एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध तेज होता जा रहा है तो दूसरी तरफ चीन ने सोने पर बड़ा दांव खेल है. चीन चुपचाप बोरियां भर-भरकर सोना खरीद रहा है. यानी दुनिया इस वक्त एक बड़े भू-राजनीतिक संकट से गुजर रही है. एक तरफ जहां अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है, वहीं दूसरी तरफ चीन शांति से अपनी एक अलग गोल्डन चाल’ चल रहा है. हालांकि इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक कदम से सोने-चांदी की कीमतों में बड़ा खेल हो गया है, जिससे की कीमतों में बंपर तेजी आ गई है. आइए विस्तार से जानते है पूरी बात.
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सोने-चांदी का क्या है भाव?
सोने और चांदी की कीमत में 10 मार्च को काफी तेजी आई है. MCX पर शुरुआती कारोबार में चांदी की कीमत 11,000 रुपये से ज्यादा उछल गई, जबकि सोना करीब 1,700 रुपये महंगा हुआ है. MCX पर 5 मई की डिलीवरी वाली चांदी पिछले सत्र में 2,67,160 रुपये प्रति किलो के भाव पर बंद हुई थी और 10 मार्च को 2,71,000 रुपये पर खुली. शुरुआती कारोबार में यह 11,180 रुपये की तेजी के साथ 2,78,340 रुपये तक पहुंची. इसी तरह सोने की कीमत में भी तेजी आई है. 2 अप्रैल की डिलीवरी वाला सोना पिछले सत्र में 1,60,299 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था. 10 मार्च को ये 1,61,743 रुपये पर खुला और शुरुआती कारोबार में 1,62,010 रुपये तक ऊपर गया.
दरअसल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान में युद्ध जल्दी खत्म हो सकता है. साथ ही डॉलर इंडेक्स में भी गिरावट आई है. इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने और चांदी की कीमत में तेजी आई है. स्पॉट गोल्ड 0.8% तेजी के साथ $5,180 डॉलर प्रति औंस पर था जबकि अप्रैल डिलीवरी के यूएस गोल्ड फ्यूचर 1.7% तेजी के साथ $5,188 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया. स्पॉट सिल्वर में भी 3% की तेजी थी.
सोने पर चीन ने खेला बड़ा दांव!
युद्ध की इस आहट और वैश्विक अनिश्चितता के बीच, चीन लगातार भारी मात्रा में सोना खरीद रहा है. चीन के केंद्रीय बैंक ‘पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना’ यानी PBOC ने फरवरी महीने में भी सोने की अपनी ताबड़तोड़ खरीदारी जारी रखी है. ये लगातार 16वां महीना है जब चीन ने अपने खजाने में सोने का इजाफा किया है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में PBOC ने 30,000 ट्रॉय औंस सोना खरीदा, जिसके बाद उसका कुल स्वर्ण भंडार बढ़कर 74.22 मिलियन औंस तक पहुंच गया है. जनवरी में यह आंकड़ा 74.19 मिलियन औंस था.
एक्सपर्ट्स की राय
एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन का यह कदम महज एक निवेश नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी रणनीतिक चाल है. साल 2024 के अंत से ही चीन डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने यानी (डी-डॉलराइजेशन) की दिशा में काम कर रहा है. अपनी अर्थव्यवस्था को विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए वह अमेरिकी डॉलर के बजाय सोने पर अपना भरोसा जता रहा है.
जहां एक तरफ चीन और पूर्वी एशियाई देश सोना जमा करने में लगे हैं, वहीं दुनिया के बाकी देशों के केंद्रीय बैंकों की रणनीति पूरी तरह से बंटी हुई नजर आ रही है. पोलैंड का केंद्रीय बैंक, जो कुछ समय पहले तक दुनिया का सबसे आक्रामक खरीदार था, अब अपनी घरेलू रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने रिजर्व का कुछ हिस्सा बेचने का मन बना रहा है. दूसरी ओर, कड़े प्रतिबंधों और आर्थिक अलगाव का सामना कर रहे रूस और वेनेजुएला जैसे देश नकदी जुटाने के लिए अपना सोना बेच रहे हैं.
जेपी मॉर्गन का क्या है मानना?
कुल मिलाकर दुनिया के इन घटनाक्रमों का सीधा असर आम आदमी की जेब और उसके निवेश पर पड़ता है. जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोने की औसत कीमत 5,055 डॉलर प्रति औंस के आसपास रह सकती है. इसका सीधा मतलब यह है कि केंद्रीय बैंकों की लगातार मांग के कारण सोने की कीमतों में कोई बड़ी गिरावट आने की उम्मीद कम है. अमेरिकी मौद्रिक नीति में बदलाव के कारण बाजार में थोड़े समय के लिए भले ही अस्थिरता रहे, लेकिन लंबी अवधि में सोना एक मजबूत और सुरक्षित विकल्प बना रहेगा.
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