Gold Silver Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर उछाल आया है. सोना जहां करीब डेढ़ हजार रुपए महंगा हुआ है, वहीं चांदी के दाम सीधे लगभग 11 हजार चढ़ गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड के मुद्दे पर दी गई टैरिफ की धमकी और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहे तनाव के चलते गोल्ड-सिल्वर के दाम चढ़ रहे हैं. ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जे में उनका साथ नहीं देने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है. उधर, अमेरिकी कार्रवाई से निपटने के लिए NATO के सदस्यों देशों की सैन्य टुकड़ियां ग्रीनलैंड पहुंच गई हैं.
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सोने-चांदी में जारी इस तूफानी तेजी के बीच एक्सपर्ट्स ने सतर्क रहने की सलाह दी है. तो सवाल ये है कि क्या सोने-चांदी की कीमतों में ये तेजी आगे भी जारी रहने वाली है या फिर ये तेजी फंसा सकती है और कीमतों में गिरावट आ सकती है. सोना-चांदी के इस एपिसोड में आज जानिए इन सवालों के जवाब के साथ ही एक्सपर्टस का कीमतों में गिरावट को लेकर क्या कहना है?
सोने-चांदी में फिर दिखी तेजी
MCX एक्सचेंज पर 5 फरवरी 2026 की डिलीवरी वाला सोना दोपहर करीब डेढ़ बजे 2636 रुपये की उछाल के साथ 1,48,275 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. चांदी की बात करें तो MCX एक्सचेंज पर 5 मार्च 2026 की डिलीवरी वाली चांदी 9376 रुपये की बढ़त के साथ 3,19,651 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रही थी.
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्पॉट गोल्ड एक फीसदी से ज्यादा उछाल के साथ 4,719 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया है. जबकि चांदी 93.70 डॉलर प्रति औंस के भाव पर मिल रही है. सोना और चांदी लगातार मजबूत हो रहे हैं. बीच में एक-दो बड़ी गिरावट के बाद यह कहा जाने लगा था कि चांदी का बुलबुला फुट गया है, लेकिन सिल्वर ने उन अनुमानों को गलत साबित कर दिखाया है.
कमोडिटी एक्स्पर्ट्स की क्या है राय?
कमोडिटी एक्स्पर्ट्स का मानना है कि सोना और चांदी को सपोर्ट देने वाले फैक्टर्स अभी भी मौजूद हैं. इसलिए कीमतों के ऊपर जाने का सिलसिला जारी रह सकता है. बीच में कुछ उतार-चढ़ाव भले ही देखने को मिलें, लेकिन ऐसे हालात बनना मुश्किल है कि दोनों धातुओं का आकर्षण कम हो जाए. ग्रीनलैंड पर अमेरिकी रुख से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर टेंशन बढ़ने की आशंका है. डोनाल्ड ट्रंप किसी भी कीमत पर ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं और NATO देश इसके खिलाफ मजबूती से खड़े हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में हालात बिगड़ सकते हैं. उधर, रूस के बयानों से यूक्रेन के साथ जंग में तेजी आने की आशंका भी जन्म ले रही है. ऐसे में सोने-चांदी में निवेश बढ़ सकता है और दाम चढ़ सकते हैं.
आगे भी तेजी का अनुमान?
अंतर्राष्ट्रीय या घरेलू स्तर पर तनाव बढ़ाने वालीं खबरें गोल्ड में निवेश को आकर्षित करती हैं. सोने में निवेश सबसे सुरक्षित माना जाता है. अब चांदी भी गोल्ड वाली कैटेगरी में शामिल हो गई है. चांदी में धड़ाधड़ निवेश हो रहा है. इसके अलावा, चांदी का औद्योगिक उपयोग भी काफी ज्यादा है. खासकर, इलेक्ट्रॉनिक वाहनों और सोलर सेक्टर में चांदी की डिमांड बढ़ रही है. जबकि आपूर्ति में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. चीन ने भी चांदी के निर्यात को सीमित कर दिया है. इस वजह से सोने के साथ-साथ चांदी की चमक में भी निखार बना रह सकता है. ये रैली पिछले साल की ताकत को आगे बढ़ा रही है, क्योंकि 2025 में सोना करीब 60 से 70% तक बढ़ चुका था.
सोने के दाम बढ़ने की वजह?
सोने की इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह है ट्रंप द्वारा यूरोप पर लगाए जा रहे टैरिफ के खतरे. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड को नहीं दिया, तो अमेरिका उन पर टैरिफ लगा सकता है. ये 10% से शुरू होकर बाद में 25% तक भी जा सकता है. ऐसी खबरें शेयर बाजार को दबाव में डाल रही हैं और निवेशक गोल्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर भाग रहे हैं.
जब निवेशक शेयर या रियल एस्टेट जैसे रिस्की मार्केट से डरते हैं, तो वे सुरक्षित चीजों जैसे सोना में पैसा लगाते हैं. हाल ही में यूरोपीय और अमेरिकी बाजार में गिरावट भी देखी गई है, जिससे सोने की मांग और बढ़ गई. यही सेफ हेवन डिमांड सोने को रिकॉर्ड हाई तक ले गई है. और इसके कारण डॉलर में कमजोरी, जोखिम भरे ग्लोबल टेंशन और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद भी सोने को सपोर्ट दे रही है. सोना ही नहीं, चांदी और लौह धातु प्लैटिनम और पैलैडियम ने भी थोड़ी बढ़त दिखाई है.
क्या सोने की कीमत जल्द गिर सकती है?
कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोना जो रिकॉर्ड हाई पर है, वो जहां तक चल सकता है वहां तक चला है. मतलब, उत्साह भरा रुझान अभी भी बना हुआ है, लेकिन गिरावट आना भी संभव है. खासकर जब ब्याज दरों में कटौती ना हो, ग्लोबल संकट शांत हो, टैरिफ या युद्ध की खबरें कम हों. इतने ऊंचे स्तर पर जहां कीमत पहले से रिकॉर्ड तोड़ चुकी है, वहां करेक्टशन अचानक आ सकता है.
वहीं बड़े बैंकों और विश्लेषकों ने कहा है कि अगर सोना बार-बार रिकॉर्ड बनाता है, तो अगला लक्ष्य $5,000 प्रति औंस भी दिख रहा है. लेकिन ध्यान रहे जब कीमतें इतना ऊपर आ जाएं, तो छोटा-से-कुछ-उलटफेर या गिरावट कोई असामान्य बात नहीं है.
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