रुख साफ तौर पर वैश्विक दबाव और घरेलू स्तर पर हुए नीतिगत बदलावों का असर दिखा रहा है.
भारत सरकार इस फैसला बाजार में मचा हड़कंप
भारतीय बाजार में इस हलचल की सबसे बड़ी वजह भारत सरकार द्वारा लिया गया एक सख्त फैसला है. सरकार ने बीती 13 मई से सोना और चांदी पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 6% से सीधे बढ़ाकर 15% कर दिया है. यानी अब विदेशों से सोना-चांदी मंगाना काफी महंगा हो चुका है. चूंकि भारत दुनिया में तेल के बाद सबसे ज्यादा सोना और चांदी का आयात करता है, इसलिए जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमतें बढ़ती हैं, तो देश से भारी मात्रा में डॉलर बाहर जाता है जिससे भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ता है. सरकार ने डॉलर के आउटफ्लो को रोकने और रुपये को मजबूती देने के लिए ही यह कदम उठाया है. हालांकि, टैक्स बढ़ने की खबर आते ही भारतीय निवेशकों में घबराहट फैल गई और उन्होंने बाजार में भारी मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे घरेलू बाजार में सोने की कीमतें आधिकारिक दामों से लगभग 200 डॉलर प्रति औंस नीचे चली गईं.
देश के गोल्ड-सिल्वर इंपोर्ट में आई रिकॉर्ड गिरावट
सरकार के इस फैसले का सीधा असर अब देश के आयात आंकड़ों पर भी दिखने लगा है. भारत ने अप्रैल महीने में केवल 0.66 मिलियन औंस सोने का आयात किया जो पिछले 5 वर्षों के मासिक औसत से लगभग 47% कम है. इससे साफ है कि अब घरेलू बाजार में मांग घट रही है. इसके अलावा, सरकार ने चांदी के आयात को लेकर भी नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है. अब 999 शुद्धता वाली सिल्वर बार (चांदी की ईंट) और कुछ अन्य चांदी की वस्तुओं को प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया गया है. दरअसल, कुछ व्यापारी ज्यादा टैक्स से बचने के लिए सोना-चांदी को ज्वेलरी बताकर आयात कर रहे थे, जिसे रोकने के लिए सरकार ने इस लूपहोल यानी टैक्स चोरी के रास्ते को हमेशा के लिए बंद कर दिया है.
क्या और सस्ती होगी चांदी? जानिए विशेषज्ञों की राय
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारत में चांदी की मांग कम होने का असर वैश्विक कीमतों पर पड़ना तय है, क्योंकि भारत दुनिया में चांदी का एक बहुत बड़ा खरीदार है. उदाहरण के लिए, साल 2025 में भारत ने लगभग 210 मिलियन औंस चांदी का आयात किया था, जो पूरी दुनिया की कुल मांग का करीब 18% हिस्सा है. ऐसे में अगर भारत की तरफ से खरीदारी घटती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों पर दबाव और ज्यादा बढ़ सकता है. वर्तमान में सोने की स्पॉट कीमतें भी लगातार गिरकर 4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास पहुंच गई हैं. हालांकि, इन सब के बीच एक राहत भरी खबर यह है कि जहां आम रिटेल निवेशक बिकवाली कर रहे हैं, वहीं दुनिया के कई केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं. दिग्गज वैश्विक ब्रोकरेज फर्म Goldman Sachs का अनुमान है कि साल 2026 में केंद्रीय बैंक हर महीने लगभग 60 टन सोना खरीद सकते हैं, जो लंबी अवधि में सोने की कीमतों को एक मजबूत सहारा दे सकता है.
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